Gyanvapi Case: ज्ञानवापी के मूलवाद में पक्षकार बनाने के मामले में हुई सुनवाई, पड़ी अगली तारीख
ज्ञानवापी से संबंधित वर्ष 1991 के प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वरनाथ केस की सुनवाई सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही है। इस मामले में पक्षकार रहे मूल वादी का निधन होने के बाद पक्षकार बनाए जाने पर आज फैसला आएगा।
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ज्ञानवापी से जुड़े एक मामले में बुधवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रशांत सिंह की अदालत में बहस हुई। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता देशरत्न श्रीवास्तव और नित्यानन्द राय ने कहा कि दक्षिण में नंदी महाराज और पश्चिम की तरफ शृंगार गौरी, भूतल पर व्यासपीठ, पूरब में आदि विश्वेश्वर स्वयं विराजमान हैं। पूरा परिसर अनादि काल से मंदिर था, है और रहेगा। हमारा केस और दावा सही है। विवादित आराजी पर विश्वेश्वर भगवान का शिवलिंग मौजूद है, जिसे विपक्षी फव्वारा कह रहे हैं। अब पूजा-पाठ, रोग- भोग आदि की अनुमति मिलनी ही चाहिए। अब मामले की सुनवाई 20 मई को होगी।
ज्ञानवापी मामले की बहस बुधवार को अदालत में शाम करीब साढ़े चार बजे तक चली। हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत के सामने साक्ष्य रखे और दलीलें दीं। वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने गजेटियर और मोतिचंद्र द्वारा लिखित काशी के इतिहास पुस्तक का उदाहरण दिया। साथ ही कहा कि औरंगजेब ने अनादि काल से मौजूद मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाने का प्रयास किया था, लेकिन मंदिर का स्वरूप बना रहा।
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से पिछली तारीख पर बहस की गई थी। उनकी तरफ से कहा गया था कि वादी को मुकदमा करने का अधिकार नहीं है। यह वाद वक्फ एक्ट, प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट, लिमिटेशन एक्ट के खिलाफ जाकर दाखिल किया गया है। इसलिए दावा चलने योग्य नहीं है। इसे खारिज किया जाए। प्रकरण के मुताबिक बजरडीहा भेलूपुर के विवेक सोनी और चितईपुर के जयध्वज श्रीवास्तव ने सिविल जज सीडी की अदालत में 25 मई 2022 को याचिका दाखिल की थी।
बीएचयू परिसर में आरएसएस भवन के पुन: संचालन पर 21 अगस्त को सुनवाई
बीएचयू परिसर में आरएसएस के भवन के पुनः संचालन और अवरोध उत्पन्न न करने को लेकर दाखिल वाद पर सिविल जज जूनियर डिवीजन फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम की अदालत रिक्त होने के कारण सुनवाई टल गई। अब इस वाद पर 21 अगस्त को सुनवाई होगी। सुंदरपुर कौशलेशनगर निवासी प्रमिल पांडेय ने अधिवक्ता गिरीश उपाध्याय व मुकेश कुमार मिश्र के जरिये वाद दाखिल किया है। इसमें कहा है कि 1931 में बीएचयू में संघ की शाखा चलती थी। 1938 में मालवीय की पहल पर दो कमरे का निर्माण कराकर संघ भवन बनवाया गया था। इसे 22 फ़रवरी 1976 को ढहवा दिया गया था। अब इसी भवन का निर्माण कर उस पर संघ भवन संचालित किए जाने को लेकर वाद दाखिल किया गया है।