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जेल में भी चलती है इनकी मर्जी
Varanasi
Updated Mon, 17 Nov 2014 05:30 AM IST
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अजीत कुमार सिंह
वाराणसी। बदमाशों की आरामगाह बन चुकी यूपी की जेलों में अफसरों की कम, बदमाशों की ज्यादा चलती है। ब्रजेश सिंह, मुख्तार अंसारी, त्रिभुवन सिंह, मुन्ना बजरंगी, उदयभान सिंह, रमेश काका जैसे बदमाश मुकदमे पर पेशी के लिए भी तभी आते हैं जब स्थितियां उनके अनुकूल हों। इन पर न तो जेल और न ही पुलिस प्रशासन की चलती है। जब जेल के किसी अफसर ने सख्ती बरतने की कोशिश की तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। पिछले दो-तीन वर्षों में गोरखपुर, आजमगढ़ और वाराणसी में कई जेल अफसरों की हत्याएं भी ऐसे ही बदमाशों के इशारे पर की गईं। इसका खुलासा हो चुका है।
सेंट्रल जेल वाराणसी में बंद बृजेश सिंह का करोड़ों रुपये का कारोबार है। पुलिस को जेल से ही इसके संचालन की सूचना मिली है जिसकी जांच चल रही है। पीलीभीत जेल में बंद गाजीपुर निवासी त्रिभुवन सिंह और ब्रजेश वाराणसी में पेशी के दौरान अक्सर मिलते हैं। यूं तो सभी जेलों में ऐसे अपराधियों को उनके मनमाफिक सुविधाएं मिल जाती हैं लेकिन फतेहगढ़ और सुल्तानपुर जेल को अपराधियों की खास आरामगाह माना जाता है। वाराणसी के रहने वाले सुभाष ठाकुर, भदोही के उदयभान सिंह उर्फ डाक्टर फ तेहगढ़ जेल में ही बंद हैं। अमूमन वाराणसी में पेशी के दो दिन पहले सुभाष और डॉक्टर बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हो जाते हैं।
जौनपुर निवासी मुन्ना बजरंगी सुल्तानपुर जेल में बंद है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक पूर्वांचल में सबसे ज्यादा शूटर बजरंगी के ही पास हैं और जेल से ही इन्हें संदेश मिलते रहते हैं। इसके लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल होता है और कई बार छापे में फोन पकड़े भी गए हैं। आगरा में बंद मुख्तार अंसारी को वाराणसी और गाजीपुर में पेशी के लिए वातानुकूलित एंबुलेंस से ही लाया जाता है। सरकार चाहे जिसकी हो मुख्तार का सिक्का हमेशा चलता है। बलिया जेल में बंद रमेश काका पर आरोप है कि उसने जेल में रहते हुए ही वाराणसी जिला जेल के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या कराई। आजमगढ़ के पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू के हत्यारोपी कुंटू सिंह पर वाराणसी सेंट्रल जेल से आजमगढ़, मऊ और बलिया में गैंग चलाने का संदेह पुलिस को है। पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के बीएचयू में भर्ती होने के मामले में तो कई पुलिस वालों पर गाज भी गिर चुकी है।
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कोट-
जेल में बंद बदमाशों के बारे में जिला पुलिस के अलावा एसटीएफ भी सूचनाएं जुटा रही है। जेल से गैंग चलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। बदमाश जेल से नेटवर्क न चला पाएं इसलिए वाराणसी समेत कई जेलों में जैमर भी लगाए जाएंगे। मुकर्रर तारीख पर उनकी पेशी भी सुनिश्चित कराई जाएगी। -अमरेंद्र कुमार सेंगर, आईजी जोन, वाराणसी
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कोर्ट की सख्ती के बाद वाराणसी-पीलीभीत जेल अफसरों से रिपोर्ट तलब
लखनऊ। मुख्तार अंसारी पर जानलेवा हमला करने के मामले में ब्रजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह के पेश न होने पर कोर्ट की नाराजगी के बाद एडीजी जेल आरआर भटनागर ने वाराणसी और पीलीभीत जेल प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। दोनों जेल प्रशासन से पूछा गया है कि इन अपराधियों की कब-कब पेशी थी? कितनी पेशी पर दोनों को कोर्ट भेजा गया और कितनी में वे नहीं गए? पेशी पर न जाने की वजह क्या बताई गई? वजह के लिए क्या आधार बनाए गए? इन सवालों के अलावा अन्य कई बिंदुओं पर संबंधित जेल के अफसरों से रिपोर्ट मांगी गई है। एडीजी ने कहा कि रविवार तक वाराणसी और पीलीभीत के जेल अफसर रिपोर्ट सौंप देंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मुख्तार अंसारी पर जानलेवा हमला करने के मामले में दोनों की विशेष न्यायाधीश (गिरोहबंद अधिनियम) लल्लू सिंह की कोर्ट में शुक्रवार को पेशी थी। वाराणसी जेल प्रशासन ने ब्रजेश की तो पीलीभीत जेल प्रशासन ने त्रिभुवन की तबीयत खराब होने का मेडिकल सर्टिफिकेट भेज दिया था। कोर्ट ने संबंधित जेल के अधीक्षकों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए महानिदेशक कारागार और प्रमुख सचिव गृह को जांच कराने का आदेश दिया है।
