निकाय चुनावः अपराजिता सोनकर को पार्टी में शामिल करने के पीछे भाजपा की यह है रणनीति
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अपराजिता सोनकर के भाजपा में शामिल होने का असर निकाय चुनाव पर भी पड़ना तय है। सियासी हलकों में चर्चा रही कि भाजपा ने पूरी सोची-समझी रणनीति के तहत ठीक निकाय चुनाव के मौके पर अपराजिता को पार्टी ज्वाइन कराई।
जबकि, जिला पंचायत में अविश्वास के बाद से ही इसके संकेत मिलने शुरू हो गए थे कि अपराजिता भाजपा का दामन पकड़ सकती हैं। नगर निगम के महापौर की कमान अबकी महिला के हाथ में होगी।
सियासी दिग्गजों के मुताबिक अपराजिता के साथ आने से निकाय चुनाव में भाजपा के नारी सशक्तिकरण के एजेंडे को भी मजबूती मिली है। दूसरे, जातिगत समीकरणों के लिहाज से भी अपराजिता का साथ आना भाजपा के लिए मुफीद साबित हो सकता है।
हालांकि कुछ सियासी जानकारों का दावा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों का प्रभाव ग्रामीण इलाकों में है। लिहाजा शहरी क्षेत्र में इससे बहुत असर नहीं पड़ने वाला।
वहीं, भाजपा प्रदेश के महामंत्री और निकाय चुनाव प्रभारी सलिल विश्नोई का कहना है कि भाजपा में हमेशा से महिलाओं कोसम्मान और महत्व मिला है। अपराजिता के आने से पार्टी को मजबूती मिली है।
गौरतलब है कि अपराजिता के मामा कैलाश सोनकर अजगरा से विधायक हैं। अपराजिता के भाजपा में शामिल होने के पीछे उनकी अहम भूमिका बताई जा रही है।
निगम चुनाव को लेकर चौकन्ना हुई भाजपा
पीएम के संसदीय क्षेत्र में निकाय चुनाव भाजपा की प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। इस बैठक में प्रदेश प्रभारी ने पार्टी नेताओं को साफ कर दिया कि महापौर सीट जीतने के साथ ही वार्डों में अधिक से अधिक पार्षद उम्मीदवार भी जिताने होंगे, ताकि पार्टी विकास से जुड़े अपने एजेंडे को आसानी से लागू करवा सके।
निगम के कई वार्डों में भाजपा उम्मीदवारों को सपा-कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिल रही है। इस वजह से पार्टी रणनीतिकार चिंतन में लगे हुए हैं। प्रदेश प्रभारी ने चुनाव संचालन समिति की बैठक में नेताओं को जीत का मंत्र दिया।
उन्हाेंने कि मेयर प्रत्याशी के संग संग हमारे पार्षद प्रत्याशी भी अधिक से अधिक जीत कर आएं इसकी भी चिंता की जानी चाहिए। केंद्र और प्रदेश में सरकार बनने के बाद नगर निगम चुनाव में भी अपनी मजबूत भागीदारी साबित करनी होगी। उन्होंने कहा कि बूथों पर केंद्रित होकर काम करें और यह भी सुनिश्चित कर लिया जाए कि मतदाता चुनाव के दिन अधिक से अधिक निकलें।
सलिल विश्नोई को काशी बुलाया गया
इस बीच उन्होंने बनारस में चुनाव प्रचार में जुटे प्रदेश महासचिव सलिल विश्नोई से भी बात की। विश्नोई ने बताया कि वह बनारस से वापस आ रहे हैं तो माथुर ने उन्हें फिर से बनारस की तरफ गाड़ी मोड़ने को कहा।
इधर मैथानी और सुरेश अवस्थी ओम माथुर के लिए किराए पर हेलीकाप्टर का इंतजाम करने में जुट गए। काफी कोशिश के बाद जब किसी हेलीकाप्टर का इंतजाम नहीं हो पाया तो माथुर कार से ही बनारस रवाना हो गए।
बताया जा रहा है कि कुछ देर के बाद फिर से सलिल विश्नोई का फोन आया। उन्होंने माथुर से कहा कि वह फतेहपुर तक आ गए हैं, जो भी निर्देश हों बता दीजिए। बहुत जरूरी हुआ तो वापस चले चलेंगे। इस पर माथुर ने सलिल को एक दिन रुककर आने के लिए कहा।