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चौंकाने वाला खुलासा: पांच माह में 18 युवा निकले एचआईवी संक्रमित, पुरुषों से ज्यादा महिलाएं चपेट में; जानें वजह

Mon, 21 Sep 2026 03:15 PM IST
Pragati Chand रजनीकांत पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, मऊ।
रजनीकांत पांडेय, संवाद न्यूज एजेंसी, मऊ। Published by: Pragati Chand Updated Mon, 21 Sep 2026 03:15 PM IST
सार

मऊ में जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। यहां पांच महीने में 18 युवा एचआईवी संक्रमित पाए गए। इनमें तीन उच्च शिक्षा के लिए बाहर गए थे।

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Mau 18 youths found HIV-positive in Mau over five months
एचआईवी संक्रमण - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

मऊ जिले में युवाओं के बीच फैल रहा एचआईवी संक्रमण स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनकर उभरा है। पिछले पांच महीनों के भीतर जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर की जांच में 18 युवाओं में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई है।

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चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश युवा आजीविका कमाने के सिलसिले में बाहर रह रहे थे और हाल ही में घर लौटे थे, जबकि तीन युवा उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों में गए हुए थे।
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घर लौटने पर जब इन युवाओं की तबीयत बिगड़ी या जांच कराई गई, तो उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। एआरटी सेंटर की जांच टीमों द्वारा जब इन संक्रमित युवाओं की काउंसिलिंग की गई, तो बेहद संवेदनशील और आंखें खोलने वाले तथ्य सामने आए।

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पुरुषों से ज्यादा महिलाएं चपेट में
एआरटी सेंटर के आंकड़े के अनुसार वर्तमान में 2661 मरीजों का उपचार चल रहा है। इसमें सबसे अधिक 1398 महिला मरीज हैं। जबकि 1239 पुरुष और 119 किशोर हैं। मार्च माह 2026 से अब तक 137 नए मरीज आए हैं। इसमें 96 पुरुष, 38 महिला मरीज और 2 किशोर हैं। अगर बीते वर्ष के आंकड़े की बात करें तो यह संख्या 2580 थी।
 
काउंसिलिंग में सामने आया कि बाहर रहने के दौरान जागरूकता के अभाव के चलते ये युवा इस जानलेवा वायरस की चपेट में आ गए। सेंटर इंचार्ज डॉक्टर मुकुल मौर्या के अनुसार, रोजगार और पढ़ाई के लिए बाहर जाने वाले युवा अक्सर सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण लापरवाही का शिकार हो जाते हैं। फिलहाल इन सभी संक्रमितों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखते हुए उनका इलाज और एआरटी थेरेपी शुरू कर दी गई है।  

केस एक 
जिले के मधुबन तहसील का एक ग्रामीण क्षेत्र का 24 वर्षीय युवक पिछले दो साल से दिल्ली में एक फैक्टरी में कार्यरत था। तीन महीने पहले जब वह घर लौटा, तो उसे लगातार बुखार और कमजोरी की शिकायत रहने लगी। जांच कराने पर उसकी रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आई। काउंसिलिंग में उसने माना कि वहां रहने के दौरान वह अम्रक्षित जीवनशैली की गिरफ्त में आ गया था।
 
केस दो
उच्च शिक्षा के लिए बाहर गए छात्र की रिपोर्ट पॉजिटिव एक प्रतिष्ठित संस्थान में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए राज्य से बाहर गए 24 वर्षीय छात्र की तबीयत अचानक खराब हो गई। वजन लगातार घटने और बार-बार बीमार पड़ने पर परिजनों ने उसकी चिकित्सा जांच कराई। एआरटी सेंटर की जांच में वह संक्रमित पाया गया। छात्र ने माना कि दोस्तों की गलत संगत और जागरूकता की कमी के कारण उससे यह चूक हुई।

केस तीन
आर्थिक तंगी के कारण एक 26 वर्षीय युवक मुंबई में मजदूरी करने गया था। ढाई महीने पहले वह गांव लौटा और लगातार टाइफाइड व निमोनिया से पीड़ित रहने लगा। जब सामान्य दवाओं से आराम नहीं मिला, तो डॉक्टरों ने एचआईवी टेस्ट की सलाह दी। टेस्ट में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद अब उसका एआरटी केंद्र पर उपचार चल रहा है।

काउंसिलिंग में हुआ खुलासा, असुरक्षित जीवनशैली बनी मुख्य वजह 
सेंटर के चीफ फार्मासिस्ट शिवेंद्र सिंह ने बताया कि संक्रमित युवाओं की काउंसिलिंग के दौरान बड़े शहरों को चकाचौंध और परिवार की निगरानी न होने के कारण कई बार युवाओं का भटकना मिला है। इनमें पांच मामलों में असुरक्षित संबंध बनाने की बात सामने आई है। जबकि दो द्वारा टैटू बनाए जाने के बाद बीमार होने की बात कही जा रही है। काउंसिलिंग में किसी के परिवार में एचआईवी पॉजिटिव का कोई हिस्ट्री नहीं मिला है। जागरूकता की कमी के कारण वे अनजाने में इस गंभीर बीमारी को आमंत्रण दे बैठते हैं।
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