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शपथ तक सिमटा पॉलिथीन पर प्रतिबंध
Updated Tue, 14 Aug 2018 01:16 AM IST
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ज्ञानपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश बेअसर होता जा रहा है। जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते प्रतिबंध का असर अब केवल शपथ लेने-दिलाने तक सिमटकर रह गया है। पॉलिथीन पर्यावरण के साथ-साथ बेजुबानों के लिए भी खतरा बनती जा रही है। लापरवाही के बीच चर्चा तेज हो गई है कि प्रदेश में चौथी बार लगा प्रतिबंध भी अभियानों तक ही सिमटकर न रह जाए। पॉलिथीन के पर्यावरण पर दुष्प्रभावों के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने 15 जुलाई से 50 माइक्रॉन से पतली पॉलिथीन पर रोक की घोषणा कर दी। शुरू के दिनों में प्रशासन की सक्रियता से इस पर अमल किया गया, लेकिन धीरे-धीरे उदासीनता बढ़ती गई और पॉलिथीन का इस्तेमाल फिर धड़ल्ले से शुरू हो गया। अब दुकानदार और ग्राहक खुलेआम इसका प्रयोग करने लगे हैं। प्रशासन की तरफ से इस पर रोक लगाने और कार्रवाई करने की बात छोड़िए, टोकने से भी परहेज किया जा रहा है। इसके कारण प्रतिबंध का असर अब सिर्फ स्कूल-कॉलेजों में शपथ लेने तक सिमटता जा रहा है। इसके बाद न तो शपथ दिलाने वाले इस पर ध्यान दे रहे हैं और न ही शपथ लेने वाले। वहीं प्लास्टिक खाने से बेजुबान छुट्टा पशुओं की मौत हो रही है। प्रमुख सचिव के जिले में आगमन पर पॉलिथीन पर प्रतिबंध के असर की समीक्षा करने की सुगबुगाहट पर प्रशासन थोड़ा सक्रिय हुआ। खुलेआम दुकानों पर दिखने वाली पॉलिथीन हटा ली गई। लेकिन, शाम होते-होते दुकानों और लोगों के हाथों में पॉलिथीन वाले पैकेट फिर लहराने लगे। जानकारों की मानें तो इसके प्रयोग से पर्यावरण असंतुलन, बाढ़ और कैंसर जैसी लाइलाज बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
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