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बास्केटबॉल नहीं, क्रिकेट में थी विशेष की खास दिलचस्पी
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वाराणसी। दिल्ली के विज्ञान भवन में आज राष्ट्रीय खेल दिवस पर भारतीय बास्केटबॉल टीम के कप्तान विशेष भृगुवंशी को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। विशेष के पिता प्रमोद ने बताया कि जब वह यूपी कॉलेज के हॉस्टल में वार्डेन थे तब विशेष अक्सर क्रिकेट खेलने में रुचि दिखाते थे। बड़े भाई विभोर भृगुवंशी पहले से ही बास्केटबॉल खेलते थे। जिनके कोच अमरजीत ने विभोर से कहा विशेष को भी बास्केटबॉल खेलने को कहो क्योंकि उसकी लंबाई (6.4 फीट) अच्छी है।
भाई के कहने पर विशेष बास्केटबॉल खेलने तो लगे, मगर कई बार कोर्ट छोड़कर क्रिकेट खेलने भाग जाते थे। धीरे-धीरे विशेष ने बास्केटबॉल को ही अपने करियर के लिए चुना। पिता प्रमोद ने बताया कि विशेष की बास्केटबॉल में ऐसी लगन जगी कि 2002 में इलाहाबाद में स्टेट प्रतियोगिता में विशेष का चयन हो गया। मगर उसी दौरान विशेष के पेट पर चाय की प्याली गिर गई और उनका पेट जल गया। जिससे उनके पेट पर काफी छाले भी पड़ गए। इसके बावजूद विशेष ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। वो इलाहाबाद गए मगर दर्शक दीर्घा में बैठकर पूरा खेल देखा।
रेलवे को तीन बार बनाया चैंपियन
विशेष की विशेषता को देखते हुए 2008 में पश्चिम रेलवे ने विशेष को तीन साल के अनुबंध पर अपनी टीम में रख लिया। जहां विशेष के नेतृत्व में टीम तीन बार स्वर्ण पदक विजेता बनी। हालांकि विशेष ज्यादा दिनों तक रेलवे में नहीं रहे। 2011 में विशेष को ओएनजीसी ने अपनी टीम में बुला लिया। तब से लेकर अब तक विशेष ओएनजीसी की टीम की तरफ से देश के लिए खेल रहे हैं।
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बचपन से लीडर के तौर काम किया
पिता प्रमोद ने बताया कि विशेष को बचपन से ही लीड करने की आदत है। जब वो स्कूल में थे तो उनके टीचर उन्हें क्लास का मॉनिटर बनाते थे। अब जब वह भारतीय बास्केटबॉल टीम में हैं तो वह अपनी टीम के कप्तान हैं। विशेष 2006 से अब तक भारतीय बास्केटबॉल टीम के सदस्य हैं। 45 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगभग 200 से ज्यादा मैच खेले हैं, जिनमें 10 स्वर्ण पदक, दो रजत पदक तथा एक कांस्य पदक प्राप्त किया है। वहीं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विशेष भृगुवंशी ने अब तक नौ स्वर्ण पदक, तीन रजत पदक तथा तीन कांस्य पदक हासिल किया है।
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भाई के कहने पर विशेष बास्केटबॉल खेलने तो लगे, मगर कई बार कोर्ट छोड़कर क्रिकेट खेलने भाग जाते थे। धीरे-धीरे विशेष ने बास्केटबॉल को ही अपने करियर के लिए चुना। पिता प्रमोद ने बताया कि विशेष की बास्केटबॉल में ऐसी लगन जगी कि 2002 में इलाहाबाद में स्टेट प्रतियोगिता में विशेष का चयन हो गया। मगर उसी दौरान विशेष के पेट पर चाय की प्याली गिर गई और उनका पेट जल गया। जिससे उनके पेट पर काफी छाले भी पड़ गए। इसके बावजूद विशेष ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। वो इलाहाबाद गए मगर दर्शक दीर्घा में बैठकर पूरा खेल देखा।
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रेलवे को तीन बार बनाया चैंपियन
विशेष की विशेषता को देखते हुए 2008 में पश्चिम रेलवे ने विशेष को तीन साल के अनुबंध पर अपनी टीम में रख लिया। जहां विशेष के नेतृत्व में टीम तीन बार स्वर्ण पदक विजेता बनी। हालांकि विशेष ज्यादा दिनों तक रेलवे में नहीं रहे। 2011 में विशेष को ओएनजीसी ने अपनी टीम में बुला लिया। तब से लेकर अब तक विशेष ओएनजीसी की टीम की तरफ से देश के लिए खेल रहे हैं।
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बचपन से लीडर के तौर काम किया
पिता प्रमोद ने बताया कि विशेष को बचपन से ही लीड करने की आदत है। जब वो स्कूल में थे तो उनके टीचर उन्हें क्लास का मॉनिटर बनाते थे। अब जब वह भारतीय बास्केटबॉल टीम में हैं तो वह अपनी टीम के कप्तान हैं। विशेष 2006 से अब तक भारतीय बास्केटबॉल टीम के सदस्य हैं। 45 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगभग 200 से ज्यादा मैच खेले हैं, जिनमें 10 स्वर्ण पदक, दो रजत पदक तथा एक कांस्य पदक प्राप्त किया है। वहीं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विशेष भृगुवंशी ने अब तक नौ स्वर्ण पदक, तीन रजत पदक तथा तीन कांस्य पदक हासिल किया है।