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Hate Speech Case: अब्बास अंसारी की सजा पर रोक से इंकार, जमानत स्वीकार; अपील पर इस दिन होगी सुनवाई

Sat, 05 Jul 2025 06:54 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 05 Jul 2025 06:54 PM IST
सार

Abbas Ansari: इससे पहले अब्बास अंसारी ने आरोप लगाया था कि हेट स्पीच की सीडी को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने मऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट में पुलिस की ओर से पेश की गई हेट स्पीच से संबंधित ऑडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट और सीडी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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Hate Speech Case Refusal to stay Abbas Ansari sentence bail accepted appeal to be heard on 25 July
सजा सुनाए जाने के बाद निराश दिखे अब्बास। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Hate Speech Case: मऊ के विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए राजीव कुमार वत्स ने शनिवार को अब्बास अंसारी और मंसूर अंसारी की ओर से विधानसभा चुनाव के दौरान नफरती भाषण के मामले में गत 31 मई को सीजेएम द्धारा सुनाई गई सजा पर रोक लगाने की अर्जी को खारिज कर दिया। 

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वहीं दंडादेश के निष्पादन को निलंबित करते हुए अपील पर सुनवाई के लिए 25 जुलाई की तिथि नियत कर दिया। साथ ही दोनों की जमानत अर्जी को स्वीकार कर लिया।मामला शहर मामला शहर कोतवाली  क्षेत्र का है। 
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मामले में अभियोजन के अनुसार एसआई गंगाराम बिंद की तहरीर पर शहर कोतवाली में अपराध संख्या 97/ 22 धारा 506, 171च भादवि के तहत एफआईआर दर्ज हुई। इसमें सदर विधायक अब्बास अंसारी और अन्य को आरोपी बनाया गया। 

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ये है पूरा मामला

आरोप था कि 3 मार्च 22 को विधानसभा चुनाव के दौरान सदर विधानसभा सीट से सुभासपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे अब्बास अंसारी ने नगर क्षेत्र के पहाड़पुर मैदान में जनसभा के दौरान कहा कि जनपद मऊ के प्रशासन को चुनाव के बाद रोककर हिसाब किताब करने व इसके बाद सबक सिखाने की धमकी मंच से दी गई थी। 

पुलिस ने विवेचना के बाद धारा 506, 171 एफ,186,189,153 ए, 120 बी भादवि  मे सदर विधायक अब्बास अंसारी और उनके भाई उमर अंसारी, इलेक्शन एजेंट गाजीपुर जनपद के पुरानी कचहरी यूसुपुर के विरुद्ध आरोप पत्र भेजा था।

मंसूर अंसारी को छह माह की सजा

सीजेएम ने दोनों पक्षो के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी अब्बास अंसारी और मंसूर अंसारी को दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद अब्बास अंसारी को दो वर्ष की सजा के साथ ही कुल 11 हजार रुपये अर्थदंड लगाया था। वहीं, मंसूर अंसारी को छह माह की सजा सुनाई थी।

सीजेएम द्धारा दी गई सजा के विरुद्ध विशेष न्यायाधीश एमपी/ एमएलए के न्यायालय में अपील दाखिल की गई है। जिसमें अब्बास अंसारी और मंसूर अंसारी की ओर से प्रार्थना पत्र देकर सजा पर रोक लगाने, दंडादेश को निरस्त करने तथा जमानत स्वीकृत करने का अनुरोध किया था।

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