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तन पर भस्म चढ़ाई, भोले की धुनी रमाई
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वाराणसी। सुबह सात बजे जूना अखाड़े के संत काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने पहुंचे। शरीर पर भस्म लगाए नागा संन्यासी भक्ति रस में डूबे डमरू बजाते और करतब दिखाते चल रहे थे। भोले को भस्म चढ़ाने के बाद संतों ने गंगाजल और भस्म की होली खेली।
हनुमान घाट स्थित पंचदशनाम जूना अखाड़े से निकली शोभायात्रा में सबसे आगे रथों पर बैठकर महामंडलेश्वर निकले। पीछे डमरू और बैंड बाजा दल के साथ नागा संन्यासी चल रहे थे। शोभायात्रा मंदिर के पास पहुंची तो प्रशासन ने आम जनों के मंदिर में प्रवेश पर रोक लगा दी। संतों के आगमन मार्ग को छोड़कर सभी मार्ग बंद कर दिए गए। वहीं, शोभायात्रा देखने के लिए आम जन सड़कों के किनारे खड़े रहे। कड़ी सुरक्षा के बीच संतों ने भगवान शिव का पूजन किया। इसके बाद आवाहान अखाड़े के संतों ने पूजा की। दोपहर में पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी, निरंजनी और आनंद अखाड़े के संत बाबा के दर्शन करने पहुंचे। आगे बटुक अखाड़ों का ध्वज लिए चल रहे थे। पीछे बैंड और संतों की टोलियां चल रही थीं। इन अखाड़ों का नेतृत्व अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी ने किया।
प्रयागराज से काशी वास करने आए संतों को बाबा विश्वनाथ के दर्शन पूजन में परेशानी न हो, इसके लिए डीएम उनकी व्यवस्थाओं की कमान संभाली। जगह-जगह फूलों से संतों का स्वागत किया गया। इस दौरान मंदिर न्यास अध्यक्ष भी मौजूद रहे।
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महाशिवरात्रि के बाद से काशी में होली खेलने का क्रम प्रारंभ हो जाता है। बाबा के गण भस्म की होली खेलकर इस परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद भक्त मां अन्नपूर्णा के दरबार पहुंचे तो अन्नपूर्णा ऋषिकुल के 251 बटुकों ने मंत्रोचार के साथ उनका स्वागत किया। अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी ने संतों के साथ पुष्पों की पंखुणी और भस्म से होली खेली। इसके बाद प्रसाद रूप में ठंढई दी गई।
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हनुमान घाट स्थित पंचदशनाम जूना अखाड़े से निकली शोभायात्रा में सबसे आगे रथों पर बैठकर महामंडलेश्वर निकले। पीछे डमरू और बैंड बाजा दल के साथ नागा संन्यासी चल रहे थे। शोभायात्रा मंदिर के पास पहुंची तो प्रशासन ने आम जनों के मंदिर में प्रवेश पर रोक लगा दी। संतों के आगमन मार्ग को छोड़कर सभी मार्ग बंद कर दिए गए। वहीं, शोभायात्रा देखने के लिए आम जन सड़कों के किनारे खड़े रहे। कड़ी सुरक्षा के बीच संतों ने भगवान शिव का पूजन किया। इसके बाद आवाहान अखाड़े के संतों ने पूजा की। दोपहर में पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी, निरंजनी और आनंद अखाड़े के संत बाबा के दर्शन करने पहुंचे। आगे बटुक अखाड़ों का ध्वज लिए चल रहे थे। पीछे बैंड और संतों की टोलियां चल रही थीं। इन अखाड़ों का नेतृत्व अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी ने किया।
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प्रयागराज से काशी वास करने आए संतों को बाबा विश्वनाथ के दर्शन पूजन में परेशानी न हो, इसके लिए डीएम उनकी व्यवस्थाओं की कमान संभाली। जगह-जगह फूलों से संतों का स्वागत किया गया। इस दौरान मंदिर न्यास अध्यक्ष भी मौजूद रहे।
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महाशिवरात्रि के बाद से काशी में होली खेलने का क्रम प्रारंभ हो जाता है। बाबा के गण भस्म की होली खेलकर इस परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद भक्त मां अन्नपूर्णा के दरबार पहुंचे तो अन्नपूर्णा ऋषिकुल के 251 बटुकों ने मंत्रोचार के साथ उनका स्वागत किया। अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी ने संतों के साथ पुष्पों की पंखुणी और भस्म से होली खेली। इसके बाद प्रसाद रूप में ठंढई दी गई।