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‘मालवीयाना’ में जान सकेंगे महामना के जीवन दर्शन, प्रसंगों की गौरव गाथा
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महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के जीवन दर्शन, शिक्षा, समाजसेवा, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में उनके योगदान सहित जीवन से जुडअन्य प्रसंगों की गौरवगाथा के बारे में अब हर जानकारी आसानी से मिल सकेगी। बीएचयू मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र की ओर से विशेष पहल की जा रही है। मालवीयाना नाम से 1962 में प्रकाशित पुस्तक के दूसरे भाग के प्रकाशन की तैयारी चल रही है। इससे महामना से जुड़े कई दुर्लभ प्रसंगों के बारे में जानने का मौका मिलेगा। वहीं महामना के जीवन दर्शन पर शोध करने वाले छात्रों को भी ऐतिहासिक जानकारियां भी एक ही जगह मिल जाएंगी।
महामना मालवीय का निधन मार्ग शीर्ष कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। इस बार यह तिथि 23 नवंबर को पड़ रही है। ऐसे में मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र की ओर से महामना की पुण्यतिथि भी मनाई जाएगी। महामना पर देश-विदेश में प्रकाशित पाठय सामग्रियों का संकलन करते हुए 1962 में प्रकाशित मालवीयाना में पत्र, पत्रिकाएं, समाचार, लेख, निबंध, संगोष्ठी विवरण, शोध लेख आदि शामिल हैं। 1962 में बीएचयू केंद्रीय ग्रंथालय के तत्कालीन ग्रंथालयी पद्मश्री प्रो. पीएम कौल के नेतृत्व में भाग एक का प्रकाशन हुआ। अब मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र ने दूसरे भाग के प्रकाशन का निर्णय लिया है। संपादन मंडल में शामिल उप पुस्तकालयाध्यक्ष संजीव सराफ का कहना है कि इसे मालवीयाना इसलिए नाम दिया गया था क्योंकि पुस्तकालय वर्गीकरण पद्धति में यदि कोई व्यक्ति विशेष इतना विराट हो जाता है तो उसको एक अलग क्रमांक संख्या देनी पड़ती है, जिससे कि उन पर प्रकाशित शोध उस पर प्रकाशित पाठ्य सामग्री को जनता के समक्ष लाया जा सके। महामना द्वारा किए गए अब तक बहुत से ऐसे कार्य है, जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। मालवीयाना भाग दो के पुस्तक के रुप में प्रकाशन के साथ ही उसका डिजिटलाइजेशन भी किया जाएगा। इसे पुस्तकालय में भी रखा जाएगा।
महामना पर 5024 पाठ्यसामग्री का प्रकाशन
संजीव सराफ का कहना है कि अनुशीलन केंद्र के समन्वयक प्रो. आशाराम त्रिपाठी के निर्देशन में मालवीयाना भाग दो को तैयार कराया जा रहा है। अब तक भाग एक में जो पुस्तक प्रकाशित हैं, उसमें महामना से जुड़े पत्र, पत्रिका, शोध पत्र, निबंध, समाचार पत्र प्रकाशन आदि को मिलाकर कुल 5024 पाठय सामग्रियां हैं। अब 1962 से 2021 तक जो भी प्रकाशन हैं, सबको भाग दो में समाहित किया जाएगा। निश्चित ही महामना के बारे में इससे लोगों को कई दुर्लभ जानकारियां मिल सकेंगी।
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महामना मालवीय का निधन मार्ग शीर्ष कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। इस बार यह तिथि 23 नवंबर को पड़ रही है। ऐसे में मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र की ओर से महामना की पुण्यतिथि भी मनाई जाएगी। महामना पर देश-विदेश में प्रकाशित पाठय सामग्रियों का संकलन करते हुए 1962 में प्रकाशित मालवीयाना में पत्र, पत्रिकाएं, समाचार, लेख, निबंध, संगोष्ठी विवरण, शोध लेख आदि शामिल हैं। 1962 में बीएचयू केंद्रीय ग्रंथालय के तत्कालीन ग्रंथालयी पद्मश्री प्रो. पीएम कौल के नेतृत्व में भाग एक का प्रकाशन हुआ। अब मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र ने दूसरे भाग के प्रकाशन का निर्णय लिया है। संपादन मंडल में शामिल उप पुस्तकालयाध्यक्ष संजीव सराफ का कहना है कि इसे मालवीयाना इसलिए नाम दिया गया था क्योंकि पुस्तकालय वर्गीकरण पद्धति में यदि कोई व्यक्ति विशेष इतना विराट हो जाता है तो उसको एक अलग क्रमांक संख्या देनी पड़ती है, जिससे कि उन पर प्रकाशित शोध उस पर प्रकाशित पाठ्य सामग्री को जनता के समक्ष लाया जा सके। महामना द्वारा किए गए अब तक बहुत से ऐसे कार्य है, जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। मालवीयाना भाग दो के पुस्तक के रुप में प्रकाशन के साथ ही उसका डिजिटलाइजेशन भी किया जाएगा। इसे पुस्तकालय में भी रखा जाएगा।
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महामना पर 5024 पाठ्यसामग्री का प्रकाशन
संजीव सराफ का कहना है कि अनुशीलन केंद्र के समन्वयक प्रो. आशाराम त्रिपाठी के निर्देशन में मालवीयाना भाग दो को तैयार कराया जा रहा है। अब तक भाग एक में जो पुस्तक प्रकाशित हैं, उसमें महामना से जुड़े पत्र, पत्रिका, शोध पत्र, निबंध, समाचार पत्र प्रकाशन आदि को मिलाकर कुल 5024 पाठय सामग्रियां हैं। अब 1962 से 2021 तक जो भी प्रकाशन हैं, सबको भाग दो में समाहित किया जाएगा। निश्चित ही महामना के बारे में इससे लोगों को कई दुर्लभ जानकारियां मिल सकेंगी।
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