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लंदन में फैलेगी भोजपुरी माटी की खुशबू, मार्च में मनेगा ‘बिहारी दिवस’
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 30 Oct 2017 02:43 PM IST
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विश्व प्रवासी भारतीय सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी में आयोजित विश्व प्रवासी भारतीय सम्मेलन में भोजपुरी को सशक्त बनाने और देश-दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए कई फैसले लिए गए। रविवार को नदेसर स्थित एक होटल में तीन दिन से चल रहे इस सम्मेलन का समापन हुआ। इस सम्मेलन में कई बड़े फैसले लिए गए।
बाबतपुर में भोजपुरी भवन बनाने और भोजपुरी की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय हुआ। साथ ही तय हुआ कि अगला सम्मेलन 17 मार्च 2018 को लंदन में आयोजित किया जाएगा, जिसे ‘बिहारी दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।
इंडियन डायस्पोरा संस्था की ओर से आयोजित सम्मेलन में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने भोजपुरी माटी की खुशबू विश्व भर में फैलाने का संकल्प लिया। इंग्लैंड से आए उदेश्वर कुमार सिंह ने बताया कि अगला सम्मेलन लंदन में बिहारी दिवस के रूप में मनेगा।
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इसमें तकरीबन 60 देशों के पांच सौ प्रतिनिधि शिरकत करेंगे। साथ ही बाबतपुर एयरपोर्ट के समीप भोजपुरी भवन का निर्माण कराया जाएगा और भोजपुरी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह काम संस्था के सदस्यों की आर्थिक मदद से कराया जाएगा। इसके लिए जल्द ही जमीन तलाशी जाएगी।
बता दें कि इस सम्मेलन में मनोज तिवारी, अमर सिंह, भारत में मॉरीशस के उच्चायुक्त जगदीश गोवर्धन, त्रिनिदाद एंड टोबैगो के उच्चायुक्त देव सी प्रसाद, और फिजी के उच्चायुक्त अजरीन शबनम खां आदी भी शामिल हुए।
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बाबतपुर में भोजपुरी भवन बनाने और भोजपुरी की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय हुआ। साथ ही तय हुआ कि अगला सम्मेलन 17 मार्च 2018 को लंदन में आयोजित किया जाएगा, जिसे ‘बिहारी दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।
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इंडियन डायस्पोरा संस्था की ओर से आयोजित सम्मेलन में विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने भोजपुरी माटी की खुशबू विश्व भर में फैलाने का संकल्प लिया। इंग्लैंड से आए उदेश्वर कुमार सिंह ने बताया कि अगला सम्मेलन लंदन में बिहारी दिवस के रूप में मनेगा।
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इसमें तकरीबन 60 देशों के पांच सौ प्रतिनिधि शिरकत करेंगे। साथ ही बाबतपुर एयरपोर्ट के समीप भोजपुरी भवन का निर्माण कराया जाएगा और भोजपुरी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह काम संस्था के सदस्यों की आर्थिक मदद से कराया जाएगा। इसके लिए जल्द ही जमीन तलाशी जाएगी।
बता दें कि इस सम्मेलन में मनोज तिवारी, अमर सिंह, भारत में मॉरीशस के उच्चायुक्त जगदीश गोवर्धन, त्रिनिदाद एंड टोबैगो के उच्चायुक्त देव सी प्रसाद, और फिजी के उच्चायुक्त अजरीन शबनम खां आदी भी शामिल हुए।
भोजपुरी माई मंदिर की स्थापना का वादा
प्रवासी भारतीय भवन के लिए सांसद निधि से 50 लाख रुपये देंगे अमर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार भूमि उपलब्ध करा दे तो वह अपनी निधि से प्रवासी भारतीय भवन और भोजपुरी माई मंदिर की स्थापना करा देंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए वे 50 लाख रुपये देंगे। वे शनिवार को बड़ालालपुर स्थित जीवनदीप शिक्षण समूह परिसर में आयोजित विश्व प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दूसरे दिन प्रवासी और आप्रवासी भारतीयों को संबोधित कर रहे थे।
बताया कि जमीन के लिए डीएम से भी वार्ता की है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल ने कई प्रधानमंत्री दिए मगर आज भी यहां पिछड़ापन है। पूर्वांचल के तमाम लोग मुंबई में रिक्शा और टैक्सी चलाकर अपनी जीविका चलाते है। वहां भी बाहरी बताकर प्रताड़ित किया जाता है। उन्होंने कहा कि अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा यूपी से हैं। उन्हें बनारसी साड़ी की ब्रांडिंग करनी चाहिए।
