ग्लोबल एनर्जी इंडिपेंडेंस डे: IIT BHU समेत तीन बड़े संस्थान सुझाएंगे सॉलिड वेस्ट को रिसाइकिल करने का तरीका
Varanasi News: ठोस अपशिष्ट को लेकर आईआईटी बीएचयू को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। मटेरियल का उपयोग कर विकास का काम किया जाएगा। तीनों संस्थानों को विश्लेषण के लिए 10 साइटें मिली हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देशभर में पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बने ठोस अपशिष्ट (सॉलिड वेस्ट) का उपयोग कर विकास के काम में लेने की मुहिम के अंतर्गत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बीएचयू को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है।
आईआईटी बीएचयू समेत देश के तीन बड़े संस्थान ठोस अपशिष्ट को रिसाइकिल करने का तरीका ढूढ़ेंगे। इसके जरिये ठोस अपशिष्ट को ऊर्जा के विभिन्न स्वरूपों में परिवर्तित कर उपयोग में लिया जाएगा। इनमें फर्निश ऑयल भी शामिल है, जो सड़क निर्माण के कार्य में लिया जाता है।
देशभर में हर रोज हजारों मीट्रिक टन ठोस अपशिष्ट कचरे के रूप में निकलता है। अकेले बनारस में 800 मीट्रिक टन कचरा प्रतिदिन निकलता है। त्योहार आदि के मौके पर यह बढ़कर 1000 मीट्रिक टन हो जाता है। मगर, शहर की पर्यावरणीय जरूरतों के हिसाब से सटीक तरीका न होने से बमुश्किल 25 से 30 फीसदी ठोस अपशिष्ट ही रिसाइकिल हो पाता है। राजधानी दिल्ली में भी 30 से 40 फीसदी ठोस अपशिष्ट की रिसाइकिलिंग हो पाती है।
भारत सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर (पीएसए) ने आईआईटी बीएचयू, आईआईटी मद्रास और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज बंगलूरू को ठोस अपशिष्ट को रिसाइकिल करने के तरीके ढूंढ़ने की जिम्मेदारी दी है।
एक करोड़ के इस प्रोजेक्ट के तहत इन संस्थानों के वैज्ञानिक आठ से 10 साइटों का विश्लेषण कर सॉलिड वेस्ट रिसाइकिलिंग के सटीक तरीके सुझाएंगे। तीनों संस्थानों को विश्लेषण के लिए 10 साइटें मिली हैं। आईआईटी बीएचयू को वाराणसी और दिल्ली में विश्लेषण करना है।
करसड़ा में मिला वायु प्रदूषण और माइक्रो प्लास्टिक
आईआईटी बीएचयू के अध्ययन में बनारस के करसड़ा की हवा में प्रदूषण मिला है। यहां एसटीपी है। ठोस अपशिष्ट निस्तारण के लिए यहां डंप किए जाते हैं। वहां की हवा में प्रदूषण का स्तर मानक से अधिक मिलने के साथ ही पानी में माइक्रोप्लास्टिक पाए गए हैं।
करसड़ा की हवा में कॉर्बन डाई ऑक्साइड और मीथेन गैस की मौजूदगी मिली है। अगर ठोस अपशिष्ट शोधित नहीं होता तो वह ग्लोबल वार्मिंग की वजह भी बनता है। इससे ठोस अपशिष्ट को भविष्य के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है।
हवा, पानी और मिट्टी तीनों को दूषित कर रहा ठोस अपशिष्ट
देश के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर (पीएसए) के अधीन काम करने वाली ‘वेस्ट टू वेल्थ मिशन’ कमेटी के सदस्य व आईआईटी बीएचयू के केमिकल इंजीनियरिंग के प्रो. आरएस सिंह ने बताया कि ठोस अपशिष्ट आने वाले समय में पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनने वाले हैं। प्लास्टिक कचरा हवा, पानी और मिट्टी तीनों को दूषित कर रहा है।
ठोस अपशिष्ट से प्लास्टिक कचरा अलग कर उसे जरूरत की सामग्री और कंपोस्ट बनाया जाता है। ठोस अपशिष्ट के रिसाइकिलिंग के क्या प्रॉपर तरीके हो सकते हैं, इसका विश्लेषण करने की जिम्मेदारी आईआईटी बीएचयू को मिली है, जिस पर काम शुरू हो गया है।