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मॉल संस्कृति में बाबा को ले जाने की योजना फेल
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 17 Apr 2016 02:02 AM IST
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बाबा विश्वनाथ
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कभी पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने बाबा विश्वनाथ के शिखर पर साढ़े 22 मन सोना चढ़वा कर विश्व भर के श्रद्धालुओं में शोहरत और पुण्य बटोरा था।
अब औघड़दानी के लिए मंदिर प्रशासन मॉल खरीदने का सपना देख रहा है। भस्म, भभूत और बाघंबर वाले बाबा विश्वनाथ का अभी द्वार तक नहीं बन सका है लेकिन मॉल खरीदने की तैयारी कर ली गई। हालांकि यह सपना टूट गया। न्यास परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को अनुपयोगी मानते हुए वापस कर दिया गया।
अधिग्रहण के 33 साल बाद भी श्रद्धालुओं को सहज दर्शन की सुविधा तो मंदिर प्रशासन मुहैया नहीं करा सका, अलबत्ता बेहतरी के नाम पर उसे उल्टे सपने जरूर आने लगे। मंदिर से लगे आसपास के भवनों को खरीदने की कमजोर कोशिशों के चलते अभी तक विस्तारीकरण योजना को कामयाबी नहीं मिल सकी लेकिन बांसफाटक पर 6000 वर्ग फीट एरिया में बने शापुरी मॉल को खरीदने का प्रस्ताव बना लिया गया।
जिला प्रशासन के सर्किल रेट के आधार पर इस मॉल को खरीदने का मसौदा बनाया गया। इस रेट पर शापुरी मॉल की कीमत 65 करोड़ रुपये आ रही है। चार करोड़ रुपये से अधिक इसकी रजिस्ट्री में खर्च होते। इस तरह बाबा के खजाने से कुल 69 करोड़ रुपये मॉल के लिए खर्च किए जाते। हालांकि न्यास परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन सकी।
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प्रमुख सचिव धर्मार्थ कार्य नवनीत सहगल ने सदस्यों के विरोध पर इस प्रस्ताव को दर किनार कर दिया। सौदा हो जाता तो इस मॉल में बाबा के भक्तों के लिए क्या योजनाएं चलाई जा सकती थीं। छह साल से बनकर तैयार यह मॉल साझेदारों के आपसी तालमेल के अभाव में अभी तक खुल नहीं सका है। मौजूदा समय इसका इस्तेमाल पार्किंग के तौर पर किया जा रहा है।
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अब औघड़दानी के लिए मंदिर प्रशासन मॉल खरीदने का सपना देख रहा है। भस्म, भभूत और बाघंबर वाले बाबा विश्वनाथ का अभी द्वार तक नहीं बन सका है लेकिन मॉल खरीदने की तैयारी कर ली गई। हालांकि यह सपना टूट गया। न्यास परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को अनुपयोगी मानते हुए वापस कर दिया गया।
अधिग्रहण के 33 साल बाद भी श्रद्धालुओं को सहज दर्शन की सुविधा तो मंदिर प्रशासन मुहैया नहीं करा सका, अलबत्ता बेहतरी के नाम पर उसे उल्टे सपने जरूर आने लगे। मंदिर से लगे आसपास के भवनों को खरीदने की कमजोर कोशिशों के चलते अभी तक विस्तारीकरण योजना को कामयाबी नहीं मिल सकी लेकिन बांसफाटक पर 6000 वर्ग फीट एरिया में बने शापुरी मॉल को खरीदने का प्रस्ताव बना लिया गया।
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जिला प्रशासन के सर्किल रेट के आधार पर इस मॉल को खरीदने का मसौदा बनाया गया। इस रेट पर शापुरी मॉल की कीमत 65 करोड़ रुपये आ रही है। चार करोड़ रुपये से अधिक इसकी रजिस्ट्री में खर्च होते। इस तरह बाबा के खजाने से कुल 69 करोड़ रुपये मॉल के लिए खर्च किए जाते। हालांकि न्यास परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन सकी।
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प्रमुख सचिव धर्मार्थ कार्य नवनीत सहगल ने सदस्यों के विरोध पर इस प्रस्ताव को दर किनार कर दिया। सौदा हो जाता तो इस मॉल में बाबा के भक्तों के लिए क्या योजनाएं चलाई जा सकती थीं। छह साल से बनकर तैयार यह मॉल साझेदारों के आपसी तालमेल के अभाव में अभी तक खुल नहीं सका है। मौजूदा समय इसका इस्तेमाल पार्किंग के तौर पर किया जा रहा है।