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रामनगर की श्रीरामलीला आज से
Updated Sun, 23 Sep 2018 02:04 AM IST
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रामनगर। रामनगर की ऐतिहासिक श्रीरामलीला अनंत चतुर्दशी के दिन यानी रविवार की शाम पांच बजे से शुरू हो जाएगी। रावण जन्म और क्षीरसागर की झांकी के साथ लीला का शुभारंभ रामबाग पर होगा। इसके लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोजक रामनगर किला और नगर पालिका प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। सफाई इंचार्ज संजय पाल की अगुआई में नगरपालिका के 50 कर्मचारियों ने रामबाग पोखरा और रावण जन्म वाले स्थान पर युद्ध स्तर पर सफाई अभियान चलाया। इसके अलावा शिल्पकारों ने क्षीरसागर की झांकी में प्रयोग होने वाले शेषनाग के पुतले को अंतिम रूप दिया। दुर्ग प्रशासन की ओर से सभी पात्रों को उनके वस्त्र और आभूषण सौंप दिए गए। बता दें कि पांच मुख्य स्वरूप का शृंगार तो रामलीला व्यास अपने हाथों से करते हैं लेकिन अन्य पात्र घर से ही तैयार हो कर लीला स्थल पहुंचते है। इस रामलीला की खास बात ये है कि सिर्फ राजा की भूमिका निभाने वाला पात्र ही जूते पहन कर लीला स्थल में प्रवेश करता है।
फिलहाल रामनगर में राममय माहौल तैयार है लेकिन साधुओं की जमात देखने को अभी तक नहीं मिली। साल दर साल इनकी संख्या कम होती जा रही है। पहले यह स्थिति रहती थी कि कोई भी मंदिर या धर्मशाला खाली नहीं रहता था। बहरहाल ग्यारह महीने घर गृहस्थी की किचकिच से अब एक महीने की फुरसत है। बनारसी अंदाज में दोपहर में ही पोखरों, गंगा नदी के तट पर जुटान होगी। स्नान ध्यान के साथ दंड बैठक होगी फिर लगेगा साफा पानी। उसके बाद भांग, ठंडई छानकर प्रभु के चरणों में दंडवत। लीला का आनंद उठाना और आरती में प्रभु श्रीराम का साक्षात दर्शन करने की आत्मिक अनुभूति अब एक महीने तक उनकी नई दिनचर्या बन जाएगी।
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पूजे गए इंद्र देवता, बाघम्बरी बग्घी का हुआ ट्रायल
रामनगर। रामलीला के निर्विध्न समाप्ति की कामना के साथ रामनगर किले में शनिवार को देवताओं के राजा इंद्र की विधिवत पूजा की गई। पूजा के बाद किले के दक्षिणी बुर्ज पर सफेद ध्वज फहराया गया। वहीं शाम के समय बाघम्बरी बग्घी का भी ट्रायल किया गया। इसी बग्घी से कुंवर अनंत नारायण सिंह की शाही सवारी दूर के लीला स्थलों तक पहुंचेगी।
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फिलहाल रामनगर में राममय माहौल तैयार है लेकिन साधुओं की जमात देखने को अभी तक नहीं मिली। साल दर साल इनकी संख्या कम होती जा रही है। पहले यह स्थिति रहती थी कि कोई भी मंदिर या धर्मशाला खाली नहीं रहता था। बहरहाल ग्यारह महीने घर गृहस्थी की किचकिच से अब एक महीने की फुरसत है। बनारसी अंदाज में दोपहर में ही पोखरों, गंगा नदी के तट पर जुटान होगी। स्नान ध्यान के साथ दंड बैठक होगी फिर लगेगा साफा पानी। उसके बाद भांग, ठंडई छानकर प्रभु के चरणों में दंडवत। लीला का आनंद उठाना और आरती में प्रभु श्रीराम का साक्षात दर्शन करने की आत्मिक अनुभूति अब एक महीने तक उनकी नई दिनचर्या बन जाएगी।
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पूजे गए इंद्र देवता, बाघम्बरी बग्घी का हुआ ट्रायल
रामनगर। रामलीला के निर्विध्न समाप्ति की कामना के साथ रामनगर किले में शनिवार को देवताओं के राजा इंद्र की विधिवत पूजा की गई। पूजा के बाद किले के दक्षिणी बुर्ज पर सफेद ध्वज फहराया गया। वहीं शाम के समय बाघम्बरी बग्घी का भी ट्रायल किया गया। इसी बग्घी से कुंवर अनंत नारायण सिंह की शाही सवारी दूर के लीला स्थलों तक पहुंचेगी।
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