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गिरिजा देवी की ठुमरी पर रामचंद्रन ने लगाया सुर
Varanasi
Updated Tue, 14 Oct 2014 05:31 AM IST
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वाराणसी। पुणे की गायिका रंजनी रामचंद्रन ने रविवार की रात ख्याल गायन के महारथी पं.साजन मिश्र की फरमाइश पर गिरिजा देवी की ठुमरी को सुरों से सजाया। उन्होंने भलवंत राय भट्ट के अलावा पं. रामाश्रय झा की कृष्ण के प्रेम-शृंगार पर आधारित बंदिशों पर अलापचारी की तो उभरते बांसुरी वादक हरि पौड्याल ने तुलसी के भजन पर धुन पेश कर अपनी तैयारी का अहसास कराया। संगीत-कला को समर्पित संस्था कला प्रकाश की ओर से दो दिनी भक्ति उत्सव का यह आगाज महमूरगंज स्थित ‘ज्ञान पुष्प’ परिसर में हुआ।
शाम सात बजे शुरुआत हरि पौड्याल ने बांसुरी पर राग हंसध्वनि की अवतारणा से की। रूपक ताल की प्रस्तुति के बाद तीन ताल और फिर द्रुत तीन ताल में उन्होंने लयकारी की। स्वरों के समन्वय के साथ ही अलंकारों, छंदों का प्रयोग सराहा गया। वैष्णव जन ते तेणे कहिए... पर धुन बजाकर उन्होंने विदा ली। तबले पर अमित ईश्वर ने संगत की। इनके बाद रंजनी रामचंद्रन ने राग नंद में विलंबित तीन ताल की बंदिश-हे बारे सइयां... से शुरुआत की। इसी राग में द्रुत तीन ताल की बंदिश-धन -धन आए नंद को जिनके घर आए श्याम... की प्रस्तुति की। राग चंद्रकौश में चंद्र की चांदनी मद भरी... के बाद आड़ा चौताल में तराना पेश किया। तबले पर विनोद लेले, हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। इस मौके पर विधायक रवींद्र जायसवाल, देवशीष डे, वीरेंद्र मिश्र, कमलाशंकर समेत तमाम लोग उपस्थित थे। अशोक कपूर ने आभार जताया।
इनसेट
डांडिया रास में पहुंचे आला अफसर
वाराणसी। रंग-बिरंगी झालरों से सजे महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में रविवार की रात डांडिया रास में जिले के आला अफसर भी पहुंचे। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी डॉ. कॉजल के अलावा अपनी पत्नी के साथ पहुंचे एसएसपी जोगिंदर कुमार ने दीप जलाकर इस लोक नृत्य की शुरुआत की। इस डांडिया रास का आयोजन माहेश्वरी समाज की ओर से किया गया था।
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रात करीब पौने नौ बजे दीपों से सुसज्जित परिसर में डांडिया रास शुरू हुआ। राजस्थानी लहंगा-चुनरी में महिलाएं और कुरता-पायजमा में पुरुषों ने डांडिया खेला। जन संपर्क मंत्री गौरव राठी ने प्रबंधन संभाला।
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शाम सात बजे शुरुआत हरि पौड्याल ने बांसुरी पर राग हंसध्वनि की अवतारणा से की। रूपक ताल की प्रस्तुति के बाद तीन ताल और फिर द्रुत तीन ताल में उन्होंने लयकारी की। स्वरों के समन्वय के साथ ही अलंकारों, छंदों का प्रयोग सराहा गया। वैष्णव जन ते तेणे कहिए... पर धुन बजाकर उन्होंने विदा ली। तबले पर अमित ईश्वर ने संगत की। इनके बाद रंजनी रामचंद्रन ने राग नंद में विलंबित तीन ताल की बंदिश-हे बारे सइयां... से शुरुआत की। इसी राग में द्रुत तीन ताल की बंदिश-धन -धन आए नंद को जिनके घर आए श्याम... की प्रस्तुति की। राग चंद्रकौश में चंद्र की चांदनी मद भरी... के बाद आड़ा चौताल में तराना पेश किया। तबले पर विनोद लेले, हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। इस मौके पर विधायक रवींद्र जायसवाल, देवशीष डे, वीरेंद्र मिश्र, कमलाशंकर समेत तमाम लोग उपस्थित थे। अशोक कपूर ने आभार जताया।
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डांडिया रास में पहुंचे आला अफसर
वाराणसी। रंग-बिरंगी झालरों से सजे महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में रविवार की रात डांडिया रास में जिले के आला अफसर भी पहुंचे। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी डॉ. कॉजल के अलावा अपनी पत्नी के साथ पहुंचे एसएसपी जोगिंदर कुमार ने दीप जलाकर इस लोक नृत्य की शुरुआत की। इस डांडिया रास का आयोजन माहेश्वरी समाज की ओर से किया गया था।
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रात करीब पौने नौ बजे दीपों से सुसज्जित परिसर में डांडिया रास शुरू हुआ। राजस्थानी लहंगा-चुनरी में महिलाएं और कुरता-पायजमा में पुरुषों ने डांडिया खेला। जन संपर्क मंत्री गौरव राठी ने प्रबंधन संभाला।