{"_id":"5a591b194f1c1bb33f8b4851","slug":"21515789081-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कविता छोटी सी खिड़की, देख सकते हैं पुरी दुनिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कविता छोटी सी खिड़की, देख सकते हैं पुरी दुनिया
Updated Sat, 13 Jan 2018 02:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। रविशंकर उपाध्याय स्मृति संस्थान और बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केंद्र के तत्वावधान में परिचर्चा, काव्यपाठ के माध्यम से वक्ताओं ने कविता की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्र और युवा कवि अदनान कफील दरवेश को युवा कविता पुरस्कार से नवाजा गया। दरवेश ने कहा कि कविता एक छोटी सी खिड़की है, जिससे हम पूरी दुनिया को देख सकते हैं। कविता का कार्य अभिज्ञान कराना है।
समारोह में बतौर मुख्य वक्ता आलोचक प्रो. सूरज पालीवाल ने कहा कि कविता अपने समय की बारीकियों की समझ से निर्मित होती है। ऐसे में छोटी बात भी कविता के रूप में दिखाई दे सकती है। विशिष्ट वक्ता आलोचक अरुण होता ने रविशंकर की स्मृतियों को याद करते हुए युवा कविता के अभीत स्वर के भीतर छाई धुंध की चर्चा की। अध्यक्षता करते हुए कवि ज्ञानेंद्र पति ने कहा कि हिंदी कविता का युवा स्वर बहुत विविध और व्यापक है। उन्होंने पुरस्कृत कवि अदनान की कविताओं को केंद्र में रखकर अपनी बात कही। अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने युवा कविता को उम्मीद की कविता के रूप में देखा। समारोह में दरवेश को पुरस्कार स्वरूप पांच हजार रुपये, अंग वस्त्र, प्रशस्ति पत्र दिया गया। इस दौरान आलोचक डॉ. रामाज्ञा शशिधर, प्रो. सुशील सुमन, शोध छात्र जगन्नाथ दूबे आदि ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन अभिषेक राय, धन्यवाद ज्ञापन रविशंकर उपाध्याय स्मृति संस्था के सचिव वंशीधर उपाध्याय ने दिया। कार्यक्रम में राकेश रंजन, सुधांशु, शशिधर राकेश, शिवयादव, नीलेश कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
समारोह में बतौर मुख्य वक्ता आलोचक प्रो. सूरज पालीवाल ने कहा कि कविता अपने समय की बारीकियों की समझ से निर्मित होती है। ऐसे में छोटी बात भी कविता के रूप में दिखाई दे सकती है। विशिष्ट वक्ता आलोचक अरुण होता ने रविशंकर की स्मृतियों को याद करते हुए युवा कविता के अभीत स्वर के भीतर छाई धुंध की चर्चा की। अध्यक्षता करते हुए कवि ज्ञानेंद्र पति ने कहा कि हिंदी कविता का युवा स्वर बहुत विविध और व्यापक है। उन्होंने पुरस्कृत कवि अदनान की कविताओं को केंद्र में रखकर अपनी बात कही। अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने युवा कविता को उम्मीद की कविता के रूप में देखा। समारोह में दरवेश को पुरस्कार स्वरूप पांच हजार रुपये, अंग वस्त्र, प्रशस्ति पत्र दिया गया। इस दौरान आलोचक डॉ. रामाज्ञा शशिधर, प्रो. सुशील सुमन, शोध छात्र जगन्नाथ दूबे आदि ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन अभिषेक राय, धन्यवाद ज्ञापन रविशंकर उपाध्याय स्मृति संस्था के सचिव वंशीधर उपाध्याय ने दिया। कार्यक्रम में राकेश रंजन, सुधांशु, शशिधर राकेश, शिवयादव, नीलेश कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन