{"_id":"5b39aac34f1c1b264d8b9785","slug":"bjp-president-amit-shah-will-review-political-alliance-in-purvanchal","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विंध्यवासिनी धाम से पूर्वांचल में गठबंधन की नब्ज टटोलेंगे अमित शाह ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विंध्यवासिनी धाम से पूर्वांचल में गठबंधन की नब्ज टटोलेंगे अमित शाह
प्रदीप मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 04 Jul 2018 12:06 PM IST
विज्ञापन
Amit Shah
सपा-बसपा के गठबंधन के कारण 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए वाराणसी एक बार फिर अहम केंद्र बनने जा रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का मिर्जापुर में आज का दौरा पूर्वांचल की चुनावी रणनीति में पटेल और राजभर बिरादरी को साधने से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस दौरान वाराणसी में आईटी सेल को भी सक्रिय किया जाएगा, ताकि केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ ही विरोधियों के जुबानी हमलों का बखूबी जवाब दिया जा सके।
जानकारों की मानें तो इस दौरे में शाह पूर्वांचल के मतदाताओं के भाव समझकर उसके मुताबिक पार्टी को रणनीति तैयार करने की सलाह देंगे। पार्टी को पता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी, मिर्जापुर और आजमगढ़ मंडल में बसपा ने सीट भले ही नहीं जीती थी, पर उसके प्रत्याशियों को सपा से भी ज्यादा वोट मिले थे।
विज्ञापन
ऐसे में गठबंधन के बाद हालात बहुत अनुकूल नहीं हैं। मुलायम सिंह यादव द्वारा आजमगढ़ सीट छोड़ने के बाद भाजपा ने यहां अपनी नजर गड़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अगले हफ्ते आजमगढ़ दौरा इसी मकसद से कराया जा रहा है।
अमित शाह के आज के वाराणसी और मिर्जापुर के दौरे में यह भी तय हो जाएगा कि मंत्रिमंडल के अगले विस्तार में पूर्वांचल को कैसे महत्व दिया जाए। जमीनी हकीकत की पड़ताल और फीडबैक के बाद मंथन कर तालमेल बढ़ाने पर फैसला किया जाएगा।
गोरखपुर-बस्ती मंडल की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई है, जबकि वाराणसी और मिर्जापुर की कमान फिलहाल अमित शाह ने खुद संभाल ली है।
सूत्र तो यह भी कहते हैं कि चुनाव से पहले तक पीएम मोदी और शाह के पूर्वांचल दौरों की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव जैसा परचम 2019 के लोकसभा चुनाव में भी फहरा सके।
विज्ञापन
इस दौरान वाराणसी में आईटी सेल को भी सक्रिय किया जाएगा, ताकि केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ ही विरोधियों के जुबानी हमलों का बखूबी जवाब दिया जा सके।
विज्ञापन
जानकारों की मानें तो इस दौरे में शाह पूर्वांचल के मतदाताओं के भाव समझकर उसके मुताबिक पार्टी को रणनीति तैयार करने की सलाह देंगे। पार्टी को पता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी, मिर्जापुर और आजमगढ़ मंडल में बसपा ने सीट भले ही नहीं जीती थी, पर उसके प्रत्याशियों को सपा से भी ज्यादा वोट मिले थे।
विज्ञापन
ऐसे में गठबंधन के बाद हालात बहुत अनुकूल नहीं हैं। मुलायम सिंह यादव द्वारा आजमगढ़ सीट छोड़ने के बाद भाजपा ने यहां अपनी नजर गड़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अगले हफ्ते आजमगढ़ दौरा इसी मकसद से कराया जा रहा है।
अमित शाह के आज के वाराणसी और मिर्जापुर के दौरे में यह भी तय हो जाएगा कि मंत्रिमंडल के अगले विस्तार में पूर्वांचल को कैसे महत्व दिया जाए। जमीनी हकीकत की पड़ताल और फीडबैक के बाद मंथन कर तालमेल बढ़ाने पर फैसला किया जाएगा।
गोरखपुर-बस्ती मंडल की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई है, जबकि वाराणसी और मिर्जापुर की कमान फिलहाल अमित शाह ने खुद संभाल ली है।
सूत्र तो यह भी कहते हैं कि चुनाव से पहले तक पीएम मोदी और शाह के पूर्वांचल दौरों की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव जैसा परचम 2019 के लोकसभा चुनाव में भी फहरा सके।
Trending Videos
ओपी राजभर की उम्मीदें और रुख मंत्रिमंडल विस्तार पर टिका
कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर
- फोटो : अमर उजाला
सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बारे में भाजपा के राष्ट्रीय से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक का मानना है कि उनके किसी भी बयान पर प्रतिक्रिया नहीं दी जाए।
दरअसल, पार्टी जानती है कि बदले हुए राजनीतिक समीकरण में उसे पूर्वांचल के लिए राजभर की जरूरत ज्यादा है। लोकसभा चुनाव तक पार्टी ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहती है, जिससे मतदाताओं में गठबंधन में दरार का संदेश जाए।
राजभर भी आए दिन बयान देकर माहौल बनाते रहते हैं। इससे निपटने के लिए उन्हें मंत्रिमंडल विस्तार में मौजूद विभाग बदलकर ऐसा विभाग देने की योजना है, ताकि वह अपने वर्ग के मतदाताओं के हित में बेहतर काम कर सकें। माना जा रहा है कि इसके बाद राजभर लोकसभा चुनाव तक शांत हो जाएंगे।
दरअसल, पार्टी जानती है कि बदले हुए राजनीतिक समीकरण में उसे पूर्वांचल के लिए राजभर की जरूरत ज्यादा है। लोकसभा चुनाव तक पार्टी ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहती है, जिससे मतदाताओं में गठबंधन में दरार का संदेश जाए।
राजभर भी आए दिन बयान देकर माहौल बनाते रहते हैं। इससे निपटने के लिए उन्हें मंत्रिमंडल विस्तार में मौजूद विभाग बदलकर ऐसा विभाग देने की योजना है, ताकि वह अपने वर्ग के मतदाताओं के हित में बेहतर काम कर सकें। माना जा रहा है कि इसके बाद राजभर लोकसभा चुनाव तक शांत हो जाएंगे।
गिरते वोट प्रतिशत से भगवा खेमे में टेंशन
अपना दल
- फोटो : amar ujala
भगवा खेमे की सबसे बड़ी टेंशन कम हो रहा वोट प्रतिशत है। 2014 में भाजपा को कुल 42.6 प्रतिशत वोट मिले थे, इस चुनाव में सपा को 22.4 और बसपा को 19.8 प्रतिशत वोट मिला था। मगर 2017 में भाजपा को 41.6 प्रतिशत वोट मिले, जो लोकसभा चुनाव से एक प्रतिशत कम रहा।
इसी चुनाव में सपा को 28.3 और बसपा को 22.4 फीसदी मत मिले थे। दोनों दलों ने 50 फीसदी से अधिक मत हासिल किए थे। वोट प्रतिशत का यह आंकड़ा भाजपा के लिए चुनौती है।
इसी चुनाव में सपा को 28.3 और बसपा को 22.4 फीसदी मत मिले थे। दोनों दलों ने 50 फीसदी से अधिक मत हासिल किए थे। वोट प्रतिशत का यह आंकड़ा भाजपा के लिए चुनौती है।