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Gyanvapi Case: ज्ञानवापी परिसर से बैरिकेडिंग हटाने की मांग, याचिका पर अब दो दिसंबर को होगी सुनवाई

Sat, 19 Nov 2022 07:17 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 19 Nov 2022 07:17 PM IST
सार

ज्ञानवापी स्थित आराजी पर भगवान का मालिकाना हक घोषित करने, केंद्र व राज्य सरकार से भव्य मंदिर निर्माण में सहयोग और परिसर की बैरिकेडिंग हटाने की मांग संबंधित वाद पर दो दिसंबर को सुनवाई होगी। 

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Demand of remove barricading of Gyanvapi mosuue campus petition will now be heard on 2 December
ज्ञानवापी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत में शनिवार को ज्ञानवापी से जुड़े एक और वाद में सुनवाई हुई। इस मामले में पक्षकार बनाए गए अंजुमन इंतजामिया और काशी विश्वनाथ बोर्ड जरिये वकालतनामा कोर्ट में हाजिर हुए। यूपी स्टेट और भारत सरकार, डीएम, पुलिस आयुक्त की तरफ से किसी के हाजिर नहीं होने पर अदालत की ऑफिस से आख्या मांगी गई है। साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए दो दिसंबर की तिथि तय की।

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यह वाद ज्योतिर्लिंग आदि विश्वेश्वर विराजमान की तरफ से बड़ी पियरी निवासी अधिवक्ता अनुष्का तिवारी व इंदु तिवारी ने दाखिल की है। इसमें ज्ञानवापी स्थित आराजी पर भगवान का मालिकाना हक घोषित करने, केंद्र व राज्य सरकार से भव्य मंदिर निर्माण में सहयोग और ज्ञानवापी की बैरिकेडिंग हटाने की मांग की गई है।
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अधिवक्ता शिवपूजन सिंह गौतम, शरद श्रीवास्तव व हिमांशु तिवारी के जरिये बीते 13 अक्तूबर को दाखिल वाद में डीएम, पुलिस आयुक्त, केंद्र व यूपी के सचिव, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी और काशी विश्वनाथ मंदिर बोर्ड को पक्षकार बनाया गया है। पिछली तिथि पर कोर्ट ने सभी पक्षकारों को हाजिर होने का आदेश दिया था। 

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देवताओं के पूजन से संबंधित वाद पर भी दो को सुनवाई

ज्ञानवापी प्रकरण में दिल्ली निवासी पर्यावरण विद प्रभुनारायण की तरफ से दाखिल वाद पर भी शनिवार को सुनवाई टल गई। सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत में अब इस मामले में दो दिसंबर को सुनवाई होगी।

अधिवक्ता मानबहादुर सिंह और अनुपम द्विवेदी ने दाखिल वाद में कहा है कि ज्ञानवापी में दृश्य व अदृश्य देवताओं के राग, भोग, दर्शन-पूजन के साथ गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्स्थापित करने की मांग की गई है। साथ ही आस्था के साथ वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर अनुतोष दिए जाने का अनुरोध किया गया है। प्रकरण में अंजुमन की तरफ से 30 दिन का समय मांगा गया लेकिन अदालत ने दो दिसंबर की तिथि नियत कर दी।

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