ठेकेदार आत्महत्या : जांच टीम ने प्रमुख सचिव को सौंपी रिपोर्ट, इसलिए खुदकुशी करने को मजबूर हुए अवधेश
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वाराणसी का पीडब्ल्यूडी ठेकेदार अवधेश श्रीवास्तव स्थानीय इंजीनियरों के गुमराह करने से खुदकुशी के लिए मजबूर हुआ था। अवर अभियंता और सहायक अभियंता ने लेखाकार से मिलकर उसे समझा दिया कि बिना एमबी (नाप-जोख) के ही उसे भुगतान करवा दिया जाएगा।
इसके एवज में उससे पहले ही वसूली कर ली गई। लेकिन, नियम-कायदों का पालन न होने पर जब फाइल फंसी तो सभी ने हाथ खड़े कर दिए। नतीजतन, कर्ज में डूबे ठेकेदार को खुद को गोली मार लेने के अलावा कोई और विकल्प नहीं दिखा। इस मामले में सचिव, पीडब्ल्यूडी समीर वर्मा की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट शनिवार की शाम शासन को सौंप दी।
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शासन ने इस रिपोर्ट को शनिवार को मीडिया के सामने सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन सूत्रों के मुताबिक जांच समिति ने ठेकेदार स्वर्गीय अवधेश श्रीवास्तव से संबंधित कुल 25 बिलों की गहन जांच की। अवेधश को स्वास्थ्य विभाग की बिल्डिंग बनाने का ठेका दिया गया था। इसकी कुल लागत 19 करोड़ रुपये है। जबकि, अवधेश के साथ प्रारंभ में परियोजना से संबंधित 8.5 करोड़ रुपये का बॉन्ड एग्रीमेंट किया गया था।
बाद में उसे बिजली से संबंधित काम समेत कुछ और कार्य भी दिए गए। इससे उसके काम की कुल लागत 11 करोड़ रुपये पहुंच गई। इसमें से अलग-अलग समय पर प्रस्तुति किए गए 24 बिलों का करीब 10.50 करोड़ रुपये का भुगतान उसे कर दिया गया था।
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48 लाख रुपये का 25वां बिल था। इसे जेई, एई और लेखाकार ने बिना एमबी (नाप-जोख) किए ही भुगतान के लिए एक्सईएन कार्यालय भेज दिया था। यहां बता दें कि एमबी करने की जिम्मेदारी जेई की होती है, जबकि उसे चेक एई और लेखाकार करते हैं। इन तीनों ने ठेकेदार को भरोसा दिलाया कि बिना एमबी केही भुगतान करा दिया जाएगा। लेकिन, जब बिल एक्सईएन के पास पहुंचे तो उन्होंने इस पर आपत्ति लगा दी।
इसके बाद भुगतान के लिए ठेकेदार ने जेई, एई से लेकर चीफ इंजीनियर तक से गुहार लगाई, पर किसी ने नहीं सुना। जांच कमेटी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अवधेश श्रीवास्तव को यह काम चार साल पहले दिया गया था। चार साल पहले के रेट के मुकाबले वर्तमान में रेट काफी बढ़ गए थे, इसलिए भी अवधेश श्रीवास्तव काफी परेशान था।
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स्थानीय इंजीनियर उस पर काम जल्द पूरा करने का दबाब तो बना रहे थे, साथ ही अपना कमीशन भी छोड़ने को तैयार नहीं थे। इसका परिणाम यह हुआ कि अवधेश श्रीवास्तव के लिए यह प्रोजेक्ट घाटे का सौदा साबित हो रहा था। देनदारियों को लेकर उसे अपना भविष्य अंधकारमय महसूस होने लगा, जिसकी चिंता के चलते वह अवसाद में आ गया था।
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इस घटना के लिए एई, जेई, लेखाकार और दो बाबुओं को जिम्मेदार ठहराया है। इसके अलावा ऊपर के अधिकारियों पर पर्यवेक्षण ठीक से न करने की रिपोर्ट भी दी है। इसके चलते दफ्तर में गड़बड़ियां बढ़ीं।
जांच टीम से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न छापने के आग्रह के साथ बताया कि पूर्वांचल में पीडब्ल्यूडी में बिना एमबी भुगतान की समस्या इतनी ज्यादा है कि इसे दूर करने के लिए बड़ा नश्तर चलाने की आवश्यकता है। उसका यहां तक कहना है कि पूर्वांचल के कई जोन में ही कुएं में भांग पड़ी होने जैसी स्थिति है। इसे दूर करने के लिए कठोर कार्रवाई के साथ-साथ बड़े सुधारात्मक कदम उठाने की भी आवश्यकता है।