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डीआईजी जेल पर जेलर विजय राय को भरोसा नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 06 Apr 2016 02:35 AM IST
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vranasi jail
- फोटो : amar ujala
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जिला जेल में शनिवार को हुए बवाल के मामले में हटाए गए जेलर विजय राय का कहना है कि उन्हें डीआईजी जेल एसके श्रीवास्तव की जांच पर भरोसा नहीं है। उन्होंने पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की। आरोप लगाया कि डीआईजी जेल पूर्व जेल अधीक्षक आशीष तिवारी से मिले हुए हैं। जांच में जेल के सभी बंदियों और बंदीरक्षकों का बयान दर्ज किया जाए, स्थिति अपने आप साफ हो जाएगी।
जेल में हुए बवाल के बाद सोमवार को जेलर विजय राय को डीआईजी जेल इलाहाबाद कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। विजय राय का कहना है कि डीआईजी ने उनके खिलाफ रिपोर्ट में लिखा है कि वह बंदियों से सहानुभूति रखते थे। बंदियों के उकसाने में उनका हाथ था। बंदियों से सहानुुभूति रखना कोई अपराध नहीं है। इसका उल्लेख तो जेल मैनुअल में भी है। कहा कि जिला जेल में पूर्व जेल अधीक्षक आशीष तिवारी और डिप्टी जेलर अजय राय की तानाशाही चलती थी। बंदीरक्षकों की ड्यूटी लगाने का काम जेलर का होता है लेकिन ड्यूटी जेल अधीक्षक लगाते थे। उनसे केवल हस्ताक्षर कराए जाते थे। मनमाने तरीके ड्यूटी लगाई जाती थी। तानाशाही रवैये से ही बंदी नाराज थे। बवाल के दिन बंदियों ने केवल आशीष तिवारी, अजय राय को ही क्यों ही पीटा। अन्य अधिकारी भी थे, लेकिन किसी से मारपीट नहीं की गई।
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जेल में हुए बवाल के बाद सोमवार को जेलर विजय राय को डीआईजी जेल इलाहाबाद कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। विजय राय का कहना है कि डीआईजी ने उनके खिलाफ रिपोर्ट में लिखा है कि वह बंदियों से सहानुभूति रखते थे। बंदियों के उकसाने में उनका हाथ था। बंदियों से सहानुुभूति रखना कोई अपराध नहीं है। इसका उल्लेख तो जेल मैनुअल में भी है। कहा कि जिला जेल में पूर्व जेल अधीक्षक आशीष तिवारी और डिप्टी जेलर अजय राय की तानाशाही चलती थी। बंदीरक्षकों की ड्यूटी लगाने का काम जेलर का होता है लेकिन ड्यूटी जेल अधीक्षक लगाते थे। उनसे केवल हस्ताक्षर कराए जाते थे। मनमाने तरीके ड्यूटी लगाई जाती थी। तानाशाही रवैये से ही बंदी नाराज थे। बवाल के दिन बंदियों ने केवल आशीष तिवारी, अजय राय को ही क्यों ही पीटा। अन्य अधिकारी भी थे, लेकिन किसी से मारपीट नहीं की गई।
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