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बारिश में संक्रामक रोगों का बढ़ा खतरा, तैयारियां नाकाफी
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बारिश होने के बाद से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। किसी को सर्दी, खांसी तो कोई तेज बुखार से परेशान हो जाता है। शहरी, ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह जलभराव भी होने लगा है। ऐसे में डेंगू, मलेरिया, सहित अन्य संक्रामक बीमारियां होने की संभावना रहती है। इन सबके बीच स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां भी नाकाफी दिख रही हैं। अब तक अस्पतालों में न तो फीवर डेस्क बने है और न ही संक्रामक वार्ड बन पाए हैं। इस तरह की स्थिति तब है जब अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
बरसात के मौसम में घरों में छतों पर, गेट के पास, घरों के बाहर जलभराव होने लगता है। इस वजह से मच्छर जनित बीमारियां भी पांव पसारने लगती हैं। मंडलीय अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरएन सिंह का कहना है कि इस समय अस्पतालों की ओपीडी में भी सर्दी, खांसी, जुकाम, पैरों में जकड़न, थकान आदि की शिकायतों के साथ मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। घर के आसपास साफ-सफाई, खानपान पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। उधर, मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, दीनदयाल अस्पताल, शास्त्री अस्पताल रामनगर में बुधवार को दिन में ओपीडी में फीवर हेल्प डेस्क नहीं दिखा। यहीं नहीं संक्रामक वार्ड भी नहीं बन पाया है। फीवर हेल्प डेस्क के माध्यम से लोगों को बुखार, मच्छर जनित बीमारियों के बारे में जागरूक किया जाता है।
अब तक मिल चुके हैं मलेरिया के 51 मरीज
जिले में पिछले साल डेंगू के 286, मलेरिया के 164 मरीज मिले थे। इस साल जनवरी से अब तक सात महीने में मलेरिया के कुल 51 मरीज मिल चुके हैं। आधे से अधिक शहरी क्षेत्र के हैं। जिला मलेरिया अधिकारी शरद चंद पांडेय के अनुसार, स्क्रीनिंग अभियान में मलेरिया के मरीजों के मिलने के बाद संक्रामक वार्डों की अलग से सूची तैयार कराई जा रही हैं। ताकि फॉगिंग कराई जा सके। इसमें पंचायती राज विभाग, नगर निगम भी मिलकर काम करेगा। सभी जगहों पर दवाएं दी जा चुकी हैं, उसका छिड़काव कराया जाएगा।
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एक नजर में आंकड़ा
साल डेंगू मलेरिया
2022 - 51
2021 286 164
2020 4 9
2019 550 271
2018 327 340
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बरसात के मौसम में घरों में छतों पर, गेट के पास, घरों के बाहर जलभराव होने लगता है। इस वजह से मच्छर जनित बीमारियां भी पांव पसारने लगती हैं। मंडलीय अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरएन सिंह का कहना है कि इस समय अस्पतालों की ओपीडी में भी सर्दी, खांसी, जुकाम, पैरों में जकड़न, थकान आदि की शिकायतों के साथ मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। घर के आसपास साफ-सफाई, खानपान पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। उधर, मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, दीनदयाल अस्पताल, शास्त्री अस्पताल रामनगर में बुधवार को दिन में ओपीडी में फीवर हेल्प डेस्क नहीं दिखा। यहीं नहीं संक्रामक वार्ड भी नहीं बन पाया है। फीवर हेल्प डेस्क के माध्यम से लोगों को बुखार, मच्छर जनित बीमारियों के बारे में जागरूक किया जाता है।
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अब तक मिल चुके हैं मलेरिया के 51 मरीज
जिले में पिछले साल डेंगू के 286, मलेरिया के 164 मरीज मिले थे। इस साल जनवरी से अब तक सात महीने में मलेरिया के कुल 51 मरीज मिल चुके हैं। आधे से अधिक शहरी क्षेत्र के हैं। जिला मलेरिया अधिकारी शरद चंद पांडेय के अनुसार, स्क्रीनिंग अभियान में मलेरिया के मरीजों के मिलने के बाद संक्रामक वार्डों की अलग से सूची तैयार कराई जा रही हैं। ताकि फॉगिंग कराई जा सके। इसमें पंचायती राज विभाग, नगर निगम भी मिलकर काम करेगा। सभी जगहों पर दवाएं दी जा चुकी हैं, उसका छिड़काव कराया जाएगा।
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एक नजर में आंकड़ा
साल डेंगू मलेरिया
2022 - 51
2021 286 164
2020 4 9
2019 550 271
2018 327 340