कोरोना वैक्सीन के शोध में अपनी जिंदगी दान करने के लिए आगे आया ये शख्स, पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी
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इस समय पूरे विश्व में आतंक का पर्याय बने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए वैक्सीन तैयार करने में लगभग सभी देशों के वैज्ञानिक लगे हुए हैं। लेकिन सबसे अधिक दिक्कत इस वैक्सीन की टेस्टिंग में आ रही है। इसका कारण है कि अभी वैज्ञानिकों को भी पता नहीं कि वैक्सीन मानव शरीर पर किस तरह का रिएक्शन देगी।
ऐसे हालातों में बलिया के एक नौजवान ने एक बार फिर कदम आगे बढ़ा कर जिले का नाम रोशन किया है। ध्रुव जी स्मृति सेवा संस्थान के सचिव भानु प्रकाश सिंह बबलू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री व सचिव भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली को पत्र लिखने के साथ ही फेसबुक व ट्विटर के माध्यम से अपनी जिंदगी दान करने की सूचना दी है। उन्होंने कहा है कि उनके शरीर पर वैक्सीन की जांच कराई जा सकती है और उसके अच्छे या बुरे सभी परिणामों के लिए केवल वह खुद ही जिम्मेदार होंगे।
अपने पत्र में भानु ने लिखा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 जो पूरी मानवता के लिए खतरा बन चुका है। इस घातक महामारी से मानवता को बचाने के लिए भारत के वैज्ञानिक दिन-रात कोविड-19 का टीका बनाने के लिए प्रयासरत हैं। विभिन्न माध्यमों से ज्ञात हुआ है कि कोविड -19 के टीके को विकसित करने में हमारे देश के वैज्ञानिक निर्णायक दौर में हैं।
टीका के सफल परीक्षण व वैक्सीन के शीघ्र उत्पादन के लिए मानव शरीर पर परीक्षण के लिए बड़ी संख्या में स्वयं सेवकों की आवश्यकता होगी। प्रार्थी भानु प्रकाश सिंह 'बबलू ' पुत्र प्रहलाद सिंह निवासी- ग्राम-पोस्ट- पूर, तहसील- सिकन्दरपुर, जनपद-बलिया (उत्तर प्रदेश) अपने शरीर को कोविड-19 के वैक्सीन के सफल परीक्षण हेतु दान करना चाहता है।
उन्होंने लिखा है कि परीक्षण में होने वाले किसी भी प्रकार के परिणाम की जिम्मेदारी प्रार्थी की होगी। विश्व में पांच लाख से अधिक मृत्यु व प्रतिदिन लाखों लोगों के कोविड-19 से संक्रमित होने को देखते हुए स्वेच्छा से अपना शरीर कोविड-19 के वैक्सीन परीक्षण हेतु प्रदान करता हूं। उन्होंने बताया है कि वे अविवाहित एवं कोविड- 19 वैक्सीन परीक्षण हेतु शारीरिक व मानसिक रुप से स्वस्थ हैं।
गौरतलब हो कि भानु पहले ही अपने जन्मदिन पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के शरीर रचना विभाग को चिकित्सकीय शिक्षा एवं अनुसंधान हेतु मृत्युपरांत शरीर दान कर चुके हैं।