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वाराणसी: परिजनों ने वैष्णो देवी जाने से रोका तो इकलौते बेटे ने फांसी लगाकर दी जान

Sat, 01 Jan 2022 12:53 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 01 Jan 2022 12:53 AM IST
सार

परिजनों ने बताया कि उनका बेटा दोस्तों के साथ वैष्णो देवी जाने की जिद पर अड़ा था। पिता ने उसे जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद उसने कमरे में जाकर फांस लगा ली।

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Boy suicide hanged himself after family stopped visiting Vaishno Devi in varanasi
युवक ने फांसी लगाकर जान दी।

विस्तार

वाराणसी में सिगरा माधोपुर में एक छात्र ने कमरे के अंदर फंदे पर लटक जान दे दी। शुक्रवार सुबह घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। परिजनों के अनुसार दोस्तों के साथ वैष्णो देवी जाने के जिद पर अड़ा था, मना करने पर ऐसा कदम उठाया।

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पुलिस के अुसार, सिगरा थाना अंतर्गत माधोपुर निवासी हरिशंकर मौर्या का इकलौता पुत्र अशीष मौर्या(20) एक कॉलेज में पढ़ाई करता था। परिजनों के अनुसार, एक दिन पहले वह घर में दोस्तों के साथ वैष्णो देवी धाम जाने की जिद कर रहा था। पिता हरिशंकर ने उसे जाने की अनुमति नहीं दी।
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इसके बाद वह गुरुवार की रात में 11 बजे अपने कमरे में सोने चला गया। सुबह अशीष के कमरे में झांक कर देखा तो फंदे से लटकता मिला। तुरंत उसे उताकर बीएचयू स्थित ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

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सिगरा पुलिस के मुताबिक शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया गया, परिजनों से भी घटना के बाबत पूछताछ की गई। बेटे के इस खौफनाक कदम से पिता हरिशंकर और मां सहित अन्य परिजन बेसुध हो गए।

काश भेज दिया होता, आज आंखों के सामने रहता मेरा लाल
बेसुध पिता हरिशंकर के अनुसार बढ़ती ठंड के कारण और जम्मू में ट्रेनों के निरस्तीकरण की सूचनाओं के चलते उसे मना कर रहा था, यह पता नहीं था कि हमारा बेटा इस तरह का कदम उठा लेगा। उसने हम सभी को अकेला छोड़ दिया, पिता हरिशंकर ने अफसोस जाहिर किया कि काश उसे भेज दिए तो आज मेरा लाल आंखों के सामने रहता।
  
अभिभावकों द्वारा किसी बात को लेकर अत्यधिक दबाव देना भी बच्चों को तनाव में ला सकता है। डांट से बच्चों की मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जिससे वह अपने आपको हीन भावना से देखने लगते हैं। यही नहीं, वह अपने आपको अपमानित भी समझने लगते हैं। अभिभावकों को बच्चों की मानसिक स्थिति को समय-समय पर परखना जरूरी है। - डॉ. संजय गुप्ता, मनोचिकित्सक, बीएचयू

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