शिव की नगरी काशी में गंगा का रौद्र रूप जारी है। गंगा के बढ़ते जलस्तर की वजह से बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। बाढ़ पीड़ित हालातों के आगे लाचार हैं। पानी ज्यों-ज्यों बढ़ रहा है लोग घर खाली कर रहे है। बाढ़ राहत शिविर में रह रहे लोगों को वर्तमान के साथ ही भविष्य की चिंता उन्हें घेरते जा रही है। खतरे के निशान को पार करने के बावजूद जलस्तर में बढ़त लगातार जारी है। धीरे-धीरे बढ़ाव के कारण जलस्तर वर्ष 2013 के रिकॉर्ड 72.630 मीटर के करीब पहुंच रहा है। रविवार शाम ही बाढ़ का पानी काशी विश्वनाथ धाम की दहलीज तक पहुंच गया है। धाम से सटे मणिकर्णिका घाट को डूबोकर अब ऊपर घुसने लगा है।
Flood in Varanasi: इस दर्द का अंत नहीं...हालात के आगे लाचार बने बाढ़ पीड़ित, बनारस को सताने लगा 1978 का डर
वाराणसी में गंगा में बाढ़ का रिकॉर्ड 1978 का है। तब गंगा का जलस्तर 73.901 मीटर तक पहुंचा था। ऐसे में अब लोग सशंकित हैं कि कहीं वो स्थिति न आ जाए। वैसे अभी ही गंगा और वरुणा के तटवर्ती इलाकों के मोहल्लें और कॉलोनियों के मकान बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं। लोगों का पलायन लगातार जारी है।
पैरों से लाचार सारनाथ क्षेत्र के दानियालपुर के जमाल अहमद और शहनाज बानो कभी बाढ़ में डूबे अपने करघा को देखते हैं, तो कभी बच्चों के चेहरे की ओर। जमाल कहते एक दिन में एक पावरलूम से पांच साड़ी तैयार हो जाती थी। हमारे घर में दो मशीनें हैं। जब यह चलती थी तो कारोबार चलता था। बाढ़ का पानी भरा तो अरमान पर भी पानी फिर गया है। हम लोगों का घर चलाना मुश्किल हो गया है। पांच बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे रात गुजार रही है।
नई बस्ती पुराना पुल में टेंट लगाकर रह रहे बाढ़ प्रभावित मुमताज ने बताया कि वह परिवार के साथ किराए पर रहती थी। अचानक आई बाढ़ में घर पूरी तरह डूब चुका है। रात में घर में अचानक घुसे पानी में कुछ ही जरूरी सामान निकाल के दूसरे के घर पर रखा है, लेकिन बाढ़ में शादी के दौरान मिले सामान भी बह गए हैं। बाढ़ में मां की यादों से जुड़ा मेरे पास अब कुछ भी नहीं बचा।
ढेलवरिया इलाके में बाढ़ राहत शिविर में सुबह केला दूध और दोपहर व रात में खाना मिल रहा है। अंतिम कतार में रहने वाले हंसराज पांडेय ने बताया कि पिछले 10 दिनों से यहां है, कई बार उन्हें खाना नहीं मिल पाता है। वहीं राजस्व विभाग के कर्मचारी अमन का कहना है कि जो लोग समय पर टेंट में मौजूद नहीं रहते हैं, उन्हीं को खाना नहीं मिल रहा होगा। बाकी यहां रह रहे लोगों में खाने का वितरण किया जा रहा है।
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