आपने सिर्फ फिल्मों में देखा होगा कि बचपन में घर छोड़कर भागा एक बच्चा किस तरह से सालों बाद अपने परिवार से मिलता है। मिलने के बाद भावुकता का वो पल सबकी आंखें नम कर देता है। लेकिन ऐसा रील लाइफ में नहीं बल्कि यूपी के भदोही में असल जिंदगी में हुआ है। जब 42 साल बाद एक व्यक्ति अपने परिवार से मिला, तो परिवार वाले अपने आंसू नहीं रोक पाए। देखें अगली स्लाइड्स में...
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मुरलीधर दुबे
- फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में औराई थानाक्षेत्र के सहसेपुर गांव निवासी मुरलीधर दुबे पुत्र स्व. सदानंद दुबे 15 साल की उम्र में पिता की डांट की डर से घर छोड़ कर भाग गए थे। उस वक्त 10वीं में फेल होने के बाद पिता की डांट की डर से 42 वर्ष पूर्व घर छोड़कर चले गए थे। घरवालों ने काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। लोग बताते हैं कि पुत्र घर छोड़ने के गम में ही उनके पिता की मृत्यु हो गई।
गुमशुदा बच्चों की बरामदगी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को उनके राजस्थान में होने की जानकारी मिली। बताया जाता है कि मुरलीधर दुबे कुछ दिन पूर्व राजस्थान के कोटा में बीमारी हालत में सड़क पर लावारिस पाए गए थे।
ऐसे लोगों की सेवा करने वाली संस्था 'अपना घर आश्रम' एअरोड्रम चौराहा कोटा राजस्थान के सरंक्षण में रह रहे थे। राजस्थान पुलिस ने भदोही पुलिस से संपर्क कर उनके वहां होने की जानकीर दी। पुलिस ने इनके भाई शेषधर दुबे को सूचना देकर कोटा भेजा।
वहां से प्रक्रिया पूरी करने के बाद शुक्रवार को कोटा से रवाना हुए उनके भाई शेषधर दूबे शनिवार को सुबह घर पहुंच गए। चौरी-चौरी एक्सप्रेस से माधोसिंह स्टेशन पर पहुंचने के बाद सभी घर गए। चार दशक के बाद बेटे को देख बुजुर्ग मां बसंती देवी संग घर के अन्य सदस्यों के आंखो से आंसू बह निकले।