फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   After seven years way has been opened for appointment of teachers and principals in Sanskrit colleges

UP: सात साल बाद संस्कृत कॉलेजों में शिक्षकों और प्रचार्यों की नियुक्ति का रास्ता खुला, सरकार ने मांगा प्रस्ताव

Tue, 01 Jul 2025 06:01 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Tue, 01 Jul 2025 06:01 AM IST
सार

प्रदेश शासन की तरफ से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का एक लेटर भी जारी किया गया है। इसके बाद यह मामला सात साल बाद फिर चर्चा में आ गया। विश्वविद्यालय में 25 वर्षों में दो बार नियुक्तियों पर रोक लग चुकी है।

विज्ञापन
After seven years way has been opened for appointment of teachers and principals in Sanskrit colleges
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi News: संस्कृत महाविद्यालयों में शिक्षकों और प्राचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया का रास्ता सात साल फिर खुल गया है। उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी की ओर से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को एक पत्र जारी किया गया है। 

विज्ञापन


कहा है कि संबद्ध अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेजों के प्राचार्य और शिक्षकों के नियमित चयन की प्रक्रिया के निर्धारण में परिनियमावली में जरूरी संशोधन किया जाए। ये भी कहा कि यदि किसी बिंदु पर शासन स्तर से मार्गदर्शन की जरूरत हो तो उसे भी तत्काल बताएं। 
विज्ञापन


इसका पूरा प्रस्ताव या आख्या ही उपलब्ध करा दी जाए। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 25 वर्षों में दो बार शिक्षकों और प्रचार्यों की नियुक्तियों पर रोक लग चुकी है। सबसे पहले वर्ष 2000 में रोक लगी तो 2013 में चालू दी गई। फिर पांच साल तक चलने के बाद 2018 में राज्य सरकार ने रोक लगाई। 

विज्ञापन
विज्ञापन

चर्चा का बना विषय

2018 में 416 शिक्षकों और 68 प्रचार्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई थी और शिक्षकों की नियुक्तियों की जिम्मेदारी उच्चस्तरीय शिक्षा आयोग को दे दी गई। इस शासनादेश के खिलाफ महाविद्यालयों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। 

शासन ने विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद से परिनियमावली में संशोधन करने की बता कही, लेकिन यहां भी सहमति नहीं बन सकी। विवि ने शासन को अवगत कराया। तब सरकार ने नियमों के अनुसार विवि से नियुक्तियों का अधिकार ही वापस ले लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed