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Power Cut: वाराणसी में छह महीने में एक करोड़ से की मरम्मत, फिर भी कट रही चार- चार घंटे बिजली

Mon, 30 Jun 2025 12:56 PM IST
प्रगति चंद रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Mon, 30 Jun 2025 12:56 PM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी जिले में बिजली संकट से लोग परेशान हैं। यहां छह महीने में एक करोड़ से मरम्मत कराई गई, फिर भी भीषण गर्मी के बीच चार- चार घंटे बिजली कट रही है। 

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Electricity Crisis in Varanasi electricity cut for four hours every day afer repairs by one crore rupees
खुले में छोड़ा गया पैनल बॉक्स और जमीन पर लटकते तार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी जिले में बिजली आपूर्ति की बेहतर सुविधाएं मिल सकें, इसके लिए छह महीने से मरम्मत का काम चल रहा है। मेंटनेंस के नाम पर इस साल अब तक एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। फिर भी शहर और ग्रामीण इलाकों में इस महीने औसतन 4-4 घंटे बिजली गुल रही। इन तीन महीने में 412 ट्रांसफाॅर्मर जल गए हैं। इसमें 380 ट्रांसफॉर्मर तो केवल ग्रामीण इलाकों के हैं जबकि 32 शहर में भी जले हैं। 

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वहीं, 10 से अधिक काॅलोनियों में जगह-जगह पैनल बॉक्स के तार भी बाहर खुले पड़े हैं। तार टूटकर गिर रहे हैं। अंडर ग्राउंड केबल ब्लास्ट होने, पैनल ब्लॉस्ट होने की समस्या भी बढ़ती जा रही है। ट्रांसफॉर्मर भी खुले में रखे जा रहे हैं। इस तरह की लापरवाही तब हो रही है जब दो दिन पहले नेवादा गांव में एक 10 साल की बच्ची ने नीचे लटकते तार की चपेट में आकर दम तोड़ दिया।
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अप्रैल से जून महीने के बीच कटौती खूब हुई। कहीं तीन तो कहीं पांच घंटे तक बिजली कटौती की वजह से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। बिजली, कब आएगी और कब चली जाएगी, इसका कोई समय निर्धारित नहीं है। उपकेंद्रों पर फोन करने के बाद कहीं तारों के टूटने को वजह बताया जाता है तो कहीं पेड़ की डाली तार पर टूटकर गिरने से बिजली कटना बताया जा रहा है। 

रोहनिया, मड़ौली, चांदपुर, आदित्यनगर करौंदी, नरिया, पांडेयपुर, सारनाथ, चौक, मैदागिन, पक्का महाल, अर्दलीबाजार, अमरा, चिरईगांव के छाही उपकेंद्र से जुड़े गांव, खैरा, राजातालाब आदि जगहों पर पिछले दो महीने में अलग-अलग वजहों से कटौती अधिक रही। इसमें ट्रांसफाॅर्मर जलने, पैनल ब्लास्ट, तार टूटने, अंडरग्राउंड केबल फॉल्ट अदि की समस्या रही। 

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हर डिवीजन का है 85 लाख सालाना बजट 

वाराणसी में बिजली आपूर्ति के लिए डिस्ट्रीब्यूशन के कुल 11 डिवीजन है। बिजली निगम की ओर से मरम्मत के नाम पर अगर बजट की बात करें तो सालाना हर डिवीजन का 85 लाख रुपये बजट निर्धारित किया जाता है।
 
3 महीने में जल गए 412 ट्रांसफार्मर, ट्रॉली के भरोसे आपूर्ति
तीन महीने (अप्रैल मई और जून) में बिजली आपूर्ति व्यवस्था के लड़खड़ाई से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। इन तीन महीने में 412 ट्रांसफाॅर्मर जल गए हैं। इसमें 380 ट्रांसफाॅर्मर तो केवल ग्रामीण इलाकों के हैं जबकि 32 शहर में भी जले हैं। व्यवस्था की हकीकत यह है कि गावों में लगने वाले छोटे ट्रांसफाॅर्मर ने सबसे अधिक दगा दिया। शहर में तो 10 से अधिक जगहों पर ट्रॉली ट्रांसफाॅर्मर भी लगाना पड़ा। 

