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BHU: बीएचयू के कुलपति ने प्रोफेसरों से मांगे 25 लाख से ज्यादा का रिसर्च प्रपोजल, वैज्ञानिकों से कही ये खास बात

Tue, 07 Oct 2025 03:54 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 07 Oct 2025 03:54 PM IST
सार

Varanasi News: बीएचयू के कुलपति ने प्रोफेसरों से 25 लाख तक के गेमचेंजर रिसर्च प्रपोजल मांगे। प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि आप प्रस्ताव भेजें, संसाधनों की चिंता विश्वविद्यालय की होगी। 
 

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BHU Vice Chancellor asks professors to submit game-changing research proposals worth over Rs 25 lakh
बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएचयू अपनी रिसर्च सुविधाओं को विस्तार करने के लिए शोध प्रस्तावों को आमंत्रित करेगा। कुलपति ने रिसर्चरों और वैज्ञानिकों से अनुसंधान और नवाचार के प्रपोजल मांगे हैं। सोमवार को प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि 25 लाख रुपये से ज्यादा के प्रस्तावों को साझा करें। विवि को प्रगति देने वाले प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा और संसाधनों की चिंता विश्वविद्यालय की होगी। 

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शिक्षकों से कहा कि वे परंपरागत सोच से आगे बढ़ें और ऐसे विचार प्रस्तुत करें जो विश्वविद्यालय की अनुसंधान यात्रा में गेम चेंजर साबित हो सकें। कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने जियोलॉजी विभाग के 103वें स्थापना दिवस पर कहा कि यह प्रपोजल विज्ञान और नवाचार परियोजनाओं, एक से ज्यादा विषयों का समाहित अध्ययन, फैब्रिकेशन, उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम, मशीनों के विकास व स्थापना, उच्च स्तरीय अनुसंधान के साथ ही विश्लेषणात्मक या कैरेक्टराइजेशन सुविधाओं की स्थापना के सुझावों को स्वीकार किया जाएगा।
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कुलपति ने कहा कि बीएचयू के रिसर्च इको सिस्टम को ज्यादा विस्तार देकर सशक्त भी बनाना है। उत्तम विज्ञान के लिए निवेश की आवश्यकता होती है। न केवल संसाधनों के रूप में बल्कि प्रतिभावान विद्यार्थियों, शिक्षकों, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और उच्च स्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।



विभाग के संस्थापक प्रमुख प्रो. केके माथुर को याद करते हुए कहा कि अंग्रेजी शासनकाल में संसाधन और तकनीक सीमित थे। उसके बावजूद विभाग को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया गया।

भूविज्ञान में अभी भी बहुत कुछ खोजा जाना बाकी

कार्यक्रम में अहमदाबाद स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के इनसा वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. एम. सरीन ने जलवायु परिवर्तन के मानवजनित और प्राकृतिक कारणों की व्याख्या की। बताया कि जीवाश्म ईंधन के दहन, वनों की कटाई और औद्योगिक गतिविधियों से बढ़ता कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन ग्रीनहाउस प्रभाव को तेज कर वैश्विक तापवृद्धि को बढ़ा रहा है। इसके निवारण और अनुकूलन रणनीतियों की तात्कालिक आवश्यकता है।

रेक्टर प्रो. संजय कुमार ने कहा कि भूविज्ञान में अभी भी बहुत कुछ खोजा जाना बाकी है। अंतर्विषयक अनुसंधान इस क्षेत्र की संभावनाओं को उजागर करने की कुंजी है। विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. आरके श्रीवास्तव ने भूविज्ञान विभाग के अग्रणी अनुसंधानों को समझाया। भूविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण देव सिंह ने बताया कि इस विभाग की स्थापना 1923 में हुई थी। यहां देश का सबसे समृद्ध भूविज्ञान संग्रहालय है।  
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