{"_id":"5a07fc164f1c1bb6678bb24a","slug":"hariom-made-caricature-and-become-world-record-holder","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डः ‘चींटी’ से ‘चोटी’ तक पहुंचा गाजीपुर का लाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डः ‘चींटी’ से ‘चोटी’ तक पहुंचा गाजीपुर का लाल
amarujala.com, presented by आलोक कुमार त्रिपाठी
Updated Sun, 12 Nov 2017 05:27 PM IST
विज्ञापन
कैरिकेचर बनाता हरिओम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कभी चींटी के कैरिकेचर से अपने कला जीवन की शुरुआत करने वाला हरिओम यूं ही कामयाबी की चोटी पर नहीं पहुंचा। कला के प्रति उसका लगाव बचपन से ही था। छठवीं कक्षा में उसके बनाए चींटी के कैरिकेचर को देख तब उसके कला शिक्षक एनके पांडेय आश्चर्यचकित रह गए थे।
शनिवार को उन्हें जैसे ही हरिओम के विश्व कीर्तिमान पार करने की सूचना मिली, वह उसे बधाई देने क्वींस कॉलेज पहुंचे। बताया, हरिओम का कला के प्रति एक अलग ही लगाव था। जब उसने चींटी का कैरिकेचर दिखाया तो उन्हें जितना आश्चर्य हुआ, उतनी ही खुशी भी हुई।
अपनी रुचि, मेहनत और सतत प्रयास की बदौलत वह आज यहां तक पहुंचा है। जवाहर नवोदय विद्यालय गाजीपुर के प्रधानाचार्य मुख्तार आलम कहते हैं कि हरिओम ने विद्यालय का नाम रोशन कर दिया। उन्हें बेहद गर्व की अनुभूति हो रही है कि हरिओम ने विश्वरिकॉर्ड पार कर अपना अभियान जारी रखा है।
विज्ञापन
हरिओम के अभियान की शुरुआत से उसके साथ-साथ मौजूद कला शिक्षिका मधुलिका कुशवाहा की आंखों से खुशी के आंसू छलक रहे थे। कहा, जिस उपलब्धि के लिए वर्षों से मेहनत-साधना की गई, आज आंखों के सामने उसे साकार होता देखा तो अपनी खुशी नहीं रोक पाई।
हरिओम के पिता रमेश प्रसाद सिंह और माता गीता देवी बेटे की उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे थे। कामयाबी की खुशी ऐसी कि तीन दिन से जगे होने के बावजूद किसी के चेहरे पर थकान का नामोनिशान नहीं था।
हरिओम के लांगेस्ट मैराथन ड्राइंग कैरिकेचर की निगरानी के लिए जिले के 62 प्रशासनिक और शैक्षिक अधिकारियों की टीम लगाई गई है। दो-दो अधिकारियों की चार-चार घंटे की शिफ्ट वार ड्यूटी यहां लगाई गई है। प्रशासनिक टीम की ओर से हरिओम के विश्व रिकॉर्ड अभियान का पूरा ब्यौरा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स को भेजा जा रहा है।
विज्ञापन
शनिवार को उन्हें जैसे ही हरिओम के विश्व कीर्तिमान पार करने की सूचना मिली, वह उसे बधाई देने क्वींस कॉलेज पहुंचे। बताया, हरिओम का कला के प्रति एक अलग ही लगाव था। जब उसने चींटी का कैरिकेचर दिखाया तो उन्हें जितना आश्चर्य हुआ, उतनी ही खुशी भी हुई।
विज्ञापन
अपनी रुचि, मेहनत और सतत प्रयास की बदौलत वह आज यहां तक पहुंचा है। जवाहर नवोदय विद्यालय गाजीपुर के प्रधानाचार्य मुख्तार आलम कहते हैं कि हरिओम ने विद्यालय का नाम रोशन कर दिया। उन्हें बेहद गर्व की अनुभूति हो रही है कि हरिओम ने विश्वरिकॉर्ड पार कर अपना अभियान जारी रखा है।
विज्ञापन
