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मेयर प्रत्याशीः हावी रहा परिवारवाद, कांग्रेस और भाजपा ने पार्टी के नेताओं की बहुओं को दिया टिकट

Tue, 07 Nov 2017 02:10 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 07 Nov 2017 02:10 PM IST
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congress and BJP give ticket to daughter-in-law of party leaders
भाजपा मेयर प्रत्याशी मृदुला जायसवाल - फोटो : अमर उजाला
निकाय चुनाव में परिवारवाद कार्यकर्ताओं पर भारी पड़ा। पहले कांग्रेस और अब भाजपा ने मेयर पद पर परिवारों को प्राथमिकता में रखते हुए उनमें ही विश्वास जताया है।
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कांग्रेस ने जहां पूर्व सांसद व राज्यसभा के पूर्व उपसभापति श्यामलाल यादव की की बहू को टिकट दिया है तो भाजपा ने भी पूर्व सांसद शंकर जायसवाल की बहू को ही प्रत्याशी बना दिया है।
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वाराणसी के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने पूर्व सांसद यादव की पुत्रवधू शालिनी यादव को मेयर पद का उम्मीदवार जातीय गणित को देखते हुए किया है। तकरीबन 80 हजार यादव मतदाता हैं।
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पुराने कांग्रेसी नेता पार्टी के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। शालिनी यादव के नाम पर वरिष्ठ नेताओं में भी असहमति नहीं थी लेकिन कार्यकर्ता अपने ऊपर विश्वास नहीं जताने से रुष्ट हैं।

उधर, खुद को परिवारवाद से दूर बताने वाली भाजपा ने भी पूर्व सांसद जायसवाल की पुत्रवधू मृदुला जायसवाल को प्रत्याशी घोषित किया है। राम मंदिर आंदोलन के समय से सक्रियता, संघ से परिवार की नजदीकियों और नोटबंदी के बाद से नाराज व्यापारी वर्ग को खुश करने के लिए भाजपा ने यह दांव लगाया है।

पार्टी मानती है कि व्यापारी वर्ग को टिकट देने से पार्टी को अपना पारंपिरक वोट तो मिलेगा, जायसवालों के अलावा व्यापारियों का भी वोट मिलेगा। वैसे, यह मानने वालों की भी कमी नहीं है कि दोनों पार्टियों ने पार्टी के पुराने वफादार नेताओं के परिवार के सदस्यों को टिकट किसी नए नेता को टिकट देने से उत्पन्न विवाद को टालने की गरज से ही दिया है।

यही नहीं, पार्टियों को पूर्व में यह उम्मीद नहीं थी कि यहां का मेयर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हो जाएगा। सवर्ण तबके के बडे़ नेताओं ने पहले से या तो खुद या फिर अपने परिवार के किसी सदस्य को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रखी थी।  

जातीय समीकरण साधने का प्रयास

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कांग्रेस मेयर प्रत्याशी शालिनी यादव - फोटो : अमर उजाला
वैसे अगर जातीय आंकड़ों की बात करें तो नगर निगम वाराणसी क्षेत्र में करीब ढाई लाख जायसवाल वैश्य समाज के मतदाता हैं तो सवा दो लाख के करीब मुस्लिम हैं। निगम के 90 वार्डों में से 12 वार्ड यादव बहुल हैं। तकरीबन 80 हजार यादव मतदाता हैं।

ब्राह्मण, भूमिहार, कायस्थए वैश्य को मिला लें तो करीब पांच लाख मतदाता हैं। उधर पटेल मतदाताओं की तादाद शहर में बमुश्किल 35.40 हजार है। इस जातीय गणित पर भी कांग्रेस की नजर है।

कांग्रेस के रणनीतिकारों को पता है कि जब 1995 के पहले चुनाव नें बीजेपी कैंडिडेट पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह की पत्नी सरोज सिंह को सपा उम्मीदवार विमला ग्वाल कांटे की टक्कर दे सकती हैं।

बीजेपी के उम्मीदवार पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री अमर नाथ यादव मेयर बन सकते हैं तो किसी यादव प्रत्याशी को उतारना फायदेमंद होगा। उत्तरी, दक्षिणी और कैंट में जायसवाल बिरादरी की संख्या डेढ़ से दो लाख है। कांग्रेस ने यादव, भाजपा ने जायसवाल को टिकट दिया है।

चर्चा है कि सपा मौर्य को टिकट देने के मूड में है। ऐसा हुआ तो लड़ाई दिलचस्प होगी। शहर में बनिया वर्ग, यादव और मौर्य जाति के लोगों का दबदबा अच्छा खासा है। जाति के साथ पार्टी अपने वोटबैंक को पाने में कामयाब हुई तो किसी की भी जीत सुनिश्चित होगी।
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