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घास से निखरेगी बाबा के स्वर्ण शिखर की अनुकृति
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 20 Jun 2017 01:02 AM IST
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amarujala
- फोटो : amarujala
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काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में एक और स्वर्ण शिखर की अनुकृति भक्तों को लुभाएगी। यह शिखर जंगलों में पाई जाने वाली कांस (घास) से बाबा के यज्ञ मंडप में तैयार होगा। मंदिर परिसर में सोमवार से तीन मंजिला यज्ञ मंडप निर्माण आरंभ हो गया। बाबा के स्वर्ण शिखर की तरह ही इस यज्ञ मंडप के शिखर को सुनहरे रंग में रंगा जाएगा।
बाबा विश्वनाथ के दरबार में अब श्रद्धालु यज्ञ और हवन भी कर सकेंगे। अभी तक बाबा का सिर्फ जलाभिषेक करने की ही परंपरा रही है। पहली बार न्यास परिषद की मंजूरी के बाद मंदिर प्रशासन ने यज्ञ, हवन, अनुष्ठान के लिए मंडप बनाने के लिए काम शुरू करा दिया है। बिहार के मुजप्फरपुर से आए फूस के मंडप विशेषज्ञ भरत साहनी के निर्देशन में 10 से अधिक कारीगर मिलकर काम कर रहे हैं। कारीगरों ने मिर्जापुर मठ के पास प्रस्तावित यज्ञ मंडप की नापजोख कर काम शुरू कराया। पखवारे भर के भीतर इसे पूरा कराने का निर्देश दिया गया है।
तीन मंजिले इस यज्ञ मंडप के चारों कोने चारों वेदों की महिमा पर आधारित होंगे। सबसे ऊपर मंडप का शिखर बाबा के स्वर्ण शिखर की हू-ब-हू अनुकृति होगा। फूस से तैयार होने वाले शिखर को सुनहरे रंग में रंगने की योजना है, ताकि देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु इस मंडप में भी बाबा के गर्भगृह जैसी ही अनुभूति कर सकें।
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बाबा विश्वनाथ के दरबार में अब श्रद्धालु यज्ञ और हवन भी कर सकेंगे। अभी तक बाबा का सिर्फ जलाभिषेक करने की ही परंपरा रही है। पहली बार न्यास परिषद की मंजूरी के बाद मंदिर प्रशासन ने यज्ञ, हवन, अनुष्ठान के लिए मंडप बनाने के लिए काम शुरू करा दिया है। बिहार के मुजप्फरपुर से आए फूस के मंडप विशेषज्ञ भरत साहनी के निर्देशन में 10 से अधिक कारीगर मिलकर काम कर रहे हैं। कारीगरों ने मिर्जापुर मठ के पास प्रस्तावित यज्ञ मंडप की नापजोख कर काम शुरू कराया। पखवारे भर के भीतर इसे पूरा कराने का निर्देश दिया गया है।
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तीन मंजिले इस यज्ञ मंडप के चारों कोने चारों वेदों की महिमा पर आधारित होंगे। सबसे ऊपर मंडप का शिखर बाबा के स्वर्ण शिखर की हू-ब-हू अनुकृति होगा। फूस से तैयार होने वाले शिखर को सुनहरे रंग में रंगने की योजना है, ताकि देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु इस मंडप में भी बाबा के गर्भगृह जैसी ही अनुभूति कर सकें।
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