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Sant Ravidas Jayanti: सीर की कठौती में समाई रैदासियों के आस्था की गंगा, लगते रहे जो बोले सो निर्भय... के नारे

Sun, 25 Feb 2024 12:47 PM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 25 Feb 2024 12:47 PM IST
सार

Sant Ravidas Jayanti: वाराणसी के सीर गोवर्धन में संत रविदास की जयंती पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भजन-कीर्तन करतीं संगतें निकलीं तो सीर की सड़कों पर जात-पात के भेद मिट गए। महापर्व की यादों को अपने परिजनों से साझा करने के लिए लोग वीडियो कॉलिंग व सोशल मीडिया का भी सहारा ले रहे थे।

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Devotee said Jo bole so nirbhay in Sant Ravidas Jayanti varanasi
संत रविदास जयंती पर सीरगोवर्धनपुर स्थित रविदास मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ी भीड़। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संत रविदास की जयंती पर मन चंगा तो कठौती में गंगा... की कहावत चरितार्थ हुई। संत की जन्मस्थली सीर ने कठौती का रूप लिया तो रैदासियों की आस्था ने इस कठौती की गंगा में मन भर डुबकी लगाई। माघ पूर्णिमा पर संत रविदास की जयंती समारोह के उल्लास में सीरगोवर्धनपुर पूरी तरह से मिनी पंजाब में बदल गया। संत रविदास के मंदिर में सुबह से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।

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जयंती के अवसर पर पांच लाख से अधिक रैदासियों ने संत रविदास के मंदिर में दर्शन-पूजन किया। भीड़ का आलम यह था कि मंदिर से लौटूबीर मार्ग पर ढाई किलोमीटर लंबी कतार महिलाओं की और डाफी बाइपास की तरफ तीन किलोमीटर लंबी कतार पुरुषों की लगी हुई थी। गुरु रविदास के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए अनुयायियों का रेला झूमकर निकला। भजन-कीर्तन करतीं संगतें निकलीं तो सीर की सड़कों पर जात-पात के भेद मिट गए।
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माघी पूर्णिमा पर संत की जयंती पर सीरगोवर्धनपुर में श्रद्धालुओं का ऐसा रेला लगा कि पैदल चलने तक की जगह नहीं बची। संत के चरणों में फूल चढ़ाने के बाद प्राचीन इमली के पेड़ के नीचे भी श्रद्धालुओं ने फूल अर्पित किया। पंगत में प्रसाद चखकर संगत निहाल हो उठी। मंदिर से लेकर लौटूबीर तक एक किलोमीटर के दायरे में रैदासी भक्तों की भीड़, जय गुरुदेव, तन गुरुदेव का जयकारा लगाती रही। उत्साह का कोई ओर-छोर नहीं दिखा। महापर्व की यादों को अपने परिजनों से साझा करने के लिए लोग वीडियो कॉलिंग व सोशल मीडिया का भी सहारा ले रहे थे।

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मंदिर पर लगाया गया स्वर्ण निशान

संत रविदास के मंदिर पर रविदासिया धर्मध्वजा के साथ ही स्वर्ण निशान भी लगाया गया। संत मनदीप दास ने धर्म ध्वजा फहराई। इटली के एक श्रद्धालु ने मंदिर को स्वर्ण निशान दान दिया है। सुबह सात बजे रविदासिया धर्म की ध्वजा फहराई गई। इसके बाद पूरा मेला क्षेत्र जो बोले सो निर्भय, रविदास शक्ति अमर रहे, सदगुरु महाराज की जय..., जय गुरुदेव तन गुरुदेव... के जयकारों से गूंज उठा। संत रविदास की जयंती पर बेगमपुरा गुरु भक्ति और सेवा भाव में डूब गया।

जयंती पर पहली बार नहीं शामिल हुए संत निरंजन दास
डेरा सच्च खंड बल्लां के गद्दीनशीन संत निरंजन दास पहली बार रविदास जयंती में नहीं पहुंच सके। इससे रैदासियों में थोड़ी मायूसी रही, लेकिन मुख्य सत्संग पंडाल में उनकी तस्वरी के दर्शन का रेला लगा रहा। जिसकी संत रविदास के प्रति जितनी श्रद्धा थी, उसने उतना दान किया।

शोभायात्रा में दिखा श्रमसाधक संत का संघर्ष
संत रविदास की जयंती पर शाम को शहर भर से लाग विमान निकले। लाग विमानों पर संत की जीवन यात्रा, श्रम साधना के साथ ही उनके दोहे और संदेश भी आम जनता को जागरूक कर रहे थे। मैदागिन से रविदास जयंती शोभायात्रा आरंभ हुई और सीरगोवर्धन पहुंचकर यात्रा पूर्ण हुई। शोभायात्रा के दौरान संगीत की तेज धुन पर नाचते-गाते युवाओं की टोलियां भी साथ चल रही थीं।

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