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सीनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप के लिए वाराणसी की पांच खिलाड़ियों का चयन

Tue, 19 Dec 2017 12:41 PM IST
amarujala.com- Written by: आलोक त्रिपाठी
amarujala.com- Written by: आलोक त्रिपाठी Updated Tue, 19 Dec 2017 12:41 PM IST
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five select from varanasi for senior national karate championship
वाराणसी की ज्योति, निधि, दिव्या, गौरी और अनिता का हुआ चयन - फोटो : अमर उजाला
सीनियर नेशनल और अंडर-21 कराटे चैंपियनशिप के लिए वाराणसी की पांच खिलाड़ियों का चयन किया गया है। कोलकाता में 13 से 14 जनवरी तक आयोजित प्रतियोगिता के लिए यूपी टीम में ज्योति, निधि, दिव्या, गौरी और अनिता अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर चुनी गई हैं। पांचों करातेकाओ ने लखनऊ में एक से तीन दिसंबर तक आयोजित स्टेट चैंपियनशिप में टीम काता, काता और कुमिते में बेहतरीन फन और पैंतरे का प्रदर्शन किया था। 
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टीम काता में ज्योति, निधि और दिव्या ने बेहतरीन टीम वर्क का प्रदर्शन करते हुए स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया था। तीनों सहेलियां 2012 से लगातार टीम काता के अलावा काता और कुमिते की स्पर्धाओं में अपना बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। 
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नेशनल कराटे चैंपियनशिप के लिए यूपी की टीम में चयनित ज्योति, निधि, गौरी, दिव्या और अनिता का कहना है कि कराटे ने आत्मविश्वास का जो भाव हमारे अंदर भरा है, उसने हमें उड़ने की आजादी दी है। कहती हैं कि लड़कियों को अपने हक के लिए लड़ना चाहिए। आवाज भी उठानी चाहिए।
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कराटे ने आत्मरक्षा के साथ ही किसी भी परिस्थिति को हैंडल करने का तरीका सिखा दिया है। सहेलियां भी अब हमारे साथ बाहर कहीं भी जाने में सुरक्षित महसूस करती हैं। पांचों करातेकाओ वाराणसी की हैं। 10 साल से इसी में कदम-दर-कदम आगे बढ़ा रही हैं। बताया, पहले हम लोगों ने इसे शौक में सीखना शुरू किया था।

धीरे-धीरे घरवालों को इसका महत्व समझ में आ गया और घरवाले मदद करने लगे। कराटे ने हमारे अंदर का डर निकाल दिया है। सहेलियां भी टाम ब्वॉय कहकर बुलाती हैं।  पांचों का कहना है कि बेटियों के बारे में समाज की मानसिकता अभी भी नहीं बदली है। शहर और गांव में स्थितियां एक जैसी हैं।

कहीं अभिभावक सहयोग नहीं करते हैं तो कहीं लड़कियां भी कुछ नहीं करना चाहती हैं। लड़कियां जब तक अपने हक की आवाज नहीं उठाएंगी, बदलाव नहीं आएगा।
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मारपीट सीखने आया था, करियर बना लिया

five select from varanasi for senior national karate championship
अंतरराष्ट्रीय रेफरी विशन मोते - फोटो : अमर उजाला
 मुझे मारपीट करने में मजा आता था और मैं कराटे का प्रशिक्षण मारपीट सीखने के लिए आया था लेकिन दो महीने बाद ही मेरा विजन बदल गया। मैंने इसे करियर बना लिया। यह कहना है साउथ एशियन चैंपियनशिप 2016 में गोल्ड मेडलिस्ट सत्यनारायण मौर्या का। सारनाथ निवासी सत्यनारायण ने बताया कि कराटे ने मेरी सोच बदल दी। कराटे के कारण जीवन में अनुशासन और गंभीरता आ गई है।

कराटे में भारत कर रहा बेहतरीन प्रदर्शन
कराटे के अंतरराष्ट्रीय रेफरी विशन मोते मानते हैं कि भारत विश्व स्तर पर तेजी से कराटे में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है। भारत में प्रतिभाएं बहुत हैं। हर साल वर्ल्ड चैंपियन निकल रहे हैं और खिलाड़ी देश के लिए मेडल ला रहे हैं। यह सुखद है।

उन्होने कहा, अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से कराटे प्रतियोगिता के लिए मिला सहयोग प्रशंसनीय है। इस तरह से खेल को अगर स्थानीय स्तर पर प्रोत्साहन मिलेगा तो निश्चित रूप से खिलाड़ियों के हौसले बुलंद होंगे।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि नेपाल में कराटे खिलाड़ियों को सरकार से भी बहुत सुविधाएं और नौकरियां दी जाती हैं। इसके साथ ही निचले स्तर से कराटे को आगे बढ़ाने के लिए सरकार प्रयासरत है।
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