हरिओम के अभियान की शुरुआत से उसके साथ-साथ मौजूद कला शिक्षिका मधुलिका कुशवाहा की आंखों से खुशी के आंसू छलक रहे थे। कहा, जिस उपलब्धि के लिए वर्षों से मेहनत-साधना की गई, आज आंखों के सामने उसे साकार होता देखा तो अपनी खुशी नहीं रोक पाई।
हरिओम के पिता रमेश प्रसाद सिंह और माता गीता देवी बेटे की उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे थे। कामयाबी की खुशी ऐसी कि तीन दिन से जगे होने के बावजूद किसी के चेहरे पर थकान का नामोनिशान नहीं था।
हरिओम के लांगेस्ट मैराथन ड्राइंग कैरिकेचर की निगरानी के लिए जिले के 62 प्रशासनिक और शैक्षिक अधिकारियों की टीम लगाई गई है। दो-दो अधिकारियों की चार-चार घंटे की शिफ्ट वार ड्यूटी यहां लगाई गई है। प्रशासनिक टीम की ओर से हरिओम के विश्व रिकॉर्ड अभियान का पूरा ब्यौरा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स को भेजा जा रहा है।
गिनीज बुक की अनुमति पर अभियान
अधिकारियों की टीम की निगरानी में हरिओम
- फोटो : अमर उजाला
गाजीपुर जिले के देवकली निवासी 12वीं के छात्र हरिओम का आत्मबल और उत्साह बढ़ाने के लिए उसके पिता रमेश सिंह, मां गीता देवी और छोटे भाई के अलावा परिवार के अन्य सदस्य भी क्वींस इंटर कॉलेज में ही डटे हुए हैं।
कॉलेज पहुंच रहे लोगों के कैरिकेचर हरिओम कुछ मिनटों में बनाकर सामने रख देता है। पिता ने बताया कि हरिओम ने विश्व कीर्तिमान के अपने अभियान के लिए जून में ऑनलाइन आवेदन किया था और चार अगस्त को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से इसकी अनुमति मिली थी।
हरिओम ने अपने अभियान के शुरुआती 48 घंटे में पांच सौ से अधिक लोगों के कैरिकेचर बनाए हैं। इनका ब्यौरा गिनीज बुक को भेजा जा चुका है। उसके बाद बनाए गए कैरिकेचर का भी ब्यौरा तैयार किया जा रहा है।
गिनीज बुक के नियमानुसार एक घंटे में पांच मिनट का ब्रेक लिया जा सकता है। हरिओम के पिता रमेश सिंह भी कॉलेज में डटे हुए हैं। अभियान की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जा रही है।
अभियान में जुटे हरिओम को पेय पदार्थ के तौर पर जूस दिया जा रहा है। पहले दो दिनों में उन्होंने करीब 113 मिनट का ब्रेक लिया। इसमें सबसे लंबा ब्रेक आधे घंटे का आठ नवंबर की रात 9:20 पर उन्होंने लिया था।
कॉलेज पहुंच रहे लोगों के कैरिकेचर हरिओम कुछ मिनटों में बनाकर सामने रख देता है। पिता ने बताया कि हरिओम ने विश्व कीर्तिमान के अपने अभियान के लिए जून में ऑनलाइन आवेदन किया था और चार अगस्त को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से इसकी अनुमति मिली थी।
हरिओम ने अपने अभियान के शुरुआती 48 घंटे में पांच सौ से अधिक लोगों के कैरिकेचर बनाए हैं। इनका ब्यौरा गिनीज बुक को भेजा जा चुका है। उसके बाद बनाए गए कैरिकेचर का भी ब्यौरा तैयार किया जा रहा है।
गिनीज बुक के नियमानुसार एक घंटे में पांच मिनट का ब्रेक लिया जा सकता है। हरिओम के पिता रमेश सिंह भी कॉलेज में डटे हुए हैं। अभियान की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जा रही है।
अभियान में जुटे हरिओम को पेय पदार्थ के तौर पर जूस दिया जा रहा है। पहले दो दिनों में उन्होंने करीब 113 मिनट का ब्रेक लिया। इसमें सबसे लंबा ब्रेक आधे घंटे का आठ नवंबर की रात 9:20 पर उन्होंने लिया था।