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चार जगह, चार बड़ी गलतियां: ड्रेनेज सिस्टम की खामियां गलत डिजाइन, कम क्षमता और अधूरे इंतजाम
Wed, 26 Aug 2026 04:35 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Wed, 26 Aug 2026 04:35 PM IST
सार
वाराणसी में बारिश से मकान, दुकान और मंदिरों में जलभराव हो गया। कहीं सड़क से ऊंचे नाले बना दिए गए हैं तो कहीं वर्षों पहले बनाई गई ड्रेनेज लाइन अब तक चालू नहीं हो सकी है।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जलभराव की समस्या सिर्फ तेज बारिश का नतीजा नहीं है, बल्कि कई जगहों पर ड्रेनेज सिस्टम की खामियां, गलत डिजाइन, कम क्षमता और अधूरे इंतजाम इसके लिए जिम्मेदार हैं। बीएचयू से लेकर रविंद्रपुरी और बरेका से भिखारीपुर-अमरा बाईपास तक, अलग-अलग इलाकों में जलनिकासी की व्यवस्था की ऐसी कमियां सामने आई हैं, जो बारिश के दौरान जलभराव की समस्या खड़ी कर देती हैं। कहीं स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज प्लान नहीं है तो कहीं नालों की क्षमता कम है। कहीं सड़क से ऊंचे नाले बना दिए गए हैं तो कहीं वर्षों पहले बनाई गई ड्रेनेज लाइन अब तक चालू नहीं हो सकी है। पड़ताल में चार ऐसी बड़ी गल्तियां सामने आईं जिनका खामियाजा हर बारिश में लोगों को भुगतना पड़ता है।
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बीएचयू : यहां स्टार्म वाटर ड्रेनेज प्लान की जरूरत है। जो अब तक बन ही नहीं पाया। बीएचयू देशभर के बड़े-बड़े संस्थानों का सिस्टम डिजाइन करता है, लेकिन उसके पास अपना ही ड्रेनेज सिस्टम नहीं है। उसने अपनी सीवेज लाइन नगर निगम की उस लाइन में जोड़ दी है जिसकी क्षमता बीएचयू आबादी के लिए नहीं है।
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बरेका : देश विदेश के लिए रेलवे इंजन बनाने वाले बरेका का स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम गड़बड़ है। यहां नालों की क्षमता बेहद कम है और कई स्थानों पर नाले अवरुद्ध व क्षतिग्रस्त हैं। नदी से नाला बन चुकी अस्सी में लाइनों को जोड़ा है। निगम से हुए एमओयू के तहत पहाड़ी गेट से चितईपुर रोड तक लगभग 14.20 किलोमीटर स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम बनेगा।
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भिखारीपुर-अमरा बाईपास : पीडब्ल्यूडी ने यहां पर नाला बनाया ही नहीं है। जलनिकासी के लिए सड़क किनारे सिर्फ नालियां ही हैं। गलत डिजाइन के कारण यहां पानी जहां का तहां रह जाता है। इतना ही नहीं जो नालियां बनाई भी गई हैं ढाल बनाना ही भूल गए हैं। यहां के नाले का लेवल ऊंचा है और सड़क नीची है। पिछले दिनों इस चक्कर में आटो पलट गया था।
रविंद्रपुरी : यहां सीवेज लाइन गंगा में जाने वाली एसटीपी से जुड़ी है। जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है तो पानी धीमी गति से पास होता है। यहां बसपा सरकार में डाली गई स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज लाइन को चालू ही नहीं किया गया है। आसपास पशु पालन करने वाले इसी में गोबर बहाते हैं जिससे अक्सर यहां जलभराव की समस्या होती है।