{"_id":"4377c258c9dae6415099f7237a421cb6","slug":"jairam-ramesh-sed-namo-meens-no-action-masseging-only-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":" पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा,‘नमो’ का मतलब नो एक्शन मैसेजिंग ओनली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा,‘नमो’ का मतलब नो एक्शन मैसेजिंग ओनली
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Tue, 26 May 2015 02:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। भाजपा का मतलब भारतीय जुमला पार्टी और मोदी का मतलब मर्डर आफ डेमोक्रेटिक इंडिया हो गया है। केंद्र सरकार के कामकाज की समीक्षा करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने ये बातें कहीं। कैंटोनमेंट स्थित एक होटल में सोमवार को उन्होंने मीडिया से कहा कि मोदी सरकार ने कोई नई योजना नहीं शुरू की बल्कि यूपीए के कार्यक्रमों की ही रीपैकेजिंग और मार्केटिंग कर रही है। कथनी और करनी में अंतर का आलम ये है कि गरीबों की हितैषी होने का दावा करने वाली मोदी सरकार ने जनहित के कार्यों के बजट में बड़े पैमाने पर कटौती की है। बिहार चुनाव में इसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि ‘मैक्सिमम गवर्नेंस और मिनिमम गवर्नमेंट’ का नारा देने वाले नरेंद्र मोदी की सरकार में अधिक अहंकार, एक व्यक्ति असरदार हो गया है। पूरी सत्ता प्रधानमंत्री के गिर्द घूम रही है। प्रधानमंत्री की ओर से लोकतंत्र के सभी आधार पर हमले हो रहे हैं। महत्वपूर्ण चर्चाओं के दौरान वे लोकसभा में रहते ही नहीं हैं। सिविल सोसाइटी को सरकार के खिलाफ नहीं बोलने के लिए धमकाया जा रहा है। ऐसे में
समीक्षा सरकार के बजाय केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की होनी चाहिए, जिनको लोग नमो यानी नो एक्शन मैसेजिंग ओनली के नाम से पुकारते हैं। नरेंद्र मोदी जब मुख्यमंत्री थे तब गुड्स एंड सर्विस टैक्स, आधार कार्ड और परमाणु करार का विरोध करते थे, लेकिन अब समर्थक हो गए। हम ऐसे ‘यू टर्न’ का समर्थन करते हैं लेकिन भूमि अधिग्रहण अधिनियम पर उनका यू टर्न लेने के उनके किसान विरोधी कदम का विरोध करते हैं।
विज्ञापन
रमेश ने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि मोदी जी दुनिया के सबसे कुशल इवेंट मैनेजर हैं। यह बात सही है क्योंकि वे हमारी योजनाओं की अच्छी रीपैकेजिंग और मार्केंटिग कर रहे हैं। जब मैंने कहा था कि इस देश को मंदिर से ज्यादा टॉयलेट की जरूरत है तो हमारी आलोचना की गई थी और आज वही सब किया जा रहा है। इससे विधायक अजय राय, राजेश मिश्रा, प्रजापति शर्मा, सीताराम केसरी और कमलाकर त्रिपाठी ने उनका स्वागत किया।
अविरल गंगा की बात क्यों नहीं
जयराम रमेश ने कहा कि वर्ष 2010 में काशी में ही प्रो. वीरभद्र मिश्र के यहां मैंने ‘मिशन क्लीन गंगा’ की घोषणा की थी। उसमें निर्मल गंगा के साथ-साथ अविरल गंगा की भी योजना थी। गोमुख से उत्तरकाशी तक इको सेंसटिव जोन घोषित किया गया था और इसके बीच बनने वाले तीन बांधों को रोक दिया गया था। अब उन बांधों को बनाने को बनाने की मंजूरी दे दी गई है। कहा कि गंगा परियोजना को किसी धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि ‘मैक्सिमम गवर्नेंस और मिनिमम गवर्नमेंट’ का नारा देने वाले नरेंद्र मोदी की सरकार में अधिक अहंकार, एक व्यक्ति असरदार हो गया है। पूरी सत्ता प्रधानमंत्री के गिर्द घूम रही है। प्रधानमंत्री की ओर से लोकतंत्र के सभी आधार पर हमले हो रहे हैं। महत्वपूर्ण चर्चाओं के दौरान वे लोकसभा में रहते ही नहीं हैं। सिविल सोसाइटी को सरकार के खिलाफ नहीं बोलने के लिए धमकाया जा रहा है। ऐसे में
विज्ञापन
समीक्षा सरकार के बजाय केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की होनी चाहिए, जिनको लोग नमो यानी नो एक्शन मैसेजिंग ओनली के नाम से पुकारते हैं। नरेंद्र मोदी जब मुख्यमंत्री थे तब गुड्स एंड सर्विस टैक्स, आधार कार्ड और परमाणु करार का विरोध करते थे, लेकिन अब समर्थक हो गए। हम ऐसे ‘यू टर्न’ का समर्थन करते हैं लेकिन भूमि अधिग्रहण अधिनियम पर उनका यू टर्न लेने के उनके किसान विरोधी कदम का विरोध करते हैं।
विज्ञापन
रमेश ने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि मोदी जी दुनिया के सबसे कुशल इवेंट मैनेजर हैं। यह बात सही है क्योंकि वे हमारी योजनाओं की अच्छी रीपैकेजिंग और मार्केंटिग कर रहे हैं। जब मैंने कहा था कि इस देश को मंदिर से ज्यादा टॉयलेट की जरूरत है तो हमारी आलोचना की गई थी और आज वही सब किया जा रहा है। इससे विधायक अजय राय, राजेश मिश्रा, प्रजापति शर्मा, सीताराम केसरी और कमलाकर त्रिपाठी ने उनका स्वागत किया।
अविरल गंगा की बात क्यों नहीं
जयराम रमेश ने कहा कि वर्ष 2010 में काशी में ही प्रो. वीरभद्र मिश्र के यहां मैंने ‘मिशन क्लीन गंगा’ की घोषणा की थी। उसमें निर्मल गंगा के साथ-साथ अविरल गंगा की भी योजना थी। गोमुख से उत्तरकाशी तक इको सेंसटिव जोन घोषित किया गया था और इसके बीच बनने वाले तीन बांधों को रोक दिया गया था। अब उन बांधों को बनाने को बनाने की मंजूरी दे दी गई है। कहा कि गंगा परियोजना को किसी धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।