UP: सात साल बाद संस्कृत कॉलेजों में शिक्षकों और प्रचार्यों की नियुक्ति का रास्ता खुला, सरकार ने मांगा प्रस्ताव
प्रदेश शासन की तरफ से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का एक लेटर भी जारी किया गया है। इसके बाद यह मामला सात साल बाद फिर चर्चा में आ गया। विश्वविद्यालय में 25 वर्षों में दो बार नियुक्तियों पर रोक लग चुकी है।
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Varanasi News: संस्कृत महाविद्यालयों में शिक्षकों और प्राचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया का रास्ता सात साल फिर खुल गया है। उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी की ओर से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को एक पत्र जारी किया गया है।
कहा है कि संबद्ध अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेजों के प्राचार्य और शिक्षकों के नियमित चयन की प्रक्रिया के निर्धारण में परिनियमावली में जरूरी संशोधन किया जाए। ये भी कहा कि यदि किसी बिंदु पर शासन स्तर से मार्गदर्शन की जरूरत हो तो उसे भी तत्काल बताएं।
इसका पूरा प्रस्ताव या आख्या ही उपलब्ध करा दी जाए। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 25 वर्षों में दो बार शिक्षकों और प्रचार्यों की नियुक्तियों पर रोक लग चुकी है। सबसे पहले वर्ष 2000 में रोक लगी तो 2013 में चालू दी गई। फिर पांच साल तक चलने के बाद 2018 में राज्य सरकार ने रोक लगाई।
चर्चा का बना विषय
2018 में 416 शिक्षकों और 68 प्रचार्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई थी और शिक्षकों की नियुक्तियों की जिम्मेदारी उच्चस्तरीय शिक्षा आयोग को दे दी गई। इस शासनादेश के खिलाफ महाविद्यालयों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
शासन ने विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद से परिनियमावली में संशोधन करने की बता कही, लेकिन यहां भी सहमति नहीं बन सकी। विवि ने शासन को अवगत कराया। तब सरकार ने नियमों के अनुसार विवि से नियुक्तियों का अधिकार ही वापस ले लिया।