भोजपुरी फिल्म एवं टेलीविजन एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और बिहारी कनेक्शन के अध्यक्ष उदेश्वर कुमार सिंह ने भी प्रवासी भवन में मदद देने की पेशकश की। भारत में मॉरीशस के उच्चायुक्त जगदीश गोवर्धन, त्रिनिदाद एंड टोबैगो के उच्चायुक्त देव सी प्रसाद, फिजी के उच्चायुक्त अजरीन शबनम खां ने कहा कि दोनों देशों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ युवाओं को आने-जाने की व्यवस्था कि जाएगी। वे एक-दूसरे की कला, संस्कृति, साहित्य, शिक्षा से परिचित हो सकेंगे।
बताया कि जमीन के लिए डीएम से भी वार्ता की है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल ने कई प्रधानमंत्री दिए मगर आज भी यहां पिछड़ापन है। पूर्वांचल के तमाम लोग मुंबई में रिक्शा और टैक्सी चलाकर अपनी जीविका चलाते है। वहां भी बाहरी बताकर प्रताड़ित किया जाता है। उन्होंने कहा कि अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा यूपी से हैं। उन्हें बनारसी साड़ी की ब्रांडिंग करनी चाहिए।
भोजपुरी फिल्म एवं टेलीविजन एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और बिहारी कनेक्शन के अध्यक्ष उदेश्वर कुमार सिंह ने भी प्रवासी भवन में मदद देने की पेशकश की। भारत में मॉरीशस के उच्चायुक्त जगदीश गोवर्धन, त्रिनिदाद एंड टोबैगो के उच्चायुक्त देव सी प्रसाद, फिजी के उच्चायुक्त अजरीन शबनम खां ने कहा कि दोनों देशों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ युवाओं को आने-जाने की व्यवस्था कि जाएगी। वे एक-दूसरे की कला, संस्कृति, साहित्य, शिक्षा से परिचित हो सकेंगे।
तकनीक के जरिये भोजपुरी को देंगे मजबूती
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू स्थित भोजपुरी अध्ययन केंद्र ने हाईटेक तकनीक के जरिये भोजपुरी को सशक्त बनाने की योजना तैयार की है। प्रोजेक्टर के जरिये पढ़ाई और वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा विकसित की जाएगी। साथ ही केंद्र से अप्रवासी भारतीयों को जोड़ने के साथ ही भोजपुरी में दूसरी भाषाओं के साहित्य का अनुवाद कराया जाएगा।
तकनीक के जरिये भोजपुरी से नई पीढ़ी को परिचित कराने और इसमें नयापन लाने के उद्देश्य से भोजपुरी अध्ययन केंद्र कई कदम उठाएगा। यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को प्रोजेक्टर और वीडियो कांफ्रेंसिंग जैसी तकनीकी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। साथ ही विभिन्न देशों में रह रहे भोजपुरी भाषी लोगों को केंद्र से जोड़ा जाएगा। छात्र-छात्राएं इन प्रवासी भारतीयों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संवाद भी कर सकेंगे।
इतना ही नहीं, अंग्रेजी, उर्दू और हिंदी साहित्य का भोजपुरी भाषा में अनुवाद भी कराया जाएगा। केंद्र की इस पहल से भोजपुरी को नई दिशा तो मिलेगी ही, साथ ही भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए चल रहे आंदोलन को भी बल मिलेगा।
इन बिंदुओं पर भी होगा काम
छात्र-छात्राओं को भोजपुरी क्षेत्र की उपलब्धियों की दी जाएगी जानकारी।
अंग्रेजी, उर्दू और हिंदी साहित्य का भोजपुरी भाषा में होगा अनुवाद।
लेखक से मिलिए कार्यक्रम होगा, जिसमें भोजपुरी के रचनाकार होंगे शामिल।
प्रकाशन विभाग बनेगा, जिसमें महत्वपूर्ण रचनाओं का होगा प्रकाशन।
तकनीक के जरिये भोजपुरी से नई पीढ़ी को परिचित कराने और इसमें नयापन लाने के उद्देश्य से भोजपुरी अध्ययन केंद्र कई कदम उठाएगा। यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को प्रोजेक्टर और वीडियो कांफ्रेंसिंग जैसी तकनीकी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। साथ ही विभिन्न देशों में रह रहे भोजपुरी भाषी लोगों को केंद्र से जोड़ा जाएगा। छात्र-छात्राएं इन प्रवासी भारतीयों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संवाद भी कर सकेंगे।
इतना ही नहीं, अंग्रेजी, उर्दू और हिंदी साहित्य का भोजपुरी भाषा में अनुवाद भी कराया जाएगा। केंद्र की इस पहल से भोजपुरी को नई दिशा तो मिलेगी ही, साथ ही भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए चल रहे आंदोलन को भी बल मिलेगा।
इन बिंदुओं पर भी होगा काम
छात्र-छात्राओं को भोजपुरी क्षेत्र की उपलब्धियों की दी जाएगी जानकारी।
अंग्रेजी, उर्दू और हिंदी साहित्य का भोजपुरी भाषा में होगा अनुवाद।
लेखक से मिलिए कार्यक्रम होगा, जिसमें भोजपुरी के रचनाकार होंगे शामिल।
प्रकाशन विभाग बनेगा, जिसमें महत्वपूर्ण रचनाओं का होगा प्रकाशन।