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Exclusive: चार साल में इरी के स्पीड ब्रीड की 30 हजार धान की प्रजातियों पर रिसर्च, 100 में मिली सफलता

Tue, 14 Jan 2025 07:34 PM IST
प्रगति चंद जमुना दयाल, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
जमुना दयाल, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 14 Jan 2025 07:34 PM IST
सार

इरी के स्पीड ब्रीड में चार साल में 30 हजार धान की प्रजातियों पर रिसर्च किया गया। जिसमें से 100 में सफलता मिली। वहीं धान की चार पारंपरिक प्रजातियों पर शोध हो रहा है। 

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Eri speed breed achieved success on 100 out of 30 thousand rice varieties in four years
धान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दक्षिण एशिया के पहले स्पीड ब्रीड प्रयोगशाला में बीते चार साल में अब तक 30 हजार धान की प्रजातियों पर शोध हुए हैं। इनमें से 100 प्रजातियों पर सफलता मिली है। इनको देश के कई हिस्सों में लगाया गया है।

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वर्ष 2021 में चांदपुर के अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान में तीन करोड़ 55 लाख रुपये की लागत से बने दक्षिण एशिया के पहले स्पीड ब्रीड प्रयोगशाला को चार साल हो चुके है। प्रयोगशाला के प्रभारी डॉ. उमा महेश्वर ने बताया कि प्रयोगशाला में दस साल के शोध को पिछले चार साल में पूरा किया गया है। इनमें 100 प्रजातियों पर सफलता मिली है। 
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इन प्रजातियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, सूखा और बाढ़ रोधी क्षमताओं पर शोध किया गया। अब इन प्रजातियों को देश के अलग अलग फार्मों पर खुले वातावारण में लगाया गया है। यहां परिणाम अच्छे हुए इन प्रजातियों को राष्ट्रीय बीज अनुसंधान में प्रमाणीकरण के लिए भेजा जाएगा।

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इरी में कृषि वैज्ञानिक पाकिस्तान, भूटान, मालदीव, नेपाल, भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों के लिए धान की उन्नत प्रजातियों पर शोध कर रहे हैं। पहले धान की प्रजातियों पर शोध करने में 10 साल लगते थे, अब स्पीड ब्रीड प्रयोगशाला में चार साल में ही क्राॅस प्रजातियों पर शोध पूरे हो रहे हैं। इससे किसानों को नई और उन्नत प्रजाति के बीज मिलेंगे।

अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती आबादी को देखते हुए पादप प्रजनन फैसिलिटी (स्पीड ब्रीड) कृषि वैज्ञानिकों के बीच एक उभरती हुई तकनीक है। पहले एक साल में सामान्य विधि मौसम के आश्रय एक से दो संततियों को प्राप्त किया जा सकता था जबकि स्पीड ब्रीड प्रयोगशाला में अब एक साल में चार से पांच संततियों (जनरेशन) को प्राप्त किया रहा है।

प्रयोगशाला में ऐसे होता है काम

स्पीड ब्रीड प्रयोगशाला में चार चेंबर बनाए गए हैं। जिसमें शोध के लिए लगाई धान की छह क्राॅस प्रजातियों पर कृत्रिम रोशनी, पानी, हवा मौसम के अनुकूल दिया जाता। पौधों के तेजी से विकास के लिए सात रंग की रोशनी समय-समय पर दी जाती है। जिससे पौधे कम समय में ही तैयार हो जाते है।

धान के पौधों की लंबाई कम करने पर भी हो रहा शोध
प्रयोगशाला के प्रभारी ने बताया कि स्पीड ब्रीड में पारंपरिक धान की प्रजाति काला नमक, तुलमंजरी जीआर 32 और काला चावल के पौधे की लंबाई को छोटा करने पर भी शोध चल रहा है। पौधे की लंबाई अधिक होने से किसान इसकी खेती करने से बचते है। किसानों की इसी समस्या को दूर करने के लिए पारंपरिक प्रजातियों पर शोध किया जा रहा है।
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