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कलियुग में भक्ति ही सबसे बड़ा साधन: राजन
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कथा वाचक राजन महाराज ने कहा कि कलयुग जैसा कोई युग नहीं है। इस युग में मनुष्य के पास समय कम और विकर्षण अधिक हैं। इसलिए कठिन तप, योग और साधना हर किसी के लिए संभव नहीं है। वह नगर के रामलीला मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पहले दिन भक्तों को कथा सुना रहे थे।
उन्होंने कहा कि ऐसे में भगवान के नाम का स्मरण ही सबसे सरल और प्रभावी मार्ग है। कथा के प्रारंभ में आयोजकों श्रीष अग्रहरि व सुनील अग्रहरि ने पूजन-अर्चन कर व्यासपीठ का स्वागत किया।
इसके बाद महाराज ने भगवान श्रीराम के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि रामचरितमानस हमें जीवन जीने की सही दिशा देता है।
इससे यह शिक्षा मिलती है कि केवल जप करने से नहीं, बल्कि आचरण सुधारने से ही सच्ची भक्ति प्राप्त होती है।
आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से कथा का श्रवण कर जीवन में सदाचार अपनाने का आह्वान किया। क्षेत्राधिकारी अजीत सिंह चौहान ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते पुलिस व एक प्लाटून पीएसी बल तैनात की गई है।
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उन्होंने कहा कि ऐसे में भगवान के नाम का स्मरण ही सबसे सरल और प्रभावी मार्ग है। कथा के प्रारंभ में आयोजकों श्रीष अग्रहरि व सुनील अग्रहरि ने पूजन-अर्चन कर व्यासपीठ का स्वागत किया।
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इसके बाद महाराज ने भगवान श्रीराम के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि रामचरितमानस हमें जीवन जीने की सही दिशा देता है।
इससे यह शिक्षा मिलती है कि केवल जप करने से नहीं, बल्कि आचरण सुधारने से ही सच्ची भक्ति प्राप्त होती है।
आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से कथा का श्रवण कर जीवन में सदाचार अपनाने का आह्वान किया। क्षेत्राधिकारी अजीत सिंह चौहान ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते पुलिस व एक प्लाटून पीएसी बल तैनात की गई है।
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