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बीएचयू के वैज्ञानिकों का कमाल: नारियल की जटा से तैयार किया खाद्य फ्लेवर, ब्रेस्ट कैंसर में करेगा दवा का काम

Thu, 24 Aug 2023 10:56 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 24 Aug 2023 10:56 PM IST
सार

बीएचयू के वैज्ञानिकों ने नारियल की जटा से एंटी ऑक्सीडेंट वाला एक फ्लेवर बनाने में सफलता पाई है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ब्रेस्ट कैंसर में यह दवा का काम करेगा। खाद्य प्रसंस्करण और फार्मा उद्योगों के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकेगा।

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BHU scientists prepared food flavor from coconut coir will work as medicine in breast cancer
नारियल - फोटो : istock

विस्तार

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में नारियल की जटा से एंटी ऑक्सीडेंट वाला एक फ्लेवर बनाया गया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इसके अंदर एंटी कैंसर गुण है। ब्रेस्ट कैंसर में यह दवा का काम करेगा। पहली बार फ्लेवर्स वाले तत्वों को बनाने में सफलता मिली है। खाद्य प्रसंस्करण और फार्मा उद्योगों के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकेगा।

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बीएचूय में कृषि विज्ञान संस्थान के दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. अभिषेक दत्त त्रिपाठी, डॉ. वीणा पॉल, डॉ. विभव गौतम और दिल्ली विश्वविद्यालय की डॉ. अपर्णा अग्रवाल ने इस शोध में अहम भूमिका निभाई है। डॉ. अभिषेक ने बताया कि शोध बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी, फूड बायोटेक्नोलॉजी और एप्लाइड फूड बायोटेक्नोलॉजी जैसी पत्रिकाओं में यह शोध प्रकाशित हो चुका है।
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डॉ. अभिषेक ने बताया कि फ्लेवर के उत्पादन के लिए पहली बार बैसिलस आर्यभट्टई की मदद ली गई। नारियल के जटा के लिग्नोसेल्यूलोसिक बायोमास का उपयोग कर प्रकृति-समान यौगिक फ्लेवर तैयार किया गया।
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ये है पूरी प्रक्रिया

BHU scientists prepared food flavor from coconut coir will work as medicine in breast cancer
नारियल की जटा पर शोध करने वाले वैज्ञानिक - फोटो : अमर उजाला

नारियल की जटा को उपचारित किया गया। 50 डिग्री सेंटीग्रेड पर 72 घंटों तक सुखाया गया। फिर इसे बारीक पाउडर बना लिया गया। नारियल जटा के जल-आसवन के बाद, इसे एक घंटे के लिए 100 डिग्री सेंटीग्रेड पर घोल बनाया गया। लिग्निन और सेलूलोज को अलग करने के लिए फिल्टर किया गया। निकाले गए लिगनिन को बैसिलस आर्यभट्टई का उपयोग कर किण्वित किया गया।

इसके बाद किण्वित पदार्थ को फिल्टर किया गया। अवशेष को एक अलग फनल में स्थानांतरित किया गया और एथिल एसीटेट के साथ निकाला गया। 15 मिनट के लिए सेंट्रीफ्यूज करने के बाद सभी कार्बनिक तत्वों को केंद्रित किया गया। फ्लेवर का सेल लाइन अध्ययन के लिए परीक्षण किया गया, जो स्तन कैंसर के खिलाफ काम कर रहा था।

काशी के मंदिरों में हो सकेगा वेस्ट मैनेजमेंट

डॉ. अभिषेक दत्त त्रिपाठी ने बताया कि काशी में मंदिरों से बड़ी संख्या में हर दिन नारियल की जटा निकलती है। यह अपशिष्ट बायोडिग्रेडेबल है। अगर इसे ठीक से नियंत्रित नहीं किया जाता है, तो यह पर्यावरण के लिए खतरा पैदा करता है। यहीं नहीं कई सूक्ष्म जीव रोगों के लिए प्रजनन स्थल के रूप में भी यह कार्य करता है। इससे मंदिरों में वेस्ट मैनेजमेंट भी हो सकेगा।

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