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सिधवा घाट में कुपोषण, 11 बच्चे गंभीर
Varanasi
Updated Tue, 24 Jul 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। नक्खीघाट इलाके के सिधवाघाट मुहल्ले में दो-दो आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के बावजूद बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। एक चिकित्सा शिविर में जांच के दौरान 60 फीसदी नौनिहाल कुपोषित पाए गए। लगभग एक दर्जन बच्चे तो गंभीर रूप से कुपोषित मिले। इनमें ज्यादातर बुनकर परिवारों के हैं। बनारसी साड़ी उद्योग में मंदी के बाद ये लोग ठेला, रेहड़ी, खोमचा और सब्जी की दुकान लगाने लगे हैं।
रिया सवा दो साल की हो गई है। इस उम्र में बच्चे दौड़ने लगते हैं, मगर वह ठीक से खड़ी तक नहीं हो पाती। उसका वजन महज आठ किलोग्राम पाया गया है। अमेरिकन इंडियन फाउंडेशन की मदद से मानवाधिकार एवं जननिगरानी समिति ने 26 जून को मुहल्ले में स्वास्थ्य शिविर लगाया था। जैन अस्पताल के चिकित्सक डा. प्रवीण जैन ने 65 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इनमें पांच साल तक की उम्र के 26 बच्चों में से 16 कुपोषित पाए गए। उनमें से 11 गंभीर, पांच मध्यम कुपोषित मिले। चार साल की स्नेहा नौ किलो, डेढ़ साल का विवेक सवा छह, सवा तीन साल का सैफ 10, एक साल की अनन्या छह, ढाई साल की सानिया परवीन आठ, चार साल की महजबीं साढ़े सात, साढ़े चार साल की खुशी 10, दो साल का बबलू साढ़े छह और तीन साल के चांद का वजन साढ़े नौ किलो है। समन्वित बाल विकास परियोजना के मानक के मुताबिक सभी गंभीर रूप से कुपोषित हैं। सूरज, सोनी, नसीम अंसारी, रुही और आंचल मध्यम श्रेणी के कुपोषित हैं।
रिया की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय ले जाया गया। चिकित्सकों ने बाहर की दवाएं लिख दीं। समिति की श्रुति का कहना है कि जिसके पास भोजन का प्रबंध नहीं है वे बाजार से दवाएं कैसे खरीद सकते हैं। संस्था ने शुरुआत में अपनी तरफ से बच्चों के पोषण का इंतजाम किया था। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और एएनएम से बात करके उनको दुगनी पोषण सामग्री दिलाई गई। इससे उनकी सेहत सुधरी है पर इस तरह हमेशा के लिए उनको स्वस्थ नहीं बनाया जा सकता है। यह तभी हो सकता है जब इलाके में बुनियादी नागरिक सुविधाएं विकसित हों।
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रिया सवा दो साल की हो गई है। इस उम्र में बच्चे दौड़ने लगते हैं, मगर वह ठीक से खड़ी तक नहीं हो पाती। उसका वजन महज आठ किलोग्राम पाया गया है। अमेरिकन इंडियन फाउंडेशन की मदद से मानवाधिकार एवं जननिगरानी समिति ने 26 जून को मुहल्ले में स्वास्थ्य शिविर लगाया था। जैन अस्पताल के चिकित्सक डा. प्रवीण जैन ने 65 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इनमें पांच साल तक की उम्र के 26 बच्चों में से 16 कुपोषित पाए गए। उनमें से 11 गंभीर, पांच मध्यम कुपोषित मिले। चार साल की स्नेहा नौ किलो, डेढ़ साल का विवेक सवा छह, सवा तीन साल का सैफ 10, एक साल की अनन्या छह, ढाई साल की सानिया परवीन आठ, चार साल की महजबीं साढ़े सात, साढ़े चार साल की खुशी 10, दो साल का बबलू साढ़े छह और तीन साल के चांद का वजन साढ़े नौ किलो है। समन्वित बाल विकास परियोजना के मानक के मुताबिक सभी गंभीर रूप से कुपोषित हैं। सूरज, सोनी, नसीम अंसारी, रुही और आंचल मध्यम श्रेणी के कुपोषित हैं।
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रिया की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय ले जाया गया। चिकित्सकों ने बाहर की दवाएं लिख दीं। समिति की श्रुति का कहना है कि जिसके पास भोजन का प्रबंध नहीं है वे बाजार से दवाएं कैसे खरीद सकते हैं। संस्था ने शुरुआत में अपनी तरफ से बच्चों के पोषण का इंतजाम किया था। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और एएनएम से बात करके उनको दुगनी पोषण सामग्री दिलाई गई। इससे उनकी सेहत सुधरी है पर इस तरह हमेशा के लिए उनको स्वस्थ नहीं बनाया जा सकता है। यह तभी हो सकता है जब इलाके में बुनियादी नागरिक सुविधाएं विकसित हों।
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