वाराणसी: भारत माता मंदिर में प्रयोगशाला और वेधशाला का सपना अधूरा, काशी विद्यापीठ के संस्थापक ने पत्र लिखकर बताई थी मन की पीड़ा
काशी विद्यापीठ के संस्थापक राष्ट्ररत्न शिवप्रसाद गुप्त ने चाहते थे कि भारत माता मंदिर के एक ओर विज्ञान की प्रयोगशाला और उसके ऊपर वेधशाला व दूसरी तरफ पुस्तकालय भवन का निर्माण कराया जाए। रजत जयंती ग्रंथ में छपे राष्ट्ररत्न के पत्र में इस बात का खुलासा किया गया है।
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वाराणसी स्थित काशी विद्यापीठ के प्रतिष्ठापरक राष्ट्ररत्न शिवप्रसाद गुप्त ने देशप्रेम की भावना से विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। विद्यापीठ को भव्य स्वरूप देने के लिए उन्होंने ढेर सारे सपने देखे थे, लेकिन वह पूर्ण नहीं हो सके। 101 साल बाद भी वह स्वप्न अधूरे ही हैं।
काशी विद्यापीठ के रजत जयंती ग्रंथ में छपे राष्ट्ररत्न के पत्र में इस बात का खुलासा किया गया है। राष्ट्ररत्न ने काशी विद्यापीठ के अध्यक्ष को लिखे गए अपने त्याग पत्र में कहा था कि वह विद्यापीठ की स्थापना होने के पूर्व वह राय जगन्नाथ दास का सातों चौकवाला मकान खरीदना चाहते थे।
उस मकान में वह सार्वजनिक पुस्तकालय खोलना चाहते थे। मकान नहीं मिलने के कारण वह विचार मन में ही रह गया। उनकी मंशा थी कि काशी विद्यापीठ में स्थापित होने वाले पुस्तकालय में विद्यार्थियों के साथ-साथ जनसाधारण को भी इसका लाभ मिल सके। उन्होंने लिखा था कि काशी विद्यापीठ के संचालक महोदय मेरी इस इच्छा को पूरी करने में सहायता प्रदान करेंगे।
आगे उन्होंने लिखा कि काशी विद्यापीठ के पास ही और भी जमीन मैंने खरीद रखी है, जिस पर भारत माता मंदिर का निर्माण हो रहा है। मेरी यह इच्छा है कि मंदिर की देखरेख का भार मंदिर बनने के बाद मेरी शर्तों के अनुसार काशी विद्यापीठ करे।
उस जमीन में इतना स्थान है कि मंदिर के एक ओर विज्ञान की प्रयोगशाला और उसके ऊपर वेधशाला व दूसरी तरफ पुस्तकालय भवन का निर्माण कराया जाए। उन्होंने आगे लिखा था कि पत्र लिखने के पीछे मेरी मंशा यही है कि कहीं मेरी यह इच्छाएं मन की मन में न रह जाएं और यह मेरे जीवन काल में कार्यान्वित न हो तो इसका पता भी मेरे पीछे किसी को न हो।