काशी की परंपराओं से ना हो खिलवाड़:गंगा आरती में प्रशासनिक हस्तक्षेप से तीर्थ पुरोहित नाराज, PM-CM को भेजा पत्र
वाराणसी के तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि गंगा आरती में प्रशासनिक हस्तक्षेप करना सनातनियों की भावना को आहत करने जैसा है। उन्होंने मामले को लेकर 40 से अधिक संस्थाओं एवं तीर्थ पुरोहितों ने सोमवार को बैठक की।
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शिव की नगरी काशी में गंगा घाटों पर होने वाली आरती में प्रशासनिक हस्तक्षेप पर तीर्थ पुरोहित और सनातनी समाज में आक्रोश है। सोमवार को प्रशासनिक हस्तक्षेप पर रोक लगाने के लिए सोमवार को 40 से अधिक संस्थाओं एवं तीर्थ पुरोहितों ने लहुराबीर स्थित स्व. मुन्नन महाराज सभागार में बैठक की।
बैठक में चर्चा के बाद मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर मांग की गई है कि काशी के परंपरागत धार्मिक क्रियाकलापों पर किसी भी तरह के प्रशासनिक हस्तक्षेप को रोका जाए। दर्शनार्थियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की जाए।
बैठक में गंगा में आई बाढ़ के मद्देनजर परंपरागत गंगा आरती को स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा का हवाला देते हुए रोक लगाने और सांकेतिक गंगा आरती करने के आदेश को अव्यवहारिक करार दिया। बैठक को संबोधित करते हुए कन्हैया लाल त्रिपाठी ने कहा कि घाट पर स्वामित्व ढाई सौ सालों से घाट के पुरोहितों को रहा है और सदैव घाट पुरोहितों का ही रहेगा। इसमें प्रश्न लगाने का कोई तर्क ही नहीं होता है।
मां गंगा की आरती करने वाली प्रत्येक संस्था को होना होगा एकजुट
केंद्रीय देव दीपावली समिति के अध्यक्ष आचार्य वागीश दत्त ने कहा कि काशी में भगवती मां गंगा की आरती करने वाली प्रत्येक संस्था को एकजुट एवं साथ मिलकर नीति तैयार करनी होगी जिससे कि प्रशासन की तानाशाही का उत्तर एकजुट हो कर दिया जा सके।
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संकट मोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने कहा कि मां गंगा काशीवासियों की बल्कि पूरे देश की आस्था का स्वरूप हैं। काशी में होने वाली मां गंगा की आरती से काशी के पंडा, पुरोहित, नाविकों एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की जीविका का स्त्रोत है। जहां तक घाट के स्वामित्व का प्रश्न है तो वह सैकड़ों वर्षों से घाट के पुरोहितों के अधिकार में है और सर्वदा उनके अधिकार में ही रहेगा। इसका साक्ष्य देने की कोई आवश्कता ही नहीं है।
गंगोत्री सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष किशोरी रमन दुबे बाबू महाराज ने अनुरोध किया कि इस समस्या का निवारण एकजुटता में है न की अकेले चलने में। बाढ़ के दौरान 32 सालों से मां गंगा की पारंपरिक रूप से आरती निरंतर हो रही है। आरती में हस्तक्षेप करना सनातनियों की भावना को आहत करने जैसा है। इस दौरान गंगा सेवा निधि के सुशांत मिश्र, श्याम लाल सिंह, किशोरी रमन दूबे बाबू महाराज, केशव जालान, प्रेम मिश्र, अरूण मिश्र उपस्थित रहे।