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मदरसों को आधुनिक बनाने में जुटा पीएम मोदी का करीबी, पढ़ें पूरी खबर

Sat, 04 Feb 2017 03:04 PM IST
तबस्सुम, अमर उजाला, वाराणसी
तबस्सुम, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 04 Feb 2017 03:04 PM IST
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Jafar Sareshvala will help madrasa student to become doctor-engineer
Zafar Sareshwala - फोटो : अमर उजाला
कुर्ता-पायजामा में मदरसा छात्र और हिजाब में छात्राएं और उनके सामने 70 इंच का स्क्रीन। स्क्रीन पर एक ट्यूटर उन्हें अंग्रेजी, विज्ञान और गणित के सवाल हल कराता नजर आए तो वाकई आपको हैरत होगी।
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मदरसे का नाम सुनते ही अरबी और उर्दू की तालीम का ही ख्याल आएगा। अब इसमेें बदलाव होने जा रहा है। काशी के मदरसे हाईटेक पढ़ाई की ओर बढ़ गए हैं। मदरसे के बच्चों को अब मौलवी और हाफिज ही नहीं, डॉक्टर और इंजीनियर बनाने की कोशिश शुरू हो गई है।
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मुसलमान के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर...। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस विजन को उनके संसदीय क्षेत्र में मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के चांसलर जफर सरेशवाला ने बृहस्पतिवार को अंजाम दे दिया है।
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इस ‘वर्चुअल लर्निंग’ से मुंबई के साथ ही बनारस के मदरसा दायरतुल इस्लाहे चिराग-ए-उलूम के करीब ढाई हजार छात्र-छात्राएं जुड़ गए हैं। सेटेलाइट के जरिए मदरसा छात्रों की ऑनलाइन क्लासेज चलेंगी। हफ्ते में चार दिन दो घंटे के ‘लाइव क्लास रूम’ में बच्चे अंग्रेजी, विज्ञान और गणित पढ़ेंगे। 

सरेशवाला ने ‘तालीम-ओ-तरबियत’ के तहत मदरसे के बच्चों को उर्दू, अरबी के अलावा साइंस, गणित और अंग्रेजी से जोड़ने के लिए ये पहल की है। इसके जरिये मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों को न सिर्फ हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के लिए तैयार करना है बल्कि उनके लिए मेडिकल, इंजीनियरिंग के लिए भी रास्ते खोलने इसका मुख्य उद्देश्य है।

जफर सरेशवाला ने काशी से की मदरसों में वर्चुअल लर्निंग की शुरुआत

Jafar Sareshvala will help madrasa student to become doctor-engineer
लाइव क्लास रूम - फोटो : अमर उजाला
सरेशवाला ने बताया कि उन्होंने पायलट प्रोजेक्ट के तहत गुजरात के मदरसों में इसे शुरू किया था। बच्चों को ब्रिज कोर्स कराया गया। इसके बाद उन्होंने सीधे 12वीं बोर्ड की परीक्षा दी। नतीजा, कभी स्कूल न जाने वाले 15 मदरसा छात्रों में से आज तीन इंजीनियरिंग कर रहे हैं, कुछ बीएससी और कुछ बीकॉम कर रहे हैं।

जफर सरेशवाला ने कहा कि हमारी कोशिश है कि मदरसा छात्र सिर्फ मौलवी और हाफिज ही न बनें। उनके  सामने डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और मैनेजर बनने का भी रास्ता हो।

वहीं मुफ्ती--शहर बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि मदरसों के बच्चाें दीनी तालीम के साथ गणित, विज्ञान और अंग्रेजी की तालीम भी दी जाए। मदरसा छात्रों भी दूसरे बच्चों के मुकाबिल बनेंगे। 


यहां के मदरसों में भी होगी शुरुआत 
बरेली, पीलीभीत, संभल, दिल्ली, अहमदाबाद, हयातनगर


 
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