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वाराणसी। बदमाशों की आरामगाह बन चुकी यूपी की जेलों में अफसरों की कम, बदमाशों की ज्यादा चलती है। ब्रजेश सिंह, मुख्तार अंसारी, त्रिभुवन सिंह, मुन्ना बजरंगी, उदयभान सिंह, रमेश काका जैसे बदमाश मुकदमे पर पेशी के लिए भी तभी आते हैं जब स्थितियां उनके अनुकूल हों। इन पर न तो जेल और न ही पुलिस प्रशासन की चलती है। जब जेल के किसी अफसर ने सख्ती बरतने की कोशिश की तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। पिछले दो-तीन वर्षों में गोरखपुर, आजमगढ़ और वाराणसी में कई जेल अफसरों की हत्याएं भी ऐसे ही बदमाशों के इशारे पर की गईं। इसका खुलासा हो चुका है।
सेंट्रल जेल वाराणसी में बंद बृजेश सिंह का करोड़ों रुपये का कारोबार है। पुलिस को जेल से ही इसके संचालन की सूचना मिली है जिसकी जांच चल रही है। पीलीभीत जेल में बंद गाजीपुर निवासी त्रिभुवन सिंह और ब्रजेश वाराणसी में पेशी के दौरान अक्सर मिलते हैं। यूं तो सभी जेलों में ऐसे अपराधियों को उनके मनमाफिक सुविधाएं मिल जाती हैं लेकिन फतेहगढ़ और सुल्तानपुर जेल को अपराधियों की खास आरामगाह माना जाता है। वाराणसी के रहने वाले सुभाष ठाकुर, भदोही के उदयभान सिंह उर्फ डाक्टर फ तेहगढ़ जेल में ही बंद हैं। अमूमन वाराणसी में पेशी के दो दिन पहले सुभाष और डॉक्टर बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हो जाते हैं।
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जौनपुर निवासी मुन्ना बजरंगी सुल्तानपुर जेल में बंद है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक पूर्वांचल में सबसे ज्यादा शूटर बजरंगी के ही पास हैं और जेल से ही इन्हें संदेश मिलते रहते हैं। इसके लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल होता है और कई बार छापे में फोन पकड़े भी गए हैं। आगरा में बंद मुख्तार अंसारी को वाराणसी और गाजीपुर में पेशी के लिए वातानुकूलित एंबुलेंस से ही लाया जाता है। सरकार चाहे जिसकी हो मुख्तार का सिक्का हमेशा चलता है। बलिया जेल में बंद रमेश काका पर आरोप है कि उसने जेल में रहते हुए ही वाराणसी जिला जेल के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या कराई। आजमगढ़ के पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू के हत्यारोपी कुंटू सिंह पर वाराणसी सेंट्रल जेल से आजमगढ़, मऊ और बलिया में गैंग चलाने का संदेह पुलिस को है। पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के बीएचयू में भर्ती होने के मामले में तो कई पुलिस वालों पर गाज भी गिर चुकी है।
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जेल में बंद बदमाशों के बारे में जिला पुलिस के अलावा एसटीएफ भी सूचनाएं जुटा रही है। जेल से गैंग चलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। बदमाश जेल से नेटवर्क न चला पाएं इसलिए वाराणसी समेत कई जेलों में जैमर भी लगाए जाएंगे। मुकर्रर तारीख पर उनकी पेशी भी सुनिश्चित कराई जाएगी। -अमरेंद्र कुमार सेंगर, आईजी जोन, वाराणसी
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कोर्ट की सख्ती के बाद वाराणसी-पीलीभीत जेल अफसरों से रिपोर्ट तलब
लखनऊ। मुख्तार अंसारी पर जानलेवा हमला करने के मामले में ब्रजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह के पेश न होने पर कोर्ट की नाराजगी के बाद एडीजी जेल आरआर भटनागर ने वाराणसी और पीलीभीत जेल प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। दोनों जेल प्रशासन से पूछा गया है कि इन अपराधियों की कब-कब पेशी थी? कितनी पेशी पर दोनों को कोर्ट भेजा गया और कितनी में वे नहीं गए? पेशी पर न जाने की वजह क्या बताई गई? वजह के लिए क्या आधार बनाए गए? इन सवालों के अलावा अन्य कई बिंदुओं पर संबंधित जेल के अफसरों से रिपोर्ट मांगी गई है। एडीजी ने कहा कि रविवार तक वाराणसी और पीलीभीत के जेल अफसर रिपोर्ट सौंप देंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मुख्तार अंसारी पर जानलेवा हमला करने के मामले में दोनों की विशेष न्यायाधीश (गिरोहबंद अधिनियम) लल्लू सिंह की कोर्ट में शुक्रवार को पेशी थी। वाराणसी जेल प्रशासन ने ब्रजेश की तो पीलीभीत जेल प्रशासन ने त्रिभुवन की तबीयत खराब होने का मेडिकल सर्टिफिकेट भेज दिया था। कोर्ट ने संबंधित जेल के अधीक्षकों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए महानिदेशक कारागार और प्रमुख सचिव गृह को जांच कराने का आदेश दिया है।