गृह मंत्रालय का आदेश, पाकिस्तानी कैदियों से उच्चायुक्त नहीं कर सकेंगे अब बात
प्रदेश की जेलों में बंद पाकिस्तानी एवं बांग्लादेशी बंदियों से सीधे जेल प्रशासन अब उच्चायुक्त से बात नहीं कर सकेंगे। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने इस पर रोक लगा दी है। गृह मंत्रालय के निर्देश के क्रम में वाराणसी परिक्षेत्र के प्रभारी उप महानिरीक्षक कारागार अंबरीश गौंड ने 15 सितंबर को पत्र लिख कर जौनपुर सहित सभी जेल अधीक्षकों को निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि ऐसा करने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जौनपुर में भी दो बांग्लादेशी आतंकवादी बंद हैं।
सूत्रों की मानें तो प्रदेश की कई जेलों में पाकिस्तानी बंदी मछुआरे एवं अन्य बंद हैं। इनकी संख्या करीब 50 से अधिक है। पाकिस्तानी उच्चायुक्त एवं पाकिस्तानी अधिकारी जेलों में फोन कर इनसे सीधे बात करते थे। अलग भाषा में इनकी बातचीत जेल अधिकारी समझ नहीं पाते थे और इनके बीच बातचीत में किसी न किसी साजिश की बू आती थी।
गृह मंत्रालय को कुछ ऐसा इनपुट मिला है, जिसमें देश हित में इनके बीच बातचीत एवं संवाद ठीक नहीं हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार गृह मंत्रालय फारनर्स डिवीजन नई दिल्ली के उप सचिव मनोज झा ने जेल के अधिकारियों को गोपनीय पत्र लिख कर अवगत कराया है।
इस क्रम में अपर महानिरीक्षक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं वीके जैन ने सितंबर के प्रथम सप्ताह में प्रदेश के सभी जेल अधीक्षकों को पत्र लिख कर स्पष्ट तौर पर मना किया है। उन्होंने किसी तरह का पत्राचार नहीं करने एवं संवाद सीधे स्थापित किए जाने से मना कर दिया है। जौनपुर, वाराणसी, सहित पूर्वांचल की जेलों में कई ऐसे बंदी बंद है।
प्रभारी उप महानिरीक्षक कारागार वाराणसी परिक्षेत्र अंबरीश गौंड़ ने बताया कि गृह मंत्रालय के निर्देश के क्रम में सभी जेल अधीक्षकों को पत्राचार एवं सीधे संवाद कराने से मनाही कर दी गई है। गृह मंत्रालय के इजाजत के बगैर कुछ भी नहीं होगा।