Varanasi News: काशी की गंगा आरती में वीआईपी सीट, रूफटॉप व्यू और नावों-बजड़ों के लिए अलग-अलग रेट तय हो चुके हैं। यहां तक कि अर्चकों के ठीक पीछे घाट की सीढि़यों के पत्थरों पर बैठने का भी दाम लिया जा रहा है।
जो स्वेच्छा से दान नहीं कर रहे, उनसे जोर देकर रुपये मांगे जा रहे हैं, जबकि आरती का थाल आसपास भी नहीं होता। वहीं, आरती में यह ट्रेंड देखकर आम भक्त दूर से ही गंगा आरती का आध्यात्मिक लाभ लेना शुरू कर चुके हैं।
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अस्सी घाट पर गंगा आरती के लिए जुटी भीड़।
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ऑनलाइन बुकिंग में इंक्वायरी के दौरान वेबसाइट संचालक बाहरी पर्यटकों से पांच सीट के लिए 3500 से 4200 रुपये तक की मांग कर रहे हैं। वहीं 1000 रुपये का सेक्रेड डिस्काउंट यानी कि पवित्र छूट भी दे रहे हैं। 3100 की जगह 2100 रुपये लेकर दो लोगों को गंगा आरती दिखाने का दावा कर रहे हैं। वेबसाइट बुकिंग वाले भक्तों को प्रोटोकॉल वाली लेन में ही गंगा आरती दिखाई जा रही है। अमर उजाला की ओर से दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पर गंगा आरती के नाम पर की जा रही वसूली की पड़ताल की गई।
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शाम से ही कटने लगती है रसीद।
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प्राचीन दशाश्वमेध घाट
घाट के ठीक किनारे नावों पर खड़े या बैठकर गंगा आरती देखने के 300 रुपये और एकदम पीछे बैठने के लिए 100-200 रुपये देने पड़ रहे थे। नाव से घूमेने के लिए 300 से 500 रुपये दिए जा रहे थे। जबकि आरती खत्म होने के बाद घूमने के लिए नाव वाले 100 रुपये ही ले रहे थे।
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सीढि़यों पर बैठे लोगों से उतारते हैं मोटी रकम।
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दशाश्वमेध घाट
गंगा आरती से पहले ही एक युवक रूफटॉप व्यू के लिए 200 से 300 रुपये की मांग पर्यटकों से कर रहा था। वह इशारे कर बता भी रहा था कि ऊपर बैठने का चार्ज है और नीचे का फ्री। ज्यादातर अंग्रेज पर्यटक ही ऊपर से गंगा आरती देखने के लिए छतों पर जा रहे थे।
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तीन से चार लोग इस काम में लगते हैं।
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अस्सी का पुराना घाट
गंगा आरती में आगे के पत्थरों पर बैठने वालों से बार-बार मांग कर रुपये लिए जा रहे थे। जबकि आसपास आरती की कोई थाल भी नहीं दिख रही थी।दबाव डालकर रुपये मांगे जा रहे थे। एक व्यक्ति पेन से डायरी में कुछ नोट भी कर रहा था। हालांकि नए वाले घाट पर लगीं कई वीआईपी कुर्सियां हटवा ली गई थीं। अस्सी का नया घाट: गंगा आरती देखने के लिए आगे लगीं कुर्सियां हटवा ली गईं हैं। वहीं, सीढि़याें पर बैठ कर लोग आरती देखते हैं।