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नहीं मानीं मांगें तो दोहराएंगे सन 74 का इतिहास

Mon, 18 Jan 2016 02:00 AM IST
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला Updated Mon, 18 Jan 2016 02:00 AM IST
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Ask the 74 year history of failed not repeat

रेल कर्मियों की लंबे समय से चली आ रही मांगें जल्द पूरी न हुईं तो कर्मचारी वर्ष 1974 के आंदोलन का इतिहास दुहराने को बाध्य होंगे। तब कर्मचारियों के आंदोलन से रेलों के पहिये थम गए थे।

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 यदि सरकार ने इस बार कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई तो इसका खामियाजा भी उसे भुगतना होगा। रविवार को वाराणसी आए ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्र ने यह चेतावनी दी।
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बताया कि रेल कर्मी अपनी मांगों के समर्थन में 19 से 21 जनवरी तक धरना-प्रदर्शन करेंगे। फिर एफडीआई और पीपीपी मॉडल आदि के विरोध में हड़ताल हो या न हो, इस पर 11 और 12 फरवरी को गुप्त मतदान कराया जाएगा।
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 फरवरी के अंत तक अगर सरकार बुलाएगी और बातचीत करना चाहेगी तो संगठन उसका स्वागत करेगा अन्यथा 1974 के आंदोलन को दुहराया जाएगा। मार्च में रेल चक्काजाम की रणनीति तय की जा सकती है।
कैंट रेलवे स्टेशन स्थित ऑफिसर्स रेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में एआईआरएफ के महामंत्री ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना की बहाली, विशेष तौर पर न्यूनतम वेतन, मल्टी प्राइस फै क्टर, आवास भत्ता, वार्षिक वेतन वृद्धि में सुधार, बोनस के एरियर का भुगतान, खाली पड़े लाखों पदों को भरे जाने, कारपोरेट के दबाव में किए जा रहे श्रम कानूनों में बदलाव को रोके जाने की मांग कर्मचारी कर रहे हैं।
 सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों ने कर्मचारियों की आशाओं पर पानी फेर दिया। इसको लेकर केंद्रीय कर्मचारी हड़ताल के लिए बाध्य हैं।
बताया कि 25 जनवरी से 10 फरवरी तक रेल कर्मियों को जागरूक करने के लिए संगठन अभियान चलाएगा। क्षेत्रीय संगठन और उत्पादन इकाइयों पर भी रेल कर्मियों को एकजुट संघर्ष के लिए तैयार किया जा रहा है।

सरकार की स्टार्ट-अप योजना के बारे में कहा कि श्रमिकों के लिए इसमें कुछ नहीं है।
भारतीय रेल के उत्पादों व अन्य सामग्री पर सर्विस टैक्स लेने को भी उन्होंने अनुचित ठहराया। इस दौरान जनरल शाखा सचिव राजेश कुमार सिंह, लाइन शाखा के डीके सिंह, राज कुमार, लक्ष्मीकांत उपाध्याय, एससी गौतम, एसपी सिंह, एसके सिंह मौजूद रहे।

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