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‘दंगों के लिए ध्वनि प्रदूषण है जिम्मेदार’
Varanasi
Updated Tue, 14 Oct 2014 05:31 AM IST
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वाराणसी। प्रदेश में हो रहे दंगा-फसाद के लिए ध्वनि प्रदूषण को सीधे तौर पर जिम्मेदार बताया गया है। सामाजिक संस्था ‘सत्या फाउंडेशन’ के सचिव चेतन उपाध्याय ने शुक्रवार को प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन से मुलाकात उन्हें चार सूत्रीय फार्मूला सौंपा जिसमें कहा गया है कि डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के बेजा इस्तेमाल की वजह से ही प्रदेश के अमनचैन में खलल पड़ रही है। कभी परंपरा तो कभी एक दिन की बात का हवाला देकर इस समस्या को नजरंदाज किया जा रहा है, जो सही नहीं है। इस अनदेखी से कानून-व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
चेतन ने बताया कि प्रमुख सचिव ने मेरे द्वारा बताए गए फार्मूले को गंभीरता से लेते हुए इसे हाई पावर कमेटी को सौंप दिया है। यह कमेटी मेरे फार्मूले का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव आलोक रंजन को सौंपेगी। उसके बाद ध्वनि प्रदूषण को लेकर प्रदेश सरकार अगला कदम उठाएगी।
इनसेट..
सत्या फाउंडेशन द्वारा सुझाए गए फार्मूले
1. रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर पूरी तरह से बंद होना चाहिए।
2. जमीन से अधिकतम आठ फीट की ऊंचाई पर ही लाउडस्पीकर लगना चाहिए। मंदिर, मस्जिद की गुंबद से लाउडस्पीकर हटना चाहिए।
3. सड़क किनारे होने वाले सभी धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में साउंड सिस्टम पर रोक होनी चाहिए। खासकर इबादत स्थल, अस्पताल, स्कूल के आसपास तो ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर पूरी तरह से रोक होनी चाहिए।
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4. आवासीय या व्यावसायिक प्रतिष्ठान, धार्मिक/ सांस्कृतिक जुलूस में बिना साउंड प्रूफिंग के जनेरेटर का प्रयोग वर्जित होना चाहिए।
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चेतन ने बताया कि प्रमुख सचिव ने मेरे द्वारा बताए गए फार्मूले को गंभीरता से लेते हुए इसे हाई पावर कमेटी को सौंप दिया है। यह कमेटी मेरे फार्मूले का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव आलोक रंजन को सौंपेगी। उसके बाद ध्वनि प्रदूषण को लेकर प्रदेश सरकार अगला कदम उठाएगी।
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इनसेट..
सत्या फाउंडेशन द्वारा सुझाए गए फार्मूले
1. रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर पूरी तरह से बंद होना चाहिए।
2. जमीन से अधिकतम आठ फीट की ऊंचाई पर ही लाउडस्पीकर लगना चाहिए। मंदिर, मस्जिद की गुंबद से लाउडस्पीकर हटना चाहिए।
3. सड़क किनारे होने वाले सभी धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में साउंड सिस्टम पर रोक होनी चाहिए। खासकर इबादत स्थल, अस्पताल, स्कूल के आसपास तो ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर पूरी तरह से रोक होनी चाहिए।
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4. आवासीय या व्यावसायिक प्रतिष्ठान, धार्मिक/ सांस्कृतिक जुलूस में बिना साउंड प्रूफिंग के जनेरेटर का प्रयोग वर्जित होना चाहिए।