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धनतेरस पर भगवान धनवंतरि के ऐसे करें दर्शन, मंदिर में भक्तों का प्रवेश नहीं

Wed, 11 Nov 2020 05:18 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 11 Nov 2020 05:18 PM IST
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Due to Corona on Dhanteras, devotees will not be able to see Lord Dhanwantari in the temple varanasi
भगवान धनवंतरि। - फोटो : अमर उजाला

मोक्ष नगरी काशी में धनत्रयोदशी की रात अमृत कलश छलकेगा। तिथि विशेष पर आरोग्य अमृत बरसाने खुद भगवान धनवंतरि आएंगे। हालांकि कोरोना संक्रमण के कारण सार्वजनिक दर्शन की जगह श्रद्धालुओं को ऑनलाइन दर्शन होंगे।

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भगवान धनवंतरि की जयंती पर भी कोरोना की काली छाया का असर नजर आ रहा है। कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी तिथि में गुरुवार को होने वाला सार्वजनिक आयोजन नहीं होगा। भक्तों को भगवान धनवंतरि के ऑनलाइन दर्शन मिलेंगे।
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पं. राम कुमार शास्त्री ने बताया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए भगवान धनवंतरि के दर्शन सोशल मीडिया के जरिए ही उपलब्ध कराए जाएंगे। किसी भी तरह का सार्वजनिक आयोजन नहीं होगा। पूजा, भोग और आरती दोपहर 12 से एक बजे तक लाइव प्रसारित होगी और शाम को छह से नौ बजे तक इसका प्रसारण किया जाएगा।

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तीन सौ साल पहले हुई थी धनवंतरि जयंती की शुरूआत
राजवैद्य पं. शिव कुमार शास्त्री का परिवार पांच पीढिय़ों से भगवान धनवंतरि की सेवा कर रहा है। पं. रामकुमार शास्त्री ने बताया कि उनके पूर्वज पं. बाबूनंदन जी ने तीन सौ साल पहले धनवंतरि जयंती की शुरूआत की थी। यह परंपरा आज भी जारी है।

सुडिय़ा स्थित धनवंतरि भवन में भगवान धनवंतरि की प्रतिमा धनतेरस पर आमजनों के दर्शन के लिए खोली जाती है। रजत सिंहासन पर करीब ढाई फीट ऊंची रत्न जडि़त मूर्ति साक्षात अद्भुत है। एक हाथ में अमृत कलश, दूसरे में शंख, तीसरे में चक्र और चौथे हाथ में जोंक तो दोनों ओर चंवर डोलाती सेविकाएं। दिव्य झांकी के दर्शन कर भक्त वर्ष भर आरोग्य की कामना करते हैं।

मान्यता है कि प्रभु धनवंतरि के दर्शन से वर्ष भर परिवार में रोग-व्याधि नहीं होती है। श्रीमद्भागवत में उल्लेख है कि विष्णु के 24 अवतारों में धनवंतरि भी एक थे। वह सीधे समुद्र से हाथ में अमृत कलश लेकर प्रगट हुए थे। यह काल दोपहर का था ऐसे में पूजन इस बेला में ही किया जाता है।

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