Sports: किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप में छाए काशी के खिलाड़ी, यूपी टीम से खेलते हुए एक स्वर्ण सहित जीते पांच पदक
Varanasi News: ओडिशा में खेली गई जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों के पदक विजेता खिलाड़ियों के बीच मुकाबले हुए। इस दौरान किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप में काशी के खिलाड़ी छाए।
विस्तार
ओडिशा में हुई जूनियर नेशनल किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए वाराणसी के खिलाड़ियों एक स्वर्ण समेत कुल पांच पदक अपने नाम कर काशी का गौरव बढ़ाया। प्रतियोगिता में देशभर के विभिन्न राज्यों के प्रादेशिक प्रतियोगिता के स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था।
30 मई से 3 जून तक हुई स्पर्धा में वाराणसी के खिलाड़ियों ने एक स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य सहित कुल पांच पदक अपने नाम किए। प्रतियोगिता में काशी के ओम राय ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। वहीं, ईशान यादव, समीर शर्मा और चंचल सोनकर ने अपने-अपने मुकाबलों में रजत पदक जीता। वहीं, जाल्हूपुर की शुभांगी ने 50 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक जीता। राष्ट्रीय प्रतियोगिता से लौटने पर खिलाड़ियों का क्षेत्र भव्य स्वागत हुआ।
जालुपुर स्थित जेआरएमएस लाइब्रेरी के संस्थापक तोयस शर्मा ने सभी विजेता खिलाड़ियों को पुष्पमाला पहनाकर और मिठाई खिलाकर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के इन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती।
महिला वर्ग में जाल्हूपुर की शुभांगी ने जीता कांस्य
प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक की प्रबल दावेदार मानी जा रही जाल्हूपुर निवासी शुभांगी को 50 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक जीता। लगातार तीन बाजी जीत कर पदक की दौड़ में पहुंची शुभांगी की मांसपेशियों में लगातार खेलने से खिंचाव आ गया था। इस वजह से उन्हें कांस्य से संतोष करना पड़ा।
आत्मरक्षा के साथ किकबॉक्सिंग से आती है शारीरिक मजबूती
किकबॉक्सिंग मुक्केबाजी के पंचों और विभिन्न मार्शल आर्ट की किक का मिश्रण है, जो आत्मरक्षा तकनीक बनाने के साथ शरीर को भी मजबूत बनाता है। इसमें खिलाड़ी प्रतिद्वंद्वी को हराने के लिए पंच और किक का उपयोग करते हैं। खेल के दौरान शरीर के ऊपरी हिस्से और पैरों पर प्रहार की अनुमति होती है। इसमें सिर पर सीधे घुटने से हमला नहीं कर सकते हैं। हालांकि, कुछ शैलियों में घुटनों और कोहनी से प्रहार की अनुमति होती है।