अच्छी पहल: सात समंदर पार गूंजेगी कबीर की वाणी, टोरंटो में बनेगा कनाडा का पहला कबीर मंदिर
अब सात समंदर पार कबीरवाणी गूंजेगी। जल्द ही टोरंटो में कनाडा का पहला कबीर मंदिर बनेगा। 15 देशों में 40 से अधिक कबीर मठ, आश्रम और मंदिर हैं। जबकि देश-विदेश में करीब 2700 शाखाएं हैं।
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काशी में प्रकट हुए कबीरदास की वाणी सात समंदर पार गूंज रही है। नेपाल, मॉरीशस, फिजी के बाद अब टोरंटो में कबीर की वाणी गूंजेगी। यहां जल्द ही कबीर मंदिर बनाया जाएगा। कबीर एसोसिएशन ऑफ टोरंटो (कनाडा) ने इसकी पहल की है। टोरंटो में कबीर के पहले ही दो सत्संग सेंटर चल रहे हैं, जहां कबीरपंथी आकर कबीरवाणी पर सत्संग और कीर्तन करते हैं।
कबीर की प्राकट्यधाम लहरतारा की ओर से देश-विदेश में कबीरपंथ को बढ़ाने के लिए शाखाएं खोली जाती हैं और अनुयायियों के सहयोग से मंदिर भी बनाया जाता है। विदेशों में भी कबीरपंथ को मानने वालों की तादाद बढ़ी है।
प्राकट्यधाम के आचार्य हजूर अर्धनाम साहेब ने बताया कि कनाडा के टोरंटो शहर में अभी दो सत्यंग सेंटर खुला है, जहां अनुयायी हर रविवार और हर माह की पूर्णिमा तिथि पर भजन कीर्तन व सत्संग होते हैं।
कबीर एसोसिएशन ऑफ टोरंटो की ओर से वहां कबीर मंदिर बनाने की तैयारी है। यह कनाडा का पहला मंदिर होगा। इसमें कबीरदास की तीन फीट में मूर्ति स्थापित की जाएगा। मंदिर बनने के बाद यहां सत्संग, भजन-कीर्तन के अलावा चौका, पूजा और आरती भी होगी। कनाडा में 10 हजार कबीर के अनुयायी हैं। आचार्य हजूर अर्धनाम साहेब ने बताया कि अनुयायियों ने अमेरिका में भी कबीर सत्संग सेंटर और मंदिर बनवाने की मांग की है।
त्रिनिदाद और टोबैगो में है ज्यादा अनुयायी
विदेशों में सबसे ज्यादा 25 हजार से अधिक त्रिनिदाद और टोबैगो में कबीर के अनुयायी हैं। यहां उनकी छह शाखाएं संचालित हैं। इसके बाद पाकिस्तान में दो शाखाएं हैं। बांग्लादेश, नेपाल, मारीशस, फिजी, न्यूजीलैंड, अमेरिका, लंदन, ऑस्ट्रेलिया, वेस्ट इंडीज आदि देशों में भी कबीरपंथ के अनुयायी हैं। यहां आश्रम, मठ और मंदिर हैं।
कबीरपंथियों ने महाकुंभ में डुबकी, काशी में लगाई हाजिरी
महाकुंभ में देश-विदेश से आए कबीरपंथी भी डुबकी लगा रहे हैं। अब तक भारत के अलावा विदेशों से 40 से अधिक अनुयायी आ चुके हैं। न्यूजीलैंड के राजेश कुमार व रोशनी, ऑस्ट्रेलिया के मनोज प्रसाद व सुनीता, अमेरिका के मधुवेन, इंग्लैंड के नाथालाल समानी आदि अनुयायी महाकुंभ में डुबकी लगाने के बाद काशी आए और कबीर प्राकट्य स्थल पर मत्था टेका।
न्यूजीलैंड के मनोज और रोशनी ने बताया कि न्यूजीलैंड के लोग भी कबीर के सत्संग व भजन-कीर्तन में शामिल होते हैं। वहां नॉर्थ न्यूजीलैंड में ज्यादा अनुयायी हैं। बताया कि हमारी छठवीं पीढ़ी वहां रह रही है। वह मूल रूप से अयोध्या के हैं।