ठेकेदार आत्महत्या मामला : पत्नी की तहरीर पर सात लोगों के खिलाफ मुदकमा दर्ज, इनको बनाया आरोपी
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प्रतिभा श्रीवास्तव के अनुसार उनके पति अवधेश पीडब्ल्यूडी के ए श्रेणी के ठेकेदार थे। कबीरचौरा महिला अस्पताल सहित अन्य निर्माण कार्यों का लगभग पांच करोड़ रुपये के बकाया के भुगतान में वर्षों से की जा रही हीलाहवाली और कमीशनखोरी से उनके पति आजिज आ गए थे।
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बार-बार अवैध तरीके से पैसा देने के लिए दबाव बनाया जाता था। इस वजह से परिवार आर्थिक तंगी का शिकार हो गया है और घर के जेवर गिरवी रखने पड़े। साथ ही, परिजनों और करीबियों से अवधेश को कर्ज लेना पड़ा।
भुगतान न होने के पीछे जेई मनोज सिंह व यूएस पांडेय, एई आशुतोष सिंह, आरपी दुबे व एसडी मिश्रा, अधिशासी अभियंता, चीफ इंजीनियर अंबिका सिंह और बिजली विभाग के निरीक्षक दीपक श्रीवास्तव की मिलीभगत थी।
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इन्हीं सबके कारण बकाया का भुगतान नहीं हो पा रहा था और सभी अवधेश को परेशान करते थे। प्रतिभा ने पुलिस को बताया कि 28 अगस्त को चीफ इंजीनियर के कार्यालय में उनके सामने जब उनके पति ने खुद की कनपटी पर गोली मारी तो वहां जेई मनोज और एई आशुतोष मौजूद थे। आत्महत्या करने से पहले अवधेश ने आर्र्थिक तंगी का हवाला देकर भुगतान करने को कहा था, लेकिन उनकी बात सुनने के लिए कोई तैयार ही नहीं था।
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ठेकेदार अवधेश चंद्र श्रीवास्तव की पत्नी प्रतिभा के अनुसार उनके पति पीडब्ल्यूडी का काम करते थे, लेकिन भुगतान फर्जी नामों से होता था। भारी-भरकम कमीशन न दिए जाने पर ब्लैक लिस्टेड कर जेल भेजने की धमकी पीडब्ल्यूडी के अभियंता देते थे। शिकायत पर पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अभियंता अपने कनिष्ठों का बचाव करते थे और अवधेश पर दबाव बनाते थे।
इस वजह से अवधेश मानसिक रूप से परेशान थे। वहीं, बिजली विभाग की प्रताड़ना के बारे में बताते हुए प्रतिभा ने कहा कि अवधेश ने महिला अस्पताल में काम कराने के दौरान अस्थाई विद्युत कनेक्शन लिया था। समय समाप्त होने के बाद अवधेश एक महीने तक प्रयास करते रहे कि मीटर रिचार्ज कर दिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इधर, पीडब्ल्यूडी द्वारा तेजी से काम करने का दबाव बनाया जा रहा था। इससे परेशान होकर अवधेश ने मुकदमा दर्ज कराया। साथ ही, अवधेश ने जनरेटर खरीदा और महिला अस्पताल ने लिखित में बिजली सप्लाई दी। इसके बाद बिजली विभाग ने फर्जी तरीके से आरसी जारी कर दी तो विभागीय अभियंता व इंस्पेक्टर दीपक श्रीवास्तव प्रताड़ित करने लगे।