बिजली की जरूरत पड़ी तो ट्रांसफाॅर्मर जवाब दे गए और तार भी शहर से लेकर गांव तक जलने लगे। इसका खामियाजा यह रहा कि लोगों को बिना बिजली के अंधेरे में रात गुजारना पड़ा तो दिन में भी घंटों बिजली कटने की वजह से पानी का संकट भी झेलना पड़ा। ग्रामीण इलाकों में 25-63 और 100 केवीए के ट्रांसफाॅर्मर अधिक लगते हैं। जबकि 250-400-630 केवीए के ट्रांसफाॅर्मर शहर में लगाए जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में छोटे ट्रांसफाॅर्मर भी इस साल खूब जले।

मानक छह घंटे का, बदलने में 20 घंटे से अधिक का समय लग रहा

पिछले साल की तुलना में इस साल बिजली की जिले में खपत भी ज्यादा रही। वैसे ट्रांसफाॅर्मर जलने के बाद उसको बदलने का अधिकतम मानक समय 6 घंटा है लेकिन ग्रामीण इलाकों में तो लोगों को 15 से 20 घंटे तक बिना ट्रांसफाॅर्मर के ही रहना पड़ा। इसमें रोहनिया, सारनाथ, अशापुर इलाके में तो 20 घंटे से अधिक समय बाद ट्रांसफाॅर्मर लग सका। रोहनिया के खैरा नई बस्ती में तो जून के तीसरे सप्ताह में 52 घंटे लग गए ट्रांसफाॅर्मर बदलने में।

ओवरलोड ट्रांसफाॅर्मर फुंकने की मुख्य वजह
जिले में ट्रांसफाॅर्मर फुंकने की मुख्य वजह ओवरलोड है। अप्रैल में तो गर्मी थोड़ा कम रही, लेकिन मई और जून महीने में लोग उमस से बेचैन हो गए। हकीकत यह है कि जितनी अधिक गर्मी उतनी बिजली कटौती हुई। शहर में भले ही ट्रांसफाॅर्मर जलने की संख्या कम रही हो लेकिन तारों के टूटने, अंडरग्राउंड केबल फाल्ट खूब हुए। इस वजह से मैदागिन, चौक, पांडेयपुर, सारनाथ, मड़ौली, चांदपुर, लहरतारा, नरिया, करौंदी के साथ ही पांडेयपुर, आशापुर, रोहनिया, राजातालाब, मिर्जामुराद में लोगों को परेशानी हुई।

बिजली कटौती के विरोध में डाफी उपकेंद्र पर उपभोक्ताओं का प्रदर्शन

पिछले कई दिनों से हो रही बिजली कटौती और लोकल फाॅल्ट से परेशान डाफी के लोगों ने रविवार को उपकेंद्र पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान उपकेंद्र से कटौती की सही जानकारी न दिए जाने और कई बार शिकायत करने के बाद उसका समाधान न करने को लेकर उपभोक्ताओं ने नाराजगी जताई। इस दौरान जेई ने लोगों से बातचीत कर आपूर्ति संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान करवाने की बात कही, जिसके बाद लोग वापस हुए।

गर्मी के मौसम में ट्रांसफॉर्मर जलने, तार जलने की वजह से कटौती खूब हुई, वहीं बरसात का मौसम आते ही ट्रिपिंग भी बढ़ गई है। रविवार को उपकेंद्र पर पहुंचे डाफी निवासी भाजपा नेता अखिलेश उपाध्याय ने बताया कि बिजली कटौती मानक से ज्यादा हो रही है। जबकि उपकेंद्र पर रखे लॉग बुक में कटौती कम दिखाई जाती है। आरोप है कि शनिवार को 12 घंटे ही बिजली आपूर्ति हुई है। इस वजह से पानी का संकट झेलना पड़ा। इस दौरान अमित सिंह, विकास सिंह, समीर भट्टाचार्य, अंजनी चौबे, विवेक चौबे, प्रमोद सिंह, किशन राजभर, अतुल पांडेय मौजूद रहे।

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