कफ सिरप मामला: दवा मंडी में पहुंची ड्रग विभाग की टीम, महज खानापूर्ति कर लौटी; सीज दुकानों के कागजातों की जांच
ड्रग विभाग की टीम ने सप्तसागर दवा मंडी में करीब दो घंटे जांच की। कफ सिरप मामले में पहले से सीज दुकानों के कागजात देखे गए। कारोबारियों को लाइसेंस अपडेट रखने और स्टॉक का नियमानुसार मिलान करने के निर्देश दिए गए। हालांकि, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कारोबारियों ने जांच को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी।
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सप्तसागर दवा मंडी में बुधवार को ड्रग विभाग की टीम ने करीब दो घंटे तक जांच अभियान चलाया। टीम ने कफ सिरप मामले में पहले से सीज कुछ दुकानों के कागजातों की जांच की और वहां मौजूद दवा कारोबारियों से जानकारी ली। इसके अलावा दुकानदारों को लाइसेंस अपडेट रखने, दवाओं के स्टॉक का नियमानुसार मिलान करने और औषधि कारोबार से जुड़े नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए। हालांकि, अभियान के दौरान कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
दोपहर में पहुंची टीम ने कोडीन कफ सिरप के मामले में पहले से सीज दुकानों का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि संबंधित दुकानों में लाइसेंस लेने के बाद दवा का कारोबार किया जा रहा है या नहीं। टीम के सदस्यों ने मंडी के अन्य दवा कारोबारियों से भी बातचीत की और आवश्यक दस्तावेजों तथा लाइसेंस की स्थिति के बारे में जानकारी ली।
ड्रग विभाग की टीम के लौटने के बाद दवा मंडी में कार्रवाई को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ कारोबारियों का कहना था कि जांच के दौरान मुख्य रूप से कागजात और नियमों के अनुपालन की जानकारी ली गई। वहीं, दवा मंडी से जुड़े कुछ लोगों ने कार्रवाई को महज खानापूर्ति बताया। उनका कहना था कि यदि विभाग गंभीरता से जांच करता तो नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में आगे कार्रवाई हो सकती थी।
दवा विक्रेता समिति के महामंत्री संजय सिंह ने कहा कि विभाग की ओर से जारी होने वाले आदेशों की जानकारी समिति के सदस्यों को दी जाती है और उनके पालन के लिए कहा जाता है। उन्होंने बताया कि दवा कारोबारियों को नियमों के अनुसार काम करने के लिए लगातार जागरूक किया जाता है।
असिस्टेंट ड्रग कमिश्नर मुकेश जैन पारिवारिक कारणों से शहर से बाहर हैं। उनका कहना है कि विभागीय निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए ड्रग इंस्पेक्टर के माध्यम से समय-समय पर जांच अभियान चलाया जाता है। इसी क्रम में सप्तसागर दवा मंडी में भी जांच की